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अमेरिका ने ईरान को दी बड़ी मात, सीक्रेट रूट से कर रहा तेल सप्लाई, होर्मुज में क्या हो रहा?

US open secret corridor in Hormuz: एक अमेरिकी अधिकारी का दावा है कि कि पिछले दो हफ्ते से हर रात 15-20 टैंकर होर्मुज के नए रूट से गुज़र रहे हैं. अमेरिका इसे 'सीक्रेट कॉरिडोर' बता रहा है. लेकिन सवाल ये है कि होर्मुज पर किसका राज है ईरान का या अमेरिका?

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स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज में ओमान से जहाजों का ड्रोन विजुअल. (फोटो-रॉयटर्स)

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  • अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक नया दक्षिण चैनल रूट विकसित किया है, जिसके माध्यम से हर रात 15-20 टैंकर अमेरिकी नेवी की सुरक्षा में गुजरते हैं और लगभग 10 मिलियन बैरल तेल निर्यात होता है।
  • ईरान और अमेरिका के बीच क्षेत्रीय नियंत्रण को लेकर विवाद है; ईरान का दावा है कि होर्मुज इलाका उसका है और उसने जहाजों को तय रूट का पालन करने की धमकी दी है, जबकि अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई है।
  • अमेरिका द्वारा ईरानी रडार और सर्विलांस सिस्टम को निशाना बनाने के बाद ईरान की निगरानी कमजोर हुई है, जिससे अमेरिकी नई तेल निर्यात रूट का प्रयोग संभव हुआ और क्षेत्रीय तनाव जारी रहने की संभावना है।

स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज की चाबी किसके पास है? इसका जवाब फिलहाल कोई निश्चित तौर पर नहीं दे सकता. ईरान कह रहा है कि इलाका उसका है तो उसकी ही मनमर्जी चलेगी. मगर अमेरिका भी बार-बार अपनी दावेदारी पेश कर रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पूरी तरह उनकी कंट्रोल में है. ऐसे में होर्मुज में रूट को लेकर कंफ्यूशन भी बना हुआ है. ईरान और ओमान के बीच भी नए रूट को लेकर बतचीत चल रही है. और अब एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ने भी होर्मुज में एक नया रूट ईजाद कर लिया है. 

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अब यहां तीन सवाल निकलते हैं. ये रूट क्या है और तेल कैसे ट्रांसपोर्ट हो रहा था? दूसरा, ईरान की कड़ी निगरानी के बाद भी अमेरिका कामयाब कैसे रहा? तीसरा, होर्मुज पर अब किसका कंट्रोल है? एक-एक करके तीनों सवाल के जवाब समझते हैं. 

अमेरिका का ‘सीक्रेट कॉरिडोर’

शुरुआत हुई एक स्टेटमेंट से. अमेरिकी अधिकारियों ने बयान दिया कि पिछले दो हफ़्तों में 15-20 टैंकर हर रात होर्मुज के दक्षिण चैनल से गुज़रे. इससे एक्सपोर्ट में मदद मिली. इस बयान के पीछे की कहानी बताते हुए एक्सिओस ने एक रिपोर्ट छापी. 

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दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि अमेरिका पिछले दो महीने से होर्मुज में एक नए रूट की तलाश में था. ऑपरेशन के दौरान ओमान कोस्ट से लगे दक्षिण चैनल के ज़रिए हर रात 15-20 टैंकर अमेरिकी नेवी की सुरक्षा में गुज़रे. इस दौरान 10 मिलियन बैरल तेल प्रति दिन होर्मुज से बाहर निकाले गए. ईरान जंग से पहले हर दिन लगभग 20 मिलियन बैरेल तेल गुज़रता था.  

कैसे हो रहा था तेल ट्रांसपोर्ट? अमेरिकी नेवी की सुरक्षा में हर दिन खाली टैंकर अरब सागर से खाड़ी की तरफ भेजे जाते. वहां तेल एक्सपोर्ट करने वाले देशों से तेल भरकर दक्षिण चैनल के ज़रिए बाहर निकलते. अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि वो पिछले दो महीने से ऐसा कर रहे हैं. अमेरिकी टास्क फोर्स गल्फ पार्टनर के साथ मिलकर काम कर रही थी. हर दिन जितने खाली जहाज अंदर आते और जितने बाहर जाते उनकी लिस्ट तैयार की जाती. इनके आने और जाने की समय सीमा भी तय की गई है. अमेरिकी एयर फोर्स फाइटर जेट्स के ज़रिए ईरानी मिसाइल और ड्रोन को काबू में रख रहे थे.      

ईरान की निगरानी कमज़ोर पड़ गई?

अब बात ईरान की. ईरान कह रहा है कि होर्मुज में उसका कंट्रोल है और उसका ही रहेगा. उसने जहाजों को धमकी दी कि जो जहाज उसके तय रूट से नहीं गुज़रेंगे उनपर बमबारी होगी. ऐसा कई दफा हुआ भी. बावजूद इसके कई जहाजों ने ईरान की बात न मानकर ओमानी रूट का रुख किया. केप्लर की डेटा के मुताबिक, बीते दो हफ़्तों में होर्मुज में लगभग 80 फीसदी जहाजों ने ओमानी रूट का रुख किया, जिससे ईरान के तय रूट पर ट्रैफिक कम हो गया. अमेरिकी नेवी ने इन जहाजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाई थी.

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लेकिन अमेरिका नया रूट ईजाद करने में कैसे कामयाब रहा? रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारी का कहना है कि अमेरिका ने लगातार दो हफ्ते ईरान पर बमबारी की थी उसमें ईरान के रडार और सर्विलांस सिस्टम को निशाना बनाया गया था. इसकी वजह से दक्षिण चैनल में उसकी निगरानी कमज़ोर पड़ गई. IRGC के फ़ास्ट बोट में कुछ स्पॉटर्स और कुछ रडार एक्टिव हैं, लेकिन वो पूरे स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर नज़र नहीं रख पा रहे. इसलिए वो ज्यादातर उस दिशा में मिसाइल बरसा रहे हैं जहां आम दिनों में ट्रैफिक ज्यादा होता है. इसी लूपहोल का फायदा अमेरिका को मिला है. 

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होर्मुज में फंसे जहाजों का क्या?  

अब आते हैं तीसरे सवाल पर. एक तरफ होर्मुज में अमेरिका का नया कॉरिडोर दूसरी तरफ ईरान-अमेरिका की असफल बातचीत. ईरान और अमेरिका के बीच साइन हुए मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग की डेडलाइन ख़त्म हो गई है. और इसी के साथ डॉनल्ड ट्रंप ने नयी धमकी भी दे दी है. उन्होंने साफ़ कहा है कि जो देश ईरान की मदद करेगा उसे खुद आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने ईरान के खिलाफ ‘इकोनॉमिक ऑपरेशन’ चलाने की बात कही है.

अमेरिका होर्मुज में ट्रैफिक मोड़ने का दावा कर रहा है. लेकिन ये नहीं कहा जा सकता कि होर्मुज का पूरा कंट्रोल अमेरिका के पास है और ना ही ईरान के पास है. ऐसे में एक और सवाल निकलकर आता है कि होर्मुज में फंसे जहाजों का माई-बाप कौन है? अमेरिका, जो दूर बैठा दावे कर रहा कि उसने जहाजों के ट्रैफिक को मोड़ दिया है.  ईरान अपनी धमकी पर कायम है कि होर्मुज तब तक बंद रहेगा जब तक अमेरिका अपने वादे पूरे नहीं करता.

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