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अमेरिका ने मिसाइल मार गुब्बारा गिराया, चीन क्यों भड़का?

गुब्बारे पर हमले से चीन क्यों भड़का?

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गुब्बारे पर हमले से चीन क्यों भड़का?

एक गुब्बारा क्या कुछ कर सकता है? बर्थडे गिफ़्ट बन सकता है. बच्चों को खुश कर सकता है. अगर कुछ ज़्यादा बड़ा हुआ तो, आसमान में उड़ सकता है. गैस भर दी जाए तो, लोगों को अपने अंदर बिठाकर घुमा सकता है. यंत्र लगा दिया जाए तो मौसम की जानकारियां इकट्ठा कर सकता है. कैमरा लगा दिया जाए तो वो जासूसी कर सकता है आदि-इत्यादि.

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अगर हम ये बताएं कि, एक गुब्बारे ने दो महाशक्तियों के बीच झगड़ा लगा दिया है तो थोड़ी हैरानी होगी. इस तथ्य पर एक बार में भरोसा करना मुश्किल है. आपको लगेगा कि क्या बकवास बात है? गुब्बारे की वजह से दो देश लड़ कैसे सकते हैं? हमें भी कुछ-कुछ ऐसा ही लग रहा था. लेकिन ये आज के दिन का सच है कि, एक गुब्बारे के चलते अमेरिका और चीन एक-दूसरे को आंखें दिखा रहे हैं. हुआ ये कि एक फ़रवरी को अमेरिका के मोन्टाना स्टेट के आसमान में सफेद रंग का गुब्बारा दिखा. गुब्बारा एक एयरफ़ोर्स बेस के ऊपर उड़ रहा था. नीचे न्युक्लियर मिसाइल के गोदाम थे.

आशंका जताई गई कि ये जासूसी करने आया है. ख़बर मिलते ही सरकार हरकत में आ गई. सेना को तैयार रहने के लिए कहा गया. फ़ाइटर जेट्स तैनात किए गए. फिर राष्ट्रपति बाइडन की एंट्री हुई. अंतिम आदेश उन्हीं का आने वाला था. उन्होंने गुब्बारे पर मिसाइल दागने से मना कर दिया. दरअसल, उन्हें ये बताया गया था कि गुब्बारे का मलबा सिविलियन आबादी को नुकसान पहुंचा सकता है. फिर इंतज़ार शुरू हुआ. इन सबके बीच आरोप लगे कि गुब्बारा चीन ने भेजा है. चीन ने माना कि ये गुब्बारा उन्हीं का है. कहना ये कि इसे मौसम की जांच के लिए उड़ाया गया था. मगर तेज़ हवा के चलते ये अपना रूट भूल गया.

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अमेरिका के आसमान में उड़ता गुब्बारा 

फिर 04 फ़रवरी की तारीख़ आई. अब तक गुब्बारा समंदर के ऊपर पहुंच चुका था. तब बाइडन ने ऑपरेशन को हरी झंडी दिखा दी. इसके बाद F-22 फ़ाइटर जेट्स उड़ाए गए. और, एक ही बार में निशाना साध लिया गया. गुब्बारा फटकर समंदर में गिर गया. होने को तो कहानी यहीं पर खत्म हो सकती थी. लेकिन ऐसा हुआ नहीं.
इसके बाद दो बड़ी बातें हुईं.

- पहली, अमेरिका के विदेशमंत्री एंटनी ब्लिंकन ने चीन का दौरा रद्द कर दिया था. वो 05 और 06 फ़रवरी को चीन में होने वाले थे.. उन्हें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मिलना था. ब्लिंकन, बाइडन के कार्यकाल में चीन जाने वाले पहले कैबिनेट मिनिस्टर होते.

- दूसरी चीज ये हुई कि फ़ाइटर जेट्स के इस्तेमाल से चीन गुस्सा हो गया. उसने कहा कि ये बस एक सिविलियन एयरशिप थी. जो रास्ता भटक कर अमेरिका पहुंच गई थी. अमेरिका ज़रूरत से ज़्यादा रिएक्ट कर रहा है. इसका जवाब दिया जाएगा.

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ये साफ नहीं है कि, चीन किस तरह अमेरिका को जवाब देगा? लेकिन जानकारों का मानना है कि अमेरिका को फ़ाइटर जेट्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था. चीन ने इसे एक संकेत की तरह लिया है. अमेरिका भी वही चाहता है. मगर ये दोनों देशों के बीच तनाव को कई गुणा बढ़ा देगा.

हमने 03 फ़रवरी के दुनियादारी में अमेरिका के आसमान में उड़ रहे गुब्बारे की कहानी बताई थी. उस समय तक कई चीजें साफ नहीं हुई थीं. मसलन, गुब्बारा आया कहां से और इसके पीछे मकसद क्या था? अमेरिकी सूत्र चुपके से चीन का नाम ले रहे थे. चीन ने जांच कराने का दावा ज़रूर किया था. लेकिन उनके बयान में टालमटोल नज़र आ रहा था. दूसरी तरफ़, अमेरिका की सरकार गुब्बारे को गिराने को लेकर आश्वस्त नहीं थी. उन्हें डर था कि मलबा नीचे रह रही आबादी को नुकसान पहुंचा सकता है. 

अब ये जान लेते हैं कि, गुब्बारे पर मिसाइल दागे जाने के बाद क्या रिएक्शन आए? अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने फ़ाइटर जेट्स के पायलटों को बधाई दी. अमेरिका के रक्षामंत्री लॉयड ऑस्टिन बोले, ‘चीनी सेना अमेरिका के अहम सैन्य अड्डों पर नज़र रखने के लिए गुब्बारे का इस्तेमाल कर रही थी. चीन की पीपुल्स रिपब्लिकन आर्मी (PRC) ने अमेरिका की संप्रभुता का उल्लंघन किया है. हमने सीमाओं में रहकर और वैध तरीके से जवाब दिया है.

चीन ने क्या कहा?

चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता तेन कफ़ेई बोले,

‘अमेरिका ने सिविलियन एयरशिप को गिराने के लिए ताक़त का इस्तेमाल किया. ये ओवर-रिएक्शन था. हम अमेरिका की इस हरकत की निंदा करते हैं. अगर हमारे सामने ऐसी कोई स्थिति पैदा हुई तो हम भी इसी तरह जवाब देने के लिए तैयार रहेंगे.’

अब सवाल ये उठता है कि, एक गुब्बारे पर इतना बवाल क्यों?

इसकी चार बड़ी वजहें हैं.

- नंबर एक. गुब्बारे का रूट. गुब्बारा पहले अलास्का में दिखा, फिर कनाडा पहुंचा, उसके बाद ये दोबारा अमेरिका की हवाई सीमा में उड़ता रहा. जानकारों का कहना है कि, मौसम की टोह लेने वाले गुब्बारे इतने समय तक आसमान में बने नहीं रहते. वे दो से तीन दिनों के भीतर अपनेआप नष्ट हो जाते हैं. लेकिन चीनी गुब्बारा पूरे एक हफ़्ते तक अमेरिका के एयरस्पेस में दिखता रहा. इसे उससे कई दिन पहले हवा में छोड़ा गया होगा. आरोप ये भी हैं कि इस गुब्बारे को नीचे से कंट्रोल किया जा रहा था. चीन इससे इनकार करता है. उसका कहना है कि बेकार का हंगामा खड़ा किया जा रहा है. लेकिन गुब्बारे की उम्र और उसका रूट संदेह के लिए मजबूर करता है.

- नंबर दो. गुब्बारे में लगी मशीनें. अमेरिकी न्यूज़ चैनल CNN की एक रिपोर्ट के अनुसार, गुब्बारे में सर्विलांस वाले यंत्र लगे हुए थे. इस तरह के यंत्र वेदर या सिविलियन रिसर्च वाले गुब्बारों में नहीं होते.

- नंबर तीन. एक और गुब्बारा. जिस किस्म के गुब्बारे को अमेरिका ने मिसाइल मारकर गिराया, वैसा ही एक और गुब्बारा इस समय लैटिन अमेरिका के ऊपर उड़ रहा है. मीडिया रपटों के अनुसार, उसमें भी उसी तरह की मशीनें लगी हुईं हैं. ये गुब्बारा भी चीन का ही है. चीन ने इस आरोप को स्वीकार किया है. हालांकि, उसने कहा है कि ये गुब्बारा भी मौसम की जानकारी लेने के लिए ही निकला था.

- नंबर चार. ताइवान विवाद. गुब्बारे वाले झगड़े में ताइवान भी कूद गया है. उसने बयान जारी कर अमेरिका को शाबासी दी है. इससे चीन का नाराज़ होना तय है. चीन, ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है. जबकि, अमेरिका, ताइवान को अलग मुल्क़ के तौर पर मान्यता तो नहीं देता, लेकिन उसका समर्थन ज़रूर करता है. अगस्त 2022 में अमेरिकी संसद के निचले सदन की स्पीकर नैन्सी पेलोसी ताइवान के दौरे पर गईं थी. उस समय चीन में ये मांग उठी थी कि, चीनी वायुसेना को पेलोसी की फ़्लाइट को ताइवान में घुसने नहीं देना चाहिए था. उस समय चीन ने नरमी बरती थी. आशंका जताई जा रही है कि, हालिया ऐपिसोड ने चीन को हिंसक होने का बहाना दे दिया है. पेलोसी के बाद निचले सदन के स्पीकर बने केविन मैक्कार्थी ताइवान जाने की इच्छा जता चुके हैं. ये निश्चित तौर पर चीन को नाराज़ करेगा. जानकारों की मानें तो इस बार चीन हवा में फ़ाइटर जेट्स तैनात करने से नहीं हिचकेगा. ऐसी स्थिति में दोनों देशों के बीच सीधा टकराव तय है.

अब सवाल ये है कि, क्या सुलह की कोई संभावना बची है?

इसका जवाब हां में है. गुब्बारा विवाद के बीच दो दिलचस्प घटनाएं और हुईं. पहली, चीन ने मौसम विभाग के मुखिया को पद से बर्खास्त कर दिया. कहा गया कि चीन ज़िम्मेदार के तौर पर पेश आने की कोशिश कर रहा है. दूसरी, एंटनी ब्लिंकन ने चीन के सेंट्रल फ़ॉरेन अफ़ेयर्स कमीशन के डायरेक्टर वांग यी को फ़ोन किया. न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ब्लिंकन ने अपना दौरा रद्द करने की वजह सीधे वांग से साझा की. कहा जा रहा है कि, इसके ज़रिए बातचीत का दरवाज़ा खुला रखने की कोशिश की गई है. हो सकता है कि, ये प्रयास आगे चलकर सफल हो. लेकिन अभी के लिए इसने अमेरिका और चीन को एक-दूसरे के सामने लाकर खड़ा कर दिया है. ये तकरार पूरी दुनिया के लिए ख़तरनाक हो सकती है.

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