आज तारीख है 27 फरवरी, 2026. दोपहर सुबह जब मुंबई के समंदर पर सूरज डूबने का मन बना रहा होगा. ठीक उसी वक्त छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का विमान टचडाउन की तैयारी कर रहा होगा.
ट्रूडो की 'मिर्ची' vs कार्नी का 'शहद': क्या खत्म होगी भारत-कनाडा की 900 दिनों वाली कट्टी?
Mark Carney India visit: 900 दिनों की तल्खी के बाद आज 27 फरवरी को कनाडा के नए पीएम मार्क कार्नी मुंबई पहुंचे हैं. यह आर्टिकल जस्टिन ट्रूडो के दौर में बिगड़े रिश्तों, G20 की वो 'कोल्ड वॉर', निज्जर विवाद और अब कार्नी के 'बिजनेस रिसेट' की पूरी कहानी को डिकोड करता है. क्या एक पूर्व बैंकर भारत के साथ टूटी कूटनीतिक डोर को फिर से जोड़ पाएगा?
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पिछले 900 दिनों से भारत और कनाडा के रिश्तों में जो 'कोल्ड वॉर' चल रही थी, क्या आज उस पर 'द एंड' का बोर्ड लग जाएगा? जस्टिन ट्रूडो के दौर में रिश्तों में जो कड़वाहट आई थी, क्या एक पूर्व बैंकर उसे निवेश के शहद से मीठा कर पाएगा? आज के इस एक्सप्लेनर में हम रिश्तों के बिगड़ने से लेकर, कार्नी के सुधरने तक का पूरा कच्चा-चिट्ठा खंगालेंगे.
मुंबई ही क्यों?कार्नी ने अपनी यात्रा दिल्ली के बजाय मुंबई से शुरू की है. ‘ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन’ (Observer Research Foundation) की रिपोर्ट "भारत-कनाडा संबंध: मार्क कार्नी के साथ एक नया अध्याय" (India-Canada Relations: A New Chapter with Mark Carney) के मुताबिक संदेश साफ है-पहले 'धंधा', फिर 'डिप्लोमेसी'. कनाडा के पेंशन फंड्स का अरबों रुपया भारतीय कंपनियों में लगा है. कार्नी का यह दौरा असल में एक 'बिजनेस रिसेट' की तरह देखा जा रहा है.
लेकिन इस नई शुरुआत को समझने के लिए हमें उस 'जख्म' को कुरेदना होगा, जो साल 2023 में दिल्ली की सड़कों से शुरू हुआ था.

बात सितंबर 2023 की है. दिल्ली G20 समिट के लिए सजी थी. दुनिया भर के नेता आए थे, जिनमें कनाडा के तत्कालिन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो भी शामिल थे. लेकिन वहां जो हुआ, उसने सबको हैरान कर दिया.
मोदी-ट्रूडो की वो ठंडी मुलाकात: जब पीएम मोदी और ट्रूडो मिले, तो उनके चेहरों की तल्खी साफ दिख रही थी. मोदी जी ने दो टूक कह दिया था कि कनाडा की जमीन पर पल रहे अलगाववादी तत्व भारत की सुरक्षा के लिए खतरा हैं.
हवाई जहाज का 'धोखा': समिट खत्म हुई, सब विदा हुए, लेकिन ट्रूडो का विमान तकनीकी खराबी के चलते दिल्ली में ही फंस गया. वो दो दिन तक दिल्ली के होटल में रहे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उस दौरान भारत सरकार के साथ उनकी कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई. कहा जाता है कि रिश्तों की जो कड़वाहट उस वक्त दिल्ली की हवा में थी, उसने आग में घी का काम किया.
दिल्ली से लौटते ही ट्रूडो ने जो किया, उसने कूटनीति की दुनिया में 'परमाणु बम' फोड़ने जैसा काम किया.
कूटनीति का 'कुरुक्षेत्र': निज्जर कांड और 41 राजनयिकों की विदाई18 सितंबर 2023 को ट्रूडो ने अपनी संसद में खड़े होकर आरोप लगाया कि कनाडाई नागरिक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार के एजेंट शामिल हो सकते हैं. भारत ने इसे 'बकवास' करार दिया. इसके बाद जो हुआ, उसने दशकों की दोस्ती को हाशिये पर धकेल दिया.
ट्रूडो के बयान की गूंज दोनों देशों में लंबे समय तक सुनाई देती रही. एक नजर डालते हैं कि इस दौरान भारत-कनाडा के बीच क्या-क्या ऐसा हुआ, जो शायद नहीं होना चाहिए था.
वीजा पर 'ताला': भारत ने कनाडाई नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं बंद कर दीं. लाखों छात्र और परिवार अधर में लटक गए.
41 राजनयिकों की विदाई: अक्टूबर 2023 में भारत ने कनाडा से कहा कि अपने 41 डिप्लोमेट्स वापस बुलाओ, वरना हम उनकी छूट (Immunity) खत्म कर देंगे. कनाडा को झुकना पड़ा और उसके राजनयिकों को बोरिया-बिस्तर समेटना पड़ा.
लेकिन क्या कार्नी इन पुराने मलबों पर दोस्ती की नई इमारत खड़ा कर पाएंगे?
तुलना का चश्मा: ट्रूडो बनाम कार्नी
| मुद्दा | जस्टिन ट्रूडो (पुरानी कड़वाहट) | मार्क कार्नी (नई उम्मीद) |
| बैकग्राउंड | विरासत की राजनीति, लिबरल चेहरा | अर्थशास्त्री, पूर्व बैंक गवर्नर |
| भारत पर रुख | आक्रामक और सार्वजनिक आरोप | व्यावहारिक और निवेश-केंद्रित |
| प्राथमिकता | घरेलू वोट बैंक (खालिस्तानी तत्व) | आर्थिक विकास और व्यापार (CEPA) |
| बातचीत का तरीका | सोशल मीडिया बाइट्स | परदे के पीछे की 'Quiet Diplomacy' |
कार्नी का यही 'बैंकर माइंडसेट' भारत के लिए सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है.
पेंशन फंड और निवेश: असली गेमचेंजरकनाडा का सरकारी पेंशन प्लान (CPPIB) भारत में अरबों डॉलर निवेश कर चुका है. फाइंनैशियल पोस्ट (Financial Post) की रिपोर्ट “भारत में कनाडा की पेंशन कंपनी की दिग्गज कंपनी: रणनीतिक बदलाव” (Canada’s Pension Giant in India: Strategic Shift) के मुताबिक रिलायंस से लेकर कोटक महिंद्रा बैंक तक, कनाडाई पैसा हर जगह है.
ट्रूडो के दौर में ये निवेश खतरे में था. मगर कार्नी जानते हैं कि अगर भारत के साथ व्यापारिक समझौता (CEPA) जो सालों से लटका है, वो पूरा हो जाए, तो कनाडा की खस्ताहाल इकोनॉमी को नई जान मिल सकती है.
मुंबई में कार्नी की मुलाकात भारत के टॉप बिजनेस टाइकून्स से होनी है. वो यह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि कनाडा अब सिर्फ 'मुद्दों' का देश नहीं, बल्कि 'मौकों' का देश है.
लेकिन निवेश तभी बढ़ेगा जब 'सड़क' साफ होगी. यानी खालिस्तानी मुद्दे पर कार्नी क्या करेंगे?
छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए क्या बदला?कनाडा जाने वाले लाखों भारतीय छात्र ट्रूडो के दौर में डरे हुए थे. वीजा मिलने में महीनों लग रहे थे. ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के मुताबिक कार्नी सरकार ने अब वीजा नियमों को सरल बनाने और फर्जी कॉलेजों पर नकेल कसने का वादा किया है.
अगर कार्नी की मुंबई यात्रा सफल रहती है, तो आने वाले महीनों में वीजा प्रक्रिया और भी तेज हो सकती है और कूटनीतिक स्टाफ की संख्या फिर से सामान्य हो सकती है.
लेकिन क्या कार्नी के लिए घर की राह इतनी आसान है?
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दोस्ती की नई शुरुआत?तो, लब्बोलुआब ये है कि मार्क कार्नी की मुंबई लैंडिंग केवल एक प्रधानमंत्री की यात्रा नहीं है. बल्कि यह एक 'इकोनॉमिक और डिप्लोमैटिक रिसेट' है. ट्रूडो ने जो दीवारें खड़ी की थीं, कार्नी उन्हें गिराने के लिए हथौड़ा लेकर आए हैं.
भारत ने भी अपना रुख लचीला किया है क्योंकि हमें भी निवेश और तकनीक की जरूरत है. अब मुंबई की चमचमाती शाम ये तय करेंगी कि भारत और कनाडा के बीच की 'बर्फ' पिघलेगी या नहीं.
उम्मीद तो यही है कि इस बार 'कट्टी' हमेशा के लिए खत्म होकर 'अब्बी' में बदल जाएगी. तो नजरें जमाए रखिये, क्योंकि कूटनीति के इस मैच में अब 'बैंकर' कार्नी क्रीज पर हैं!
वीडियो: कनाडा में 180 करोड़ रुपये की लूट में भारत का नाम क्यों आया?











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