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पूर्व सेना प्रमुख और 155 पूर्व सैनिकों की मोदी के खिलाफ राष्ट्रपति को चिट्ठी, कइयों का इससे इंकार

ये सैनिक 'मोदी की सेना' कहे जाने, अभिनंदन की फोटो यूज करने और शहीदों के नाम पर वोट मांगे जाने पर नाराज हैं.

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दीपक कपूर 2007-2010 तक में देश की थलसेना के प्रमुख बने थे.
2019 के लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री मोदी का चुनावी रैलियों में सेना और शहीदों के नाम पर जनता से वोट मांगने पर देश में पूर्व सैनिक नाराज हो गए हैं. 156 पूर्व सैनिकों ने साइन करके एक लिखित शिकायत राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को दी है जिसमें लिखा है कि नेताओं द्वारा बॉर्डर पर स्ट्राइक जैसे मिलिट्री ऑपरेशन्स का क्रेडिट लिया जा रहा है. नेता यहां तक पहुंच गए हैं कि इंडियन आर्म्ड फोर्सेज को मोदी की सेना कहा जा रहा है. साथ ही मीडिया में आई कई तस्वीरों में पार्टी कार्यकर्ता आर्मी की वर्दी में दिख रहे हैं. हद तो तब हो गई जब इन रैलियों में इंडियन एयर फोर्स के विंग कमांडर अभिनंदन वर्थमान की तस्वीरें भी इस्तेमाल की गईं. इस पत्र में पूर्व आर्मी प्रमुख दीपक कपूर के अलावा, सुनिथ फ्रैंसिस रोडरिक्स और शंकर रॉयचौधरी के नाम शामिल हैं. वहीं चार नौसेना प्रमुखों जैसे लक्ष्मीनारायण रामदास, विष्णु भागवत, अरुण प्रकाश, सुरेश मेहता के साथ-साथ पूर्व एयर फोर्स प्रमुख एनसी सूरी के नाम भी लिखे गए हैं. यहां लिखा गया है कि कई पूर्व सैनिकों जैसे नौसेना के पूर्व प्रमुख ने मुख्य चुनाव आयुक्त को इस बारे में लिखा था जिस पर संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने मामले में नेताओं से जवाब भी मांगा है. जैसे चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में जवाब देने के लिए कहा है. मगर अफसोस की बात ये कि इन सब के बावजूद चुनावी रैलियों में नेताओं ने सेना और शहीदों के नाम पर वोट मांगना बंद नहीं किया है. ये है वो पत्र- Untitled design (48)   Untitled design (49) Untitled design (50) Untitled design (51) पत्र में ये भी लिखा गया है, "अब चुनावों के बीच जहां आचार संहिता लगी हुई है, नेता और तमाम राजनीतिक पार्टियां इसे ठेंगा दिखाने में लगी हैं और जैसे जैसे चुनावों की तारीख नजदीक आती जाएंगी, पार्टियां इसे और ज्यादा नजरांदाज करने पर उतारू हो जाएंगी. हमें भरोसा है कि आप हमारी इस बात से सहमत होंगे कि देश में तमाम सशस्त्र बल संविधान के अधीन स्थापित हुए हैं और राष्ट्रपति सुप्रीम कंमाडर होते हैं. ऐसे में देश में नेताओं की तरफ से इनका चुनावों में इस्तेमाल सही नहीं है. इससे सेना की वर्दी पहने वो हर जवान शर्मिंदा महसूस करता है देशसेवा में तैनात है. इससे देश की एकता और अखंडता को सीधे तौर पर खतरा पैदा हो सकता है. हम अपील करते हैं कि हमारे सशस्त्र बलों का धर्म निरपेक्ष और गैर- राजनीतिक रूप बना रहे. इसलिए इस मामले में आप जल्द से जल्द कार्रवाई करें और इन राजनीतिक दलों को निर्देश दें कि वो मिलिट्री, उनकी वर्दी और ऑपरेशन्स का इस्तेमाल चुनावी रैलियों में वोट मांगने के लिए न करें." अब ये पत्र तो सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हो रहा है मगर राष्ट्रपति ने इस तरह के किसी भी लेटर के रिसीव होने से मना कर दिया है. न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक राष्ट्रपति भवन ने कहा है कि इस तरह का कोई पत्र पूर्व सैनिकों की तरफ से नहीं आया है. साथ ही इसपर पूर्व एयर फोर्स प्रमुख एनसी सूरी की तरफ से ये बयान आ गया है कि ये लेटर उनकी बिना इजाजत के लिखा गया है. इसमें उनका नाम तो लिखा गया है मगर वो इसके कॉन्टेंट से इतेफाक नहीं रखते हैं. इसी तरह की बात सुनिथ फ्रैंसिस रोडरिक्स की तरफ से भी कही गई है.   लल्लनटॉप वीडियो भी देखें-

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