यह गाना तो आपने सुना ही होगा. होली का नाम जुबां पर आता है, तो रंगों के साथ-साथ भांग की गोली और उससे बने पकवान का स्वाद लेने के लिए मन ललचा जाता हैं. लेकिन कभी-कभी हम स्वाद में जरूरत से ज्यादा खा-पी लेते हैं, और हैंगओवर का शिकार हो जाते हैं. कुछ लोगों के लिए बिना भांग के होली अधूरी है. लोग मौज-मस्ती के दौरान भांग इतनी ज्यादा पी लेते हैं कि बाद में उन्हें बहुत परेशानी होती है. यदि आप भी बिना भांग के होली नहीं मनाते तो आपके लिए ऐसे सलूशन्स बता रहे हैं, जिन्हें यूज करके आप हैंगओवर से कुछ हद तक बच सकते हैं. भांग ज़्यादा फांक लेने से होता क्या-क्या है? # भांग का नशा करने के बाद कुछ लोगों को बहुत नींद आती है. ऐसे में अगर आप किसी ऐसी जगह गए हैं, जहां किसी को पहचानते नहीं हैं तो आप भांग बिल्कुल ना लें. आप अकेले हैं तो भी भांग का नशा करने से बचें.
# कुछ लोगों को क्लॉस्ट्रॉफ़ोबिक अटैक पड़ना शुरू हो जाता है. यानि लोग जो काम कर रहे हैं, उसे ही करते रह जाते हैं.
# शरीर का डाइजेस्टिव सिस्टम यानी पाचन तंत्र ख़राब हो जाता है.

एन्जॉय कीजिए लेकिन संभलकर.
भांग लेते समय या लेने के बाद क्या न करें # जब भी भांग लें तो उससे पहले कुछ जरूर खा लें, जिससे भांग ज्यादा असर ना करें. भांग को ठंडाई या फिर मिल्क शेक के साथ पीने से भी ज्यादा नशा नहीं चढ़ेगा.
# भांग के नशें मे ड्राइविंग करने से बचें.
# आपको अगर अस्थमा, हार्ट की प्रॉब्लम, हाई बीपी या ब्रेन की कोई समस्या है, तो भांग न लें.
# भांग को अल्कोहल के साथ ना पिए, ये कॉम्बिनेशन तगड़ा गुल खिलाएगा.
# भांग पीकर किसी भी तरह की पेनकिलर्स (दर्द की गोली) ना लें. इससे एसिडिटी बढ़ने का ख़तरा बताया जाता है. साथ ही उल्टी आने की संभावना बढती है.
# भांग पीने से ज्यादा डिहाईड्रेशन हो जाता है, जिससे गला सूखने लगता हैं. इसलिए जितना हो पानी ज्यादा से ज्यादा पिएं. जब नशा हैंगओवर बन जाए तब क्या करें? # नींबू, छाछ, दही जैसी खट्टी चीजों का सेवन करें.
# शुद्ध देशी घी, भुने हुए चने का भी सेवन करें.
# अरहर की कच्ची दाल को अच्छी तरह से पीसकर खाएं.
# नारियल पानी और अदरक का रस का भी उपयोगी होता है.
# यदि भांग का नशा अधिक चढ़ गया हैं, तो आप सरसों के तेल को गर्म करके व्यक्ति के कान में दो तीन बूंद डालें जिससे उसकी बेहोशी दूर होगी और उसे होश में आने में आसानी होगी.
यह स्टोरी हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहे शिवम शर्मा ने की है.
























