मार्च 2004 की बात है. जम्मू कश्मीर में शोपियां जिले में आतंकियों के एक सीक्रेट ठिकाने पर शाम का वक्त हो रहा है. खाट पर लेटा हुआ अबू तोरारा बगल में लेते अपने साथी से कहता है, “लगता है कुछ गड़बड़ है”. उसका साथी अबू सबजार अपनी जेब से एक सिगरेट निकलकर उसे सुलगाते हुए तोरारा की तरफ गर्दन घुमाता है. तोरारा अब तक खड़ा हो चुका था. दीवार से टेक लगाए तोरारा के पैरों में एक AK 47 रखी हुई है. उसकी नजर किचन की तरफ है. जहां दरवाजे को पार कर गर्म गर्म कहवे की खुशबू उन दोनों तक पहुंच रही है.अपनी सिगरेट बुझाते हुए अबू सबजार तोरारा से कहता है, क्या तुझे उससे कुछ और बात भी करनी है. कौन था इफ्तिखार? इसी सवाल से शुरू होती है हमारी आज की कहानी. देखिए वीडियो.
तारीख़: इफ्तिखार- ये नाम कभी भूल न पाएगा हिजबुल मुजाहिदीन!
दीवार से टेक लगाए तोरारा के पैरों में एक AK 47 रखी हुई है.
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