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दुनियाभर में हुए ड्रोन हमलों में सबसे ज्यादा खून कहां बहा? जानकर हैरान रह जाएंगे

वे बड़े हमले, जिनमें ड्रोन उड़ाकर लोगों की हत्या की गई.

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अमेरिकी ड्रोन हमलों में पाकिस्तान के आम लोगों का सबसे ज्यादा खून बहा है
बीती 7 नवंबर को इराक (iraq) के प्रधानमंत्री मुस्तफा अल-कदीमी (Mustafa Al-Kadhimi) के घर पर ड्रोन (Drone) से हमला किया गया. इस हमले में इराकी प्रधानमंत्री बाल-बाल बच गए. हालांकि, उनके कुछ सुरक्षाकर्मियों को चोटें आईं. सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि हमला करने के लिए तीन ड्रोन भेजे गए थे. इनमें से दो को मार गिराया गया, जबकि एक किसी तरह प्रधानमंत्री के घर तक पहुंचने में कामयाब रहा.
बीते जून महीने में जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने ड्रोन के जरिए एक एयरफोर्स स्टेशन में दो धमाके किए थे. इस हमले में किसी की मौत तो नहीं हुई थी, लेकिन भारतीय वायुसेना की एक इमारत क्षतिग्रस्त हो गई थी. भले ही भारत में यह पहला ड्रोन अटैक था, लेकिन बीते कुछ सालों के दौरान दुनियाभर में ड्रोन अटैक की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है. इस रिपोर्ट में हम उन ड्रोन हमलों की बात करेंगे जिनके जरिए लोगों की हत्या कर दी गई. ईरान के ताकतवर कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या जनवरी 2020 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के आदेश पर बगदाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बाहर कुछ कारों पर ड्रोन से हमला किया गया. एक अमेरिकी ड्रोन से तीन रॉकेट दागे गए. इस हमले में ईरान (Iran) की सेना के कमांडर कासिम सुलेमानी (Qasem Soleimani) सहित आठ लोगों की मौत हो गई. जनरल सुलेमानी ईरानी सेना की शाखा - कुद्स फोर्स - के प्रमुख थे. अमेरिका उन्हें सैकड़ों अमेरिकी नागरिकों की हत्या का जिम्मेदार मानता था. उसने सुलेमानी को आतंकवादी भी घोषित कर रखा था.
सुलेमानी को पश्चिम एशिया में ईरानी गतिविधियों का प्रमुख रणनीतिकार भी माना जाता था. उन्होंने यमन, सीरिया और इराक में अपना एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया था, ताकि इन देशों में ईरान का असर बढ़ाया जा सके.
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कासिम सुलेमानी ताकतवर ईरानी जनरल थे | फोटो: AP
लीबिया में यूएई के ड्रोन ने 26 निहत्थे कैडेट्स को मार दिया जनवरी 2020 में ही लीबिया (Libya) की राजधानी त्रिपोली में एक सैन्य अकादमी पर ड्रोन से हमला किया गया. इस हमले में अकादमी के 26 निहत्थे कैडेट्स की मौत हो गई थी. इस हमले के आरोप यूएई पर लगे, लेकिन उसने इससे पल्ला झाड़ते हुए कहा कि लीबिया में चल रहे संघर्ष में अब उसका कोई दखल नहीं है.
इस हमले के आठ महीने बाद BBC ने इस बात का खुलासा किया कि हमले के पीछे यूएई (UAE) का ही हाथ था. उसने इस हमले में इस्तेमाल किए गए रॉकेट के पुर्जों की पड़ताल करने बाद यह दावा किया. BBC के मुताबिक जिस रॉकेट से हमला किया गया था उसे केवल विंग लूंग-2 नामक ड्रोन के जरिए देगा जा सकता है, और हमले के समय यह ड्रोन सिर्फ यूएई के पास ही था. हूती विद्रोहियों के ताबड़तोड़ ड्रोन हमले मध्य पूर्व के देश यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) और सऊदी अरब (Saudi Arabia) के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना के बीच साल 2015 से जंग जारी है. इसमें सऊदी अरब, यमन के राष्ट्रपति आबिद रब्बो मंसूर-हादी की तरफ से लड़ रहा है. इस लड़ाई में हूती विद्रोहियों ने कई बार ड्रोन से हमले किए हैं. अगस्त 2021 में दक्षिणी यमन में स्थित एक एयरबेस पर हमले में सरकार समर्थक 30 लड़ाके मारे गए. इससे पहले 2019 में हूती विद्रोहियों ने यमन के अनद एयरबेस पर एक परेड के दौरान हमला किया था. इसमें यमनी खुफिया एजेंसी के मुखिया सहित 6 लोगों की जान गई थी.
हूती विद्रोहियों ने कई बार सऊदी अरब की सीमा के अंदर भी ड्रोन से हमले किए हैं. इन हमलों से उन्होंने खाड़ी से लेकर लाल सागर तक जाने वाली पाइप लाइनों, पेट्रो केमिकल प्रतिष्ठान और हवाई अड्डों को काफी नुकसान पहुंचाया है.
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बीते सालों के दौरान हूती विद्रोहियों ने सऊदी अर्ब के कई ठिकानों को ड्रोन के जरिए निशाना बनाया है | फोटो: AP
अमेरिकी ड्रोन हमलों में पाकिस्तान के आम लोगों का सबसे ज्यादा खून बहा ड्रोन से दुनिया के कई हिस्सों में हमले हुए हैं, लेकिन अब तक सबसे ज्यादा हमले पाकिस्तान (Pakistan) में अमेरिकी सेना के ड्रोनों द्वारा किए गए हैं. इन हमलों में सैकड़ों आम लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी. अमेरिकी खुफिया एजेंसी (CIA) ने साल 2006 में अपने एक मानवरहित ड्रोन से अफगानिस्तान की सीमा से लगे पाकिस्तान के डैम डोला इलाके पर ताबड़तोड़ हमले किए. अमेरिका ने ये हमले अल-कायदा के दूसरे नंबर के कमांडर अयमान अल-जवाहिरी को मारने के लिए किए थे. इन हमलों से अल-जवाहिरी तो बच गया, लेकिन 18 निर्दोष नागरिक मारे गए.
इसके बाद साल 2008 में अमेरिकी सेना ने पाकिस्तान के संघ प्रशासित आदिवासी क्षेत्र (FATA) पर ड्रोन से हमला किया. इस हमले में सात आतंकवादी मारे गए, लेकिन साथ ही तीन महिलाएं और दो बच्चों को भी अपनी जान गंवानी पड़ी.
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फोटो: AP

साल 2009 में अमेरिका ने पाकिस्तान में अब तक के सबसे बड़े ड्रोन हमले को अंजाम दिया. पाकिस्तान के सीमाई क्षेत्र - माकिन - में हुए इस ड्रोन हमले में 60 से 80 लोगों की मौत हुई थी. अमेरिका ने यह ड्रोन हमला तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (Tehrik-i-Taliban Pakistan) गुट के आतंकी बैतुल्लाह मसूद को निशाना बनाते हुए किया था, लेकिन वह इस हमले में बच गया.
इसके बाद 2011 में पाकिस्तान के वज़ीरिस्तान (Waziristan) में हुए अमेरिकी ड्रोन हमले में भी भारी तबाही हुई. यहां के दत्ताखेल इलाके में हुए ड्रोन हमले में 30 से ज्यादा आम लोगों ने अपनी जान गंवाई थी. हालांकि, अमेरिकी सेना के जनरलों ने इसे एक सफल ड्रोन अटैक बताया था, क्योंकि इसमें तालिबान के एक शीर्ष कमांडर शेराबत खान वजीर सहित 11 आतंकी भी मारे गए थे.

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