आसान भाषा में शो के इस एपिसोड में हम चर्चा करेंगे कि क्या सिर्फ चुनाव कराना ही लोकतंत्र की पहचान है? या लोकतंत्र में जनता की आवाज, उनके अधिकारों और असहमति के लिए भी जगह होती है? साथ ही यह भी जानेंगे कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर लोगों की आवाज दबाना कितना जायज है? वहीं, यह भी जानेंगे कि क्या अपनी हर मांग मनवाने का रास्ता सिर्फ और सिर्फ धरना-प्रदर्शन ही है? पूरा मामला जानने के लिए यह वीडियो देखें.
आसान भाषा में: ‘राइट टू पीसफुल प्रोटेस्ट’ किसी भी डेमोक्रेसी के लिए क्यों जरूरी है?
ABM के लेटेस्ट एपिसोड में जानेंगे कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर लोगों की आवाज दबाना कितना जायज है?
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