"104 साल की ये बूढ़ी औरत जो एक दूर-दराज गांव में रहती है, न अखबार पढ़ती है, न टीवी देखती है, फिर भी स्वच्छ भारत मिशन को फॉलो करती है. ऐसे लोगों से युवाओं को इंस्पिरेशन लेनी चाहिए. मैं मीडिया से कहना चाहूंगा की मुझे कवर मत करिए, लेकिन इस औरत की कहानी को देश भर में फैलाइए... जब किसी गांव में वॉशरूम बनते हैं, जो सबसे ज्यादा फायदा वहां की औरतों को मिलता है जिन्हें खेतों और जंगलों में जाना पड़ता है. मैं उनके सम्मान में अपना सिर झुकाता हूं."साथ ही मोदी ने कहा कि वो ये सुनिश्चित करना चाहते हैं कि क्लीन इंडिया मिशन के तहत हर घर में 2019 तक वॉशरूम बन जाएं. मोदी ने फूलबसन बाई यादव को भी सम्मानित किया, जो गांव में आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़ी हुई महिलाओं के लिए काम करती हैं. 2012 में फूलबसन को पद्मश्री से सम्मानित किया गया था.
उनके पैर छूकर बोले मोदी, 'मीडिया मुझे नहीं, इन्हें कवर करे'
104 साल की हैं कुंवर बाई. मोदी ने उनके गांव जाकर उन्हें सम्मानित किया.
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फोटो - thelallantop
छत्तीसगढ़ के धमतरी में रहने वाली 104 साल की दादी के गांव जा कर प्रधानमंत्री मोदी ने उनके पैर छुए. क्योंकि उन्होंने अपनी बकरियां बेच कर घर में वॉशरूम बनवाया. और उनसे इंस्पायर होकर गांव के और लोगों ने भी अपने घरों में वॉशरूम बनवाए. और इसीलिए मोदी ने उनको रर्बन (रूरल+अर्बन) मिशन के तहत स्पेशल सम्मान दिया और उनके पैर छुए. दादी का नाम है कुंवर बाई. धमतरी जिले के कुरुभात गांव में रहती हैं जो कि एक नक्सल-प्रभावित जगह है. गांव में बेसिक सुविधाएं नहीं थी. लोग खुले में पॉटी करते थे. तो दादी ने फैसला लिया कि वो गांव को एक वॉशरूम गिफ्ट करने के लिए अपनी 8-10 बकरियां बेच देंगी. अपने घर में वॉशरूम बनवाने के बाद इन्होंने गांव के दूसरे लोगों को घर बुला कर वॉशरूम दिखाया. और बताया कि वॉशरूम बनवाना क्यों जरूरी होता है. जिससे दूसरे लोग भी कन्विंस हुए. मोदी कुंवर बाई से खूब इम्प्रेस हो गए. अपनी स्पीच में कहा:
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