हर रोज मिनिमम 10 से 12 घंटे की ड्यूटी करते ही हैं हम लोग. और इसके बदले हमें क्या मिलता है, 250 रुपए मात्र. आप ये समझ लीजिए कि अपने एक दिन की कमाई से हम एक एन-95 मास्क भी नहीं खरीद सकते. वो भी 350 रुपए का एक मिलता है. अपने लिए मास्क खरीदने के लिए भी हमें दो दिन की कमाई लगानी पड़ेगी.ये कहना है शिवम मिश्रा का. शिवम लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में MBBS की पढ़ाई कर रहे हैं. MBBS की 4.5 साल पढ़ाई करने के बाद अब मेडिकल कॉलेज में ही इंटर्नशिप कर रहे है. पूरा देश इस समय कोरोना महामारी जैसी भयावह संकट के दौर से गुजर रहा है. इस महामारी के खिलाफ लड़ाई में मेडिकल स्टाफ फ्रंटलाइन वॉरियर हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कहने पर देश भर में ताली और थाली बजाकर इन डॉक्टर्स के लिए आभार भी जताया गया. क्योंकि संकट के इस दौर में डॉक्टर्स लगातार लोगों की मदद में जुटे हुए हैं. ऐसे में इन डॉक्टर्स के लिए खुद को सुरक्षित रखना बहुत जरूरी हो जाता है. यही वजह है कि यूपी के मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप कर रहे हजारों जूनियर डॉक्टर सरकार से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं.
4.5 साल तक कड़ी मेहनत और सैकड़ों एग्जाम्स पास करने के बाद फाइनली हमें इंटर्नशिप पूरा करने के लिए प्रोविजनल लाइसेंस मिलता है. हम 12-12 घंटे काम करते हैं और बदले में क्या मिलता है? 250 रुपए. एक दिहाड़ी मजदूर से भी कम. महीने के 7500 रुपए. जबकि इसी काम के लिए केंद्र सरकार 23500 रुपए देती है. हरियाणा में 18, बिहार में 15 हजार मिलता है. अभी कुछ दिन पहले ही पंजाब सरकार ने स्टाइपेंड 9 हजार से बढ़ाकर 15 हजार किया है.
बाकी राज्यों और केंद्र सरकार के कालेजों में इंटर्नशिप के दौरान जो स्टाइपेंड मिलता है वो हमसे बहुत ज्यादा है. अभी हमें 250 रुपए डेली के हिसाब से मिलता है. लास्ट टाइम ये बढ़ा था 2010 में. तब 1900 रुपए से बढ़ाकर 7500 किया गया था. वो भी लाठीचार्ज के बाद. पिछले दस सालों में कई बार सरकार के सामने इसे बढ़ाने के लिए मांग उठाई गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. हम ट्विटर पर ट्रेंड चला रहे हैं. हमने कई बार सरकार से शिकायत की. हमारे सीनियर्स धरने पर भी बैठे. मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल भी आए थे. उन्होंने आश्वासन दिया था लेकिन कुछ होता नहीं. हमारी डिमांड यही है कि इसे बढ़ाया जाए. अभी हाल ही में पंजाब में स्टूडेंट्स ने प्रोटेस्ट किया तो वहां के मुख्मंत्री ने इसे बढ़ाया है. हम चाहते हैं कि यूपी के मुख्यमंत्री इसका संज्ञान लें. लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज में कोरोना के कई मरीज भर्ती हैं.मेरे कई फ्रेंड्स पूरी रात ड्यूटी करते हैं. लेकिन अगर हम खुद को ही सुरक्षित नहीं रख पाएंगे तो इलाज कैसे करेंगे.
आप खुद ही सोचिए महामारी के समय भी हम लगातार काम कर रहे हैं. 250 रुपए जो हमें मिलता है उसमें हम अपने मेस का खर्चा भी नहीं निकाल पाते हैं. हम लोगों हॉस्टल का पैसा भी अलग से देना पड़ता है. हमें सारे आवश्यक मेडिकल इक्विपमेंट अपने से ही खरीदने होते हैं. आप खुद ही सोचिए कि इस स्टाइपेंड में हम रहने खाने की व्यवस्था करें या फिर मेडिकल इक्विपमेंट्स की. इसके अलावा हमें पीजी की तैयारी भी करनी होती है. इन्हीं सब दिक्कतों की वजह से हम लोग पिछले कई सालों से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. पिछले साल बोला गया था कि हम आपकी समस्या सुनेंगे. लेकिन वो बैच चला गया और हमारा नया बैच आ गया लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला.
कोरोना लॉकडाउन के इस दौर में स्टूडेंट्स कई मोर्चों पर लड़ाई लड़ रहे हैं. लेकिन ये लड़ाई अकेले की नहीं. इसलिए अनुभव साझा करना है जरूरी. अगर आप भी अपने दोस्त दी लल्लनटॉप के साथ शेयर करना चाहते हैं अपनी दिक्कतें और एक्सपीरिएंस तो हमें मेल करें YUVA.LALLANTOP@GMAIL.COM पर.
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