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कमिश्नर सिस्टम: वो विवादित सिस्टम जिसे अखिलेश नहीं ला पाए, योगी ने लागू कर दिया

नोएडा के एसएसपी हाल ही में अश्लील वीडियो के चलते सस्पेंड हुए थे, अब हुए ये बदलाव.

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योगी आदित्यनाथ ने कमिश्नर सिस्टम लागू होने की जानकारी दी. यूपी DGP ओपी शर्मा ने सरकार के फैसले का स्वागत किया.

उत्तर प्रदेश, वहां के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और यूपी पुलिस किसी न किसी कारण से हमेशा खबरों में रहते हैं. अभी एक बार फिर हैं. इस बार एक बड़े फैसले की वजह से हैं. दरअसल, यूपी कैबिनेट ने लखनऊ और नोएडा में कमिश्नर सिस्टम लागू करने के प्रपोज़ल को मंजूरी दे दी है. सीएम योगी ने खुद इस बात की जानकारी दी. कहा,

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'हमारी सरकार ने आज पुलिस व्यवस्था में सुधार के लिए एक बड़ा कदम उठा लिया है. यूपी कैबिनेट ने लखनऊ और नोएडा में पुलिस कमिश्नर सिस्टम को लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.'

ये भी कहा कि नए कमिश्नरेट में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने के लिए दो महिला पुलिस अधिकारियों की तैनाती की जा रही है. इनमें से एक अधिकारी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP) रैंक की और दूसरी एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस ( ASP) रैंक की होंगी.

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नए ऐलान के मुताबिक-

आलोक सिंह नोएडा के और सुजीत पांडेय लखनऊ के पहले पुलिस कमिश्नर होंगे.

इंस्पेक्टर जनरल (IG) नवीन अरोड़ा और IG निलाब्जा चौधरी लखनऊ के जॉइंट पुलिस कमिश्नर होंगे.

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डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DIG) अखिलेश कुमार और DIG श्रीपर्णा गांगुली नोएडा के एडिशनल पुलिस कमिश्नर होंगे.

नोएडा और लखनऊ को छोड़कर देश के करीब 15 राज्यों के 71 शहरों में कमिश्नर सिस्टम लागू है. आजादी के पहले केवल कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में कमिश्नर सिस्टम लागू था. बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तराखंड में कमिश्नर सिस्टम लागू नहीं है. इस लिस्ट में पहले यूपी का भी नाम था, अब नहीं होगा.

सरकार का तर्क है कि कमिश्नर सिस्टम लागू होने से कानून व्यवस्था में सुधार होगा. DGP ओपी सिंह का कहना है कि इस सिस्टम को लाने के पीछे का कारण क्राइम का बदलता हुआ प्रोफाइल है. उनके मुताबिक, क्राइम प्रोफाइल बदल रहे हैं, चरित्र बदल रहे हैं, महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं, साइबर क्राइम हो रहा है, बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जिनमें पुलिस को फास्ट रिस्पॉन्स की जरूरत होती है. इसी जरूरत को देखते हुए ये लागू किया गया है.

क्या होता है कमिश्नर सिस्टम?

इसे समझने के लिए आपको राज्य पुलिस के सिस्टम को समझना होगा. हर राज्य की अपनी पुलिस होती है. हर राज्य का गृह विभाग उस पुलिस फोर्स के लिए जिम्मेदार होता है. हर राज्य की पुलिस का हेड डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) रैंक का कोई IPS अधिकारी होता है. जैसे यूपी के DGP 1983 बैच के IPS अधिकारी ओपी सिंह हैं.

स्टेट पुलिस हेड की मदद के लिए कई एडिशनल DGP (ADGP) या स्पेशल DGP होते हैं. ये सभी DGP राज्य पुलिस के तहत आने वाले ब्यूरो के लिए जिम्मेदार होते हैं. बड़े राज्य की पुलिस फोर्स आमतौर पर जोन्स, रेंज और कमिश्नरेट में विभाजित होती है. छोटे राज्य की पुलिस आमतौर पर रेंज में ही विभाजित होती है. हालांकि पुलिस फोर्स का विभाजन जोन में होगा, या रेंज में या फिर कमिश्नरेट में होगा, ये राज्य पर निर्भर करता है.

कमिश्नर सिस्टम ज्यादातर बड़े शहरों में है.ऐसे शहरों में जिनकी आबादी 10 लाख से ज्यादा है. जहां ये सिस्टम लागू होता है वहां कमिश्नर पुलिस का सबसे ऊंचा पद होता है. पुलिस कमिश्नर ADG, या इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IGP)रैंक का कोई IPS अधिकारी होता है.

जिन शहरों में ये सिस्टम नहीं है वहां कानून व्यवस्था की देखरेख डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) के हाथ में होती है, जो कि एक IAS अधिकारी होता है. यानी पुलिस को कोई भी बड़ा काम करने के लिए DM के आदेश की जरूरत होती है. भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 के सेक्शन-4 के तहत डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पास पुलिस पर नियंत्रण करने के अधिकार होते हैं. ऐसे सिस्टम में जिला पुलिस का हेड सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP) होता है.

कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर (Crpc) के तहत मजिस्ट्रेट को कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ शक्तियां मिली हैं. साधारण शब्दों में कहा जाए, तो जिन शहरों में कमिश्नर सिस्टम नहीं है, वहां पुलिस अधिकारी (SP) को फैसला लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र नहीं है. वो शासन के आदेश पर ही काम करते हैं. धारा 144 लागू करने के लिए भी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत होती है. अरेस्ट वारंट जारी करने का अधिकार, हथियार लाइसेंस जारी करने का अधिकारी DM के पास होता है. इसके अलावा अगर कहीं दंगे जैसी स्थिति बनती है, तो वहां पर भी तुरंत फैसला लेने के लिए पुलिस अधिकारी को DM की परमिशन की जरूरत होती है.

नोएडा और लखनऊ में भी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के तहत पुलिस काम करती थी. लेकिन कमिश्नर सिस्टम आने के बाद पुलिस को काम करने की आजादी मिल जाएगी. दिसंबर 2018 में यूपी के गवर्नर राम नाइक थे. उन्होंने कहा था कि अपराध कम करने और कानून व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियां खत्म करने के लिए कमिश्नर सिस्टम लाया जाना चाहिए. हालांकि, उस वक्त IAS लॉबी ने इस बात का विरोध किया और फैसला नहीं लिया गया.

क्या होगा कमिश्नर सिस्टम आने पर?

लॉ एंड ऑर्डर से सारे मजिस्टेरियल अधिकार पुलिस कमिश्नर के पास होंगे. DM के पास रिवेन्यू से जुड़े हुए काम ही रह जाएंगे. Crpc के तहत DM को जो अधिकार मिले हैं, वो भी कमिश्नर के हाथों में चले जाएंगे. यूपी DGP ओपी सिंह का कहना है कि DM के पास इतना वक्त नहीं होता कि वह लॉ एंड ऑर्डर पर ध्यान दे सके. उसके पास पहले से ही काम बहुत ज्यादा होता है, इसलिए काम की अधिकता की वजह से वह कानून व्यवस्था पर पूरा ध्यान नहीं दे पाता.

इस मामले पर यूपी के पूर्व DGP केएल गुप्ता का कहना है कि ये फैसला अपराध कम करने की दिशा में सही कदम है. उन्होंने कहा था,

'ये सिस्टम पहले ही लाया जाना चाहिए था. इससे अब सीनियर पुलिस अधिकारियों को ज्यादा शक्तियां मिलेंगी और जिम्मेदारियां बढ़ेंगी. जब किसी जिले में दंगा होता है, तब पुलिस को DM के अप्रूवल का इंतजार करना पड़ता है. कई बार ऐसा हुआ है कि परमिशन मिलने में देरी हुई और हालात पुलिस के हाथों से बाहर चले गए थे. कमिश्नर सिस्टम पुलिस को तेजी से फैसला लेने की आजादी देगा, जिससे कानून व्यवस्था बनी रहेगी.'

IAS अधिकारी विरोध में

वहीं IAS अधिकारी इस फैसले का विरोध कर रहे हैं. पूर्व IAS अधिकारी जगन्नाथ सिंह ने इंडिया टुडे से कहा,

'ये सिस्टम देश के केवल दक्षिणी हिस्से में काम करेगा, वहां जहां शिक्षा का स्तर ज्यादा है और जहां लोगों को अपने अधिकारों और कानून की जानकारी है. यूपी जैसे राज्य में इसके सफल होने के चांस कम हैं. यहां जनता अपने अधिकारों को लेकर ज्यादा जागरुक भी नहीं है. न ही पुलिस पर भरोसा करती है. पुलिस ने कभी भी जनता का नजरिया बदलने की कोशिश नहीं की. लोग सिविल एडमिनिस्ट्रेटिव अधिकारियों पर विश्वास करते हैं. कोई भी दिक्कत होती है तो वो DM के पास जाते हैं.'

वहीं कुछ IAS अधिकारियों का ये भी कहना है कि कमिश्नर सिस्टम से पुलिस पूरी तरह से निरंकुश हो जाएगी. क्योंकि वैसे भी यूपी पुलिस पर एनकाउंटर्स की वजह से सवाल उठते रहे हैं और कमिश्नर सिस्टम से पुलिस के ऊपर किसी का कंट्रोल नहीं रहेगा.

पहले भी हो चुकी है कमिश्नर सिस्टम लाने की कोशिश

योगी सरकार से पहले भी कुछ सरकारों ने यूपी में कमिश्नर सिस्टम लाने की कोशिश की थी. 1977 में यूपी के तत्कालीन सीएम राम नरेश यादव ने वासुदेव पांजवनी को कानपुर का पहला पुलिस कमिश्नर बनाने की कोशिश की थी. हालांकि वो पद ग्रहण कर पाते, उसके पहले ही उन्हें वापस बुला लिया गया. उसके बाद से ही कई बार पुलिस कमिश्नर की मांग होती रही. IAS अधिकारी इसका विरोध करते रहे. अखिलेश यादव जब मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने भी कमिश्नर सिस्टम लाने की कोशिश की थी. 2018 में DGP सुलखान सिंह ने भी पुलिस कमिश्नर सिस्टम के लिए आवाज़ बुलंद की थी.

नोएडा के SSP सस्पेंड हो गए थे

कुछ दिन पहले ही अश्लील वीडियो के एक मामले में नोएडा के SSP वैभव कृष्णा को सस्पेंड कर दिया गया था. और लखनऊ के SSP का ट्रांसफर कर दिया गया था. इन पदों पर किसी को तुरंत नियुक्त नहीं किया गया था, इसलिए कमिश्नर सिस्टम लागू करने के कायास और भी तेज़ हो गए थे. खैर, अब दोनों ज़िलों में कमिश्नर सिस्टम लागू हो चुका है. ये कामयाब होगा या नहीं ये तो कुछ समय बाद ही पता चलेगा.


वीडियो देखें:

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