एक शख्स जेल में है. दुश्मन देश ने उस पकड़ लिया है. हाई-सिक्योरिटी में रखा हुआ है. उसे छुडाना बहुत ज़रूरी है. टॉर्चर से बचाने के लिए भी और देश के राज़ दुश्मन के हाथ ना लग जाए, इसलिए भी. जिम्मेदारी मिलती है हमारे एक नायक को. वो अपनी जान दांव पर लगाकर दुश्मन के इलाके में जा घुसता है. उनसे लोहा लेता है और अपने साथी को सही-सलामत वापस ले आता है. ये किसी फिल्म या जासूसी उपन्यास की कहानी ही हो सकती है. फिल्मों में या कहानियों में ही ऐसा मुमकिन होता है. जहां हमारा जासूस, जासूसी के साथ साथ हीरोगिरी भी उतने ही कॉन्फिडेंस से कर लेता है. असल ज़िन्दगी में ऐसा हो पाना मुश्किल ही है. आज आपको सुनाएंगे कहानी उस हस्ती की जिसने फिल्मों में जासूसों के भौकाल और रियल लाइफ के संघर्ष के बीच की रेखा महीन कर दी. बहादुरी की मिसाल पेश करते हुए अपनी साथी को अंग्रेजों के चंगुल से छुड़ा लाने वाली एक जासूस, जो भारत की सबसे कम उम्र की जासूस थी. नाम का नाम था सरस्वती राजामणि. देखें वीडियो.
तारीख़: भारतीय जासूसी का कारनामा सुन सीना चौड़ा हो जाएगा!
कहानी उस हस्ती की जिसने फिल्मों में जासूसों के भौकाल और रियल लाइफ के संघर्ष के बीच की रेखा महीन कर दी.
Advertisement
Add Lallantop as a Trusted Source

Advertisement
Advertisement

.webp?width=80)



















