एक मुहावरा है. आसमान से गिरे, खजूर में अटके. आसान भाषा में कहें तो एक मुसीबत से निकलकर दूसरी मुसीबत में फंस जाना. आज हम जो कहानी सुनाने वाले हैं, वो इस पर फिट बैठती है. रूस का वैगनर ग्रुप यूक्रेन की जंग में शामिल है, ये बात अब जगज़ाहिर हो चुकी है. वैगनर ग्रुप जेल में बंद अपराधियों को यूक्रेन में लड़ने भेज रहा है. यूक्रेन में लड़ रहे ऐसे ही 2 फाइटर्स का CNN ने इंटरव्यू किया है. इंटरव्यू में फाइटर्स ने दिल दहलाने वाले अनुभव शेयर किए हैं. ग्रुप को चलाने वाले येवगेनी प्रिगोझिन ने खुले तौर पर ये स्वीकार किया है. प्रिगोझिन को पुतिन का निजी खानसामा भी कहा जाता है.
पुतिन के लड़ाकों ने बड़ा खुलासा कर दिया!
वैगनर ग्रुप के लड़ाकों ने CNN के इंटरव्यू में कई खुलासे किए!


अमेरिकी न्यूज़ चैनल CNN ने यूक्रेन की जेल में बंद दो लड़ाकों से बात की है. दोनों ही जंग में शामिल होने से पहले रूस की जेल में बंद थे. एक हत्या के आरोप में सज़ा काट रहा था. दोनों ने वैगनर ग्रुप के बारे में दिल दहलाने वाले अनुभव शेयर किए हैं. क्या बताया है? ये आगे बताएंगे. पहले जानिए कि कैसे ये लोग यूक्रेन की जंग तक पहुंचे? एक ने बताया कि पिछले साल अगस्त और सितंबर में प्रिगोझिन हैलीकॉप्टर से उनकी जेलों में आए. उन्होंने कैदियों को प्रलोभन दिया. कहा कि अगर यूक्रेन में लड़ोगे तो जेल से आज़ादी मिल जाएगी. भले ही कोई भी अपराध हो, सज़ा कितनी भी लंबी हो, सब माफ़ कर दिया जाएगा. प्रिगोझिन ने ये भी कहा कि मेरे लिए आदर्श उम्मीदवार हत्यारे, लुटेरे हैं.
रिक्रूटमेंट की प्रक्रिया बहुत आसान थी. इंटरव्यू देने वाले एक फाइटर ने कहा,
‘मुझे हत्या के मामले में 10 साल की सज़ा जेल में काटनी थी. मुझे वो ऑफर अच्छा लगा. ये 10-11 साल जेल में बिताने से बेहतर था. मैं एक नई जिंदगी की शुरुआत करना चाहता था. लेकिन अब मुझे अपने फैसले पर मलाल होता है.’
कैदियों से ये भी कहा गया था कि यूक्रेन में लड़ने के बदले उनका आपराधिक इतिहास मिटा दिया जाएगा, उन्हें अच्छा पैसा मिलेगा, और सारे कर्ज़े चुका दिए जाएंगे. बस 6 महीने लड़ना है. फिर आज़ाद जिंदगी. इसी लालच के चलते जेलों में बंद 40 से 50 हज़ार कैदी लड़ने चले गए. उन्हीं अपराधियों में ये दोनों भी शामिल थे. दोनों को हवाई जहाज़ से ट्रेनिंग के लिए रूस के रोस्तोव ले जाया गया. ट्रेनिंग के दौरान शराब और ड्रग्स प्रतिबंधित थे. ट्रेनिंग देने वाले कई कमांडों ऐसे भी थे जो अफ्रीका और सीरिया में वैगनर ग्रुप की तरफ से लड़ चुके थे. अब तक इन कैदियों को ये नहीं बताया गया था कि उन्हें सीधे यूक्रेन की सेना से भिड़ना है. बात कुछ अधूरी बताई गई थी. ट्रेनिंग के नाम पर महज़ बंदूक़ चलाना सिखाया गया. और फिर सीधे जंग के मैदान में उतार दिया गया. जंग के मैदान में उतरने के बाद उन्हें असलियत का पता चला. इंटरव्यू के दौरान फाइटर ने बताया कि एक दफे हम ऐसी जगह लड़ने पहुंचे जहां बारूदी सुरंगे मौजूद थीं. हमारे साथ 10 लोग थे. 7 लोग उस सुरंग की चपेट में आ गए. जिससे फ़ौरन उनकी मौत हो गई.
एक लड़ाई के दौरान हमारे साथ 90 लोग थे. हमले में 60 लोग एक साथ मारे गए. जैसे ही एक टुकड़ी खत्म होती वो दौरान दूसरी टुकड़ी भेज देते. जब दूसरी टुकड़ी हमले में मारी जाती तो वो अगली टुकड़ी भेजते. बिना जान की फ़िक्र किए. बिना कुछ सोचे-समझे. हमले के दौरान आपका कोई साथी घायल भी हो जाता है तो आप रुक नहीं सकते. अगर रुके तो आप भी गोली-बारी के ज़द में आ जाएंगे. वहां परिस्थिति बहुत नाजुक होती है. बगल में आपके साथी मर रहे होते हैं, वे पानी की भीख मांगते हैं. लेकिन उनके लिए रुकना अपनी जान गंवाने जैसा है. आपको लगातार आगे बढ़ते रहना है. अगर आप पीछे हटे तो भी बख्शे नहीं जाएंगे. कैंप में जाने के बाद आपको लड़ाई में पीछे हटने के जुर्म में मार दिया जाएगा.
इंटरव्यू के दौरान एक फाइटर ने इस तरह का दिल दहलाने वाला खुलासा भी किया, उसने कहा,
‘लड़ाई के दौरान एक फाइटर एक पोजीशन पर रुका हुआ था. हमें आगे चलने के आदेश मिले. लेकिन वो आदमी एक पेड़ के नीचे छिप गया और जाने से मना कर दिया. वो बहुत डरा हुआ था. वो उसका पहला मिशन था. जब ये बात कमांड को बताई गई तो उसे बेस से 50 मीटर दूर ले जाकर गोली मार दी गई.’
सैनिकों के पास एक बार मैदान में आने के बाद वापस जाने का कोई विकल्प नहीं होता है. उनकी स्थिति एक तरफ कुएं तो दूसरी तरफ खाई वाली होती है. बड़े हमलों के बाद एक साथ हताहत लाए जाते हैं. उनमें कई लाशें भी होती हैं जिन्हें ट्रकों में लोड करने की ज़िम्मेदारी फाइटर्स की होती है. लेकिन लोडिंग के दौरान ये नहीं देखा जाता कि कौन घायल है या कौन मरा हुआ. सभी को जल्दी-जल्दी लोड किया जाता है.
फाइटर्स ने बताया,
ऐसे हालत में जीना बहुत मुश्किल होता है. अगर आपको जिंदा रहना है तो आपको जीने की दृढ़ इच्छा चाहिए. चाहे उसकी कीमत जो भी हो.
कैदी से फाइटर्स बने ये दोनों लोग पिछले साल से यूक्रेन की सेना की गिरफ्त में हैं. CNN ने इस इंटरव्यू के लिए यूक्रेन के सैनिकों से इजाज़त मांगी थी. जिस कमरे में ये इंटरव्यू शूट हो रहा था वहां सैनिक भी मौजूद थे. पत्रकारों ने सैनिकों से कहा था कि आप जब भी चाहें इंटरव्यू बीच में रोक सकते हैं. लेकिन ये इंटरव्यू मुकम्मल हुआ. इन फाइटर्स ने अपने दिल दहलाने वाले अनुभव विस्तार से बताए. पूरे देढ़ घंटे तक.
दोनों फाइटर्स वैगनर ग्रुप में शामिल होने के अपने फैसले पर मलाल करते हैं. उनके जैसे न जाने कितने फाइटर्स होंगे जिन्हें अधूरी जानकारी देकर इस जंग में झोंक दिया गया है. लेकिन अब वो जंग में मर रहे हैं. इसने रूस के ख़िलाफ़ लग रहे आरोपों को भी मजबूत किया है. पुतिन को इससे कितना फ़र्क़ पड़ेगा, दावे से नहीं कहा जा सकता. हालांकि, इसने युद्ध की एक और वीभीषिका से रूबरू ज़रूर करा दिया है.
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