जब से एलन मस्क ने ट्विटर को खरीदा है, तभी से न मस्क और न ट्विटर के बारे में कुछ अच्छा सुनने को मिल रहा है. ये स्वाभाविक ही है कि नए मैनेजमेंट के आने पर संस्थान में बदलाव हो. काम करने का तरीका भी बदल जाता है और कई बार काम करने वाले भी. लेकिन ट्विटर में जो हो रहा है, वो इससे आगे की चीज़ है. कभी इस बात पर बहस होती है कि ट्विटर के दफ्तरों में खाने पर कितना खर्च हो रहा था. तो कभी नये फीचर को बिना ये सोचे जोड़ दिया जाता है कि इसका दूरगामी असर क्या होगा. 8 डॉलर में वेरिफिकेशन ऐसा ही एक उदाहरण था.
ट्विटर के कर्मचारियों के लिए एलन मस्क ने कौन से 'कड़े' नियम बना दिए?
ट्विटर पर RIP twitter क्यों ट्रेंड करने लगा?


मसखरों और जालसाज़ों ने अपने हैंडल्स को वेरिफाई करवाकर बड़ी-बड़ी कंपनियों के नाम और लोगो लगा लिए. ये कंपनियों के आधिकारिक ट्विटर हैंडल लगने लगे. फिर इनसे ऐसे ट्वीट किये गए कि निवेशक घबरा गए और कंपनी का स्टॉक गिर गया. दुनियाभर में हथियार सप्लाई करने वाली लॉकहीड मार्टिन तक इसका शिकार बनी. इसके निदान के लिए ''ऑफिशियल'' टैग आया, लेकिन वो भी कुछ दिन में गायब हो गया. फिर लौटा, तो सबके लिए नहीं लौटा. हमने एक समस्या का उदाहरण दिया, जबकि इनकी संख्या दर्जनों में है.
फिर ट्विटर में काम करने वालों के भविष्य का सवाल भी है. मस्क ट्विटर की साढ़े सात हज़ार लोगों की वर्कफोर्स में से आधों को घर भेजना चाहते हैं. इसकी शुरुआत भी हो चुकी है. और इसमें ट्विटर की शुरुआत से लेकर अब तक उसके डेवलपमेंट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लोग भी हैं. फिर जिन्हें फायर नहीं किया जा रहा, वो खुद रिज़ाइन कर रहे हैं क्योंकि वो मस्क के राज में काम करना नहीं चाहते. अब तक ट्विटर एक चौपाल थी जहां लोग बात करते थे, कभी लड़ते झगड़ते भी थे. लेकिन अब खुद ट्विटर का तमाशा बन रहा है और दुनिया इसे ट्विटर पर ही देख रही है. क्योंकि कर्मचारियों के खाने, अटेंडेंस और निजी पसंद नापसंद तक की बहस में मस्क खुद शामिल दिख रहे हैं.
तकनीकी रूप से ये एक निजी कंपनी का मामला है, जिसे एक महत्वाकांक्षी उद्योगपति ने खरीद लिया है. लेकिन ट्विटर ने संवाद और अभिव्यक्ति की दुनिया में जो स्थान हासिल किया है, उसके चलते इस सब में दुनियाभर की दिलचस्पी है. ट्विटर पर वीडियो वायरल कराकर कितने ही आम लोगों ने सरकार और ताकतवर लोगों को आइना दिखा दिया है. और ट्विटर पर चलने वाले नैरेटिव से राजनीति और सरकार प्रभावित होती नज़र भी आती है. इसीलिए ट्विटर में जो कुछ हो रहा है, उसे गौर से देखना और समझना ज़रूरी है. और इस सवाल का जवाब खोजना भी, कि मस्क जो कर रहे हैं, वो बस मैडनेस है, या फिर उसमें कोई मेथड है, जिसे हम फिलहाल समझ नहीं पाए हैं.
अब बात ये कि ट्विटर के कर्मचारी, कंपनी क्यों छोड़ रहे हैं?
दरअसल 16 नवंबर को ट्विटर के नए मालिक एलन मस्क ने अपने कर्मचारियों को एक ईमेल भेजा. इस ईमेल का टाइटल था,
''fork in the road”
यानी रास्ते का कांटा. मस्क ने इस ईमेल के जरिए अपने कर्मचारियों से कहा,
अगर आप ने ये तय कर चुके हैं कि आपको नए ट्विटर का हिस्सा बनना है तो आप कृपया नीचे दिए गए लिंक पर हां क्लिक करें.
मस्क ने अपने कर्मचारियों से कहा कि ट्विटर को अब बेहद सख्त होने की जरूरत है. जिसका मतलब है कि कर्मचारियों के काम के घंटे बढ़ जाएंगे और काम का दबाव भी पहले से ज्यादा होगा. आसान भाषा में कहें तो एलन मस्क ने ट्विटर के कर्मचारियों को साफ कह दिया है कि अगर आपको काम करना है तो हमारा नियम मानना पड़ेगा. अन्यथा आप कंपनी छोड़कर जा सकते हैं. काफी कर्मचारियों ने मस्क द्वारा भेजे गए प्लेज टू वर्क फॉर्म पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया और सेवरेंस पे लेकर नौकरी छोड़ने का फैसला किया. सेवरेंस पे यानी नौकरी छोड़ने पर मिलने वाला पैसा. एलन मस्क ने ट्विटर के कर्मचारियों को ऑर्डर एक्सेप्ट या रिजेक्ट करने के लिए 24 घंटे का समय दिया था.
लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि मस्क का ये फैसला बैकफायर कर सकता है. इंडिया टुडे ने गार्डियन की रिपोर्ट के हवाले से लिखा है कि मस्क को उन कर्मचारियों की संख्या का अनुमान नहीं था जो मेल पर साइन करने से मना कर देंगे और सेवरेंस पे के साथ कंपनी छोड़ देंगे. ऐसी भी खबरें आईं कि मस्क ने कुछ टॉप ऑफिशियल्स से मिलकर उन्हें मनाने की कोशिश भी की. क्योंकि ट्विटर के बहुत सारे कर्मचारी इस्तीफा दे रहे हैं. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्विटर के सैकड़ों कर्मचारियों ने कंपनी छोड़ने का फैसला किया है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें ऐसे कई इंजीनियर्स भी शामिल हैं जो ट्विटर के ठीक से काम न करने या अस्थिर होने पर आने वाली दिक्कतों को ठीक करने का काम करते हैं. यानी कि अब अगर ट्विटर पर कोई समस्या आती है तो कंपनी छोड़ रहे इंजीनियर्स इसे ठीक करने के लिए नहीं होंगे. मस्क के ईमेल के बाद इस्तीफा देने वाले ट्विटर के कर्मचारियों का सही आंकड़ा अब तक नहीं आया है लेकिन यह संख्या सैकड़ों में है. इसमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जो कंपनी में 10 साल से अधिक समय बिता चुके हैं.
एलन मस्क ने इस साल अप्रैल में ट्विटर खरीदने का ऐलान किया था. उन्होंने ट्विटर को 44 अरब डॉलर (लगभग साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये) में खरीदने का ऑफर दिया था. लेकिन तब स्पैम और फेक अकाउंट्स की वजह से उन्होंने उस डील को ही होल्ड पर रख दिया था. इसके बाद 8 जुलाई को मस्क ने डील तोड़ने का फैसला किया. इसके खिलाफ ट्विटर ने कोर्ट का रुख किया था. लेकिन फिर अक्टूबर महीने की शुरुआत में मस्क ने अपना रुख बदला और फिर से डील को पूरी करने के लिए तैयार हो गए. इसी बीच डेलावेयर कोर्ट ने 28 अक्टूबर तक डील पूरी करने का आदेश दिया था.
एलन मस्क ने 28 अक्टूबर को ट्विटर की कमान संभाली थी. मालिक बनने के बाद ही उन्होंने ट्विटर के CEO पराग अग्रवाल के साथ CFO नेड सेगल और लीगल अफेयर-पॉलिसी हेड विजया गाड्डे को कंपनी से टर्मिनेट कर दिया था. मस्क ने ट्विटर के सीईओ पराग अग्रवाल और CFO नेड सेगल पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी खातों की संख्या को लेकर उन्हें और ट्विटर निवेशकों को गुमराह करने का आरोप लगाया था. ट्विटर से कर्मचारियों की छंटनी पर एलन मस्क ने ट्वीट कर कहा था कि जब कंपनी हर दिन 40 लाख डॉलर यानी लगभग 32 करोड़ 77 लाख से ज्यादा रुपये का नुकसान झेल रही हो तो कोई और विकल्प नहीं है. मस्क ने कंपनी से कर्मचारियों की छुट्टी को छंटनी न लिखकर 'ट्विटर के वर्कफोर्स में कमी' लिखा था.
मस्क यही नहीं रुके. उन्होंने करीब 3500 कर्मचारियों, जिसमें पूरा बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और कंपनी के टॉप एग्जीक्यूटिव्स को कंपनी से निकाल दिया था. ताकि कंपनी को वो खुद लीड कर सकें. बाद में पैसा बचाने के नाम पर उन्होंने कुछ इंजीनियर्स को भी निकाल दिया था. मस्क के टेकओवर से पहले ट्विटर में करीब 7500 कर्मचारी थे. लेकिन बड़े पैमाने पर छंटनी की वजह से इसमें 50 फीसदी तक की कमी आ गई थी. अब कर्मचारियों के इस्तीफे के बाद इसमें 88 फीसद तक कमी आने की उम्मीद है.
मस्क अब तक ये कहते आ रहे थे कि वे उन्हीं लोगों को निकाल रहे हैं जो कंपनी के लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं और जिनकी प्लेटफॉर्म चलाने के लिए आवश्यकता नहीं है लेकिन अब 'बेहद सख्त वर्क डिमांड' के बाद ऐसा नहीं लगता है. फिलहाल ट्विटर ने अपने सभी ऑफिसेज को बंद कर दिया है. और 21 नवंबर तक के लिए एक्सेस बैज भी निष्क्रिय कर दिया गया है.
छंटनी के अलावा एलन मस्क लगातार 'पैसा दो ब्ल्यू टिक लो' की पॉलिसी पर भी काम कर रहे थे. 8 डॉलर में सभी को ब्लू टिक वाली पॉलिसी को खुद मस्क ने ट्वीट कर बताया. कई बड़े नामों ने इसका विरोध किया और कइयों ने सपोर्ट. ट्विटर ने इसका ट्रायल भी चालू कर दिया. सबसे पहले अमेरिका में अकाउंट्स को 8 डॉलर में वेरीफाई किया जाने लगा. जिसके बाद इस पॉलिसी के साइड इफेक्ट आने शुरू हो गए. फेक यूजर्स ने पैसे देकर अकाउंट वेरिफाई करवाना शुरू कर दिया. कई बड़े नाम, जिनमें पेप्सिको से लेकर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तक शामिल हैं, के नाम से फर्जी अकाउंट वेरीफाई करा लिए गए. खुद मस्क की अपनी कंपनी टेस्ला और स्पेसएक्स भी नहीं बच पाईं. इनके नाम से भी फर्जी अकाउंट वेरिफाई हो गए. लेकिन इसने अमेरिका की एक दवा कंपनी को ऐसा नुकसान पहुंचाया कि ये पॉलिसी रोकनी पड़ गई.
दरअसल किसी ने अमेरिका में इंसुलिन बनाने वाली बड़ी फार्मा कंपनी Eli Lilly and Company के नाम से एक पैरोडी (सेम नाम से नकल किया हुआ) अकाउंट बनाया. उसे 8 डॉलर देकर ट्विटर से वेरीफाई कराया. फिर एक ट्वीट किया,
'हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि अब इंसुलिन फ्री है.'
ट्वीट 10 नवंबर को किया गया. 11 नवंबर की शाम तक इसका असर भी दिख गया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी के शेयर में गुरूवार की अपेक्षा 4.37 फीसदी की गिरावट आई. इसे रूपये में समझें तो 1 लाख 20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान. इस नुकसान को सीधे-सीधे उसी ट्वीट से जोड़कर देखा गया. इस बीच असली Eli Lilly and Company ने सफाई दी. अपने असली वाले ट्विटर हैंडल से Eli Lilly ने लिखा,
‘हम उन लोगों से माफी मांगते हैं जिन्हें नकली लिली अकाउंट से गलत संदेश दिया गया है. हमारा आधिकारिक ट्विटर अकाउंट @LillyPad है.’
रायता फैलता देख मस्क या कहें कि ट्विटर ने इसे समेटने की कोशिश की और पेड ब्लू टिक की सुविधा फिलहाल के लिए सस्पेंड कर दी. ट्विटर ने कुछ ऑफिस वालों और बड़ी हस्तियों के अकाउंट पर एक ब्लू टिक के साथ ऑफिशियल वाला टैग भी लगाया जिससे लोगों को भ्रम न हो. फिलहाल ये सुविधा बंद कर दी गई है. एलन मस्क ने जब ट्विटर खरीदा तभी से कंपनी के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर चिंता जताई जाने लगी थीं. ट्विटर खरीदने के बाद मस्क ने कहा था कि उन्होंने और बेहतर तरीके से मानवता की सेवा करने के लिए और इसे बेहतर जगह बनाने के लिए ट्विटर खरीदा है.
लेकिन फिलहाल ऐसा कुछ होता दिख नहीं रहा है. जैसा उन्होंने वादा किया था. ट्विटर पर एक हैशटैग ट्रेंड कर रहा है, जिसमें #RIPTwitter लिखा हुआ है. #RIPTwitter का इस्तेमाल करके अलग-अलग तरह से लोगों की प्रतिक्रिया सामने आ रही है. इसमें ट्विटर के कई कर्मचारियों ने अपनी परेशानियों को बताया है और उसका भी जिक्र किया है कि यह नौकरी उनके लिए कितनी जरूरी है.
वीडियो: कर्मचारियों के लिए एलन मस्क ने कौन से ‘कड़े’ नियम बना दिए?











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