मणिकांत
मणिकांत नाम का ये लड़का मुनेश्वर ब्लॉक का रहने वाला है. 12वीं तक पढ़ाई की है. जिसके बाद वो नशा करने लग गया. और नशे की आदत के बाद पकड़ ली लड़कियों को हैरेस करने की आदत.ये सड़क चलती लड़कियों को जबरन गले लगाता था. फिर कहता था, मुझसे शादी कर लो. सबसे पहले इस लड़के के खिलाफ शिकायत मंगलवार को आई. इसने स्विमिंग पूल के पास एक लड़की को परेशान किया. उसके गले लगने की कोशिश की, फिर कहा, शादी कर लो मुझसे. लड़की वहां से भाग गई और पुलिस में शिकायत कर दी.
इसी तरह एक स्कूल में पढ़ने वाली लड़की के घर वालों ने भी पुलिस को बताया कि मणिकांत ने उनकी बेटी को स्कूल से घर लौटते वक़्त गले लगाना चाहा. फिर शादी करने को कहा. जब लड़की ने शोर मचाया तो लोगों ने उसे पकड़ लिया. पर फिर भी वो बच निकला. उस समय वो अपनी बाइक छोड़कर भाग गया. जिसके रजिस्ट्रेशन नंबर से पुलिस ने उसके घर का पता लगा लिया.
घटनाओं की फुटेज CCTV से लड़के की शक्ल मिलाई गई और वो पकड़ा गया. फिलहाल उसे पॉक्सो के तहत गिरफ्तार किया गया है.
लेकिन मणिकांत जैसे लोगों को पकड़ना आसान होता है. हर उस आदमी को पकड़ना आसान होता है जो मजदूर, ठेला लगाने या पब्लिक ट्रांसपोर्ट चलाने वाली केटेगरी में आते हैं. क्योंकि ये समाज का वो वर्ग होता है जिसकी न तो अफसरों और मिनिस्टरों से पहचान होती है, न ही पुलिस को खिलाने के लिए पैसे. टीनएज लड़कियों को गंदी निगाहों से देखने वाले, उनको गलत तरीके से छूने वाले हमारे पड़ोस में, हमारे घरों में, स्कूलों में मिल जाते हैं.
कई लड़कियां इस बात से इत्तेफाक रखेंगी कि कोई न कोई ऐसे अंकल जरूर हुए हैं जो शाबाशी देने के बहाने पीठ पर ब्रा के हुक महसूस कर लेते थे. कोई न कोई ऐसे 'सर' जरूर हुए हैं जो आपको जरूरत से ज्यादा 'लाड़' करते थे. कोई न कोई पड़ोसी या रिश्तेदार जो आपको नन्ही बच्ची जैसा महसूस कराने के लिए अतिरिक्त प्रेम दिखाते हुए आपको ऐसे ढंग से छू देते थे कि किसी को कुछ मालूम भी न पड़े पर आप असहज महसूस कर जाएं.घर के बड़े, पड़ोसी या किसी टीचर का ऐसा करना बहुत आसान होता है, क्योंकि बड़े होने के कारण उनके पास एक तरह की सुपीरियॉरिटी, आपके ऊपर एक तरह का राज करने का लाइसेंस होता है . जिसको वो बड़ी आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं. और हमें तो टीनेज में सिखाया नहीं जाता कि सेक्स किस चिड़िया का नाम है. किस हरकत को हैरेसमेंट कह सकते हैं. इसलिए लड़कियों ने कभी शिकायत नहीं की. शायद आज भी नहीं करती होंगी.
हम अपने बच्चों को सेक्स एजुकेशन से इतना दूर जो रखते हैं. असहज महसूस कर के भी लड़कियां शिकायत नहीं करतीं क्योंकि वो घर के लोग होते हैं. वहीं कोई बाहर का आदमी ऐसा करता है तो शिकायत करना आसान हो जाता है.
अपने आस पास देखिए. उन दोस्तों को, रिश्तेदारों को, पड़ोसियों को, टीचरों को, सहकर्मियों को जो आपको असहज महसूस करवाते हों. निगाहों से, छूकर, या गले लगकर. उनके बारे में बात करिए अपने दोस्तों से, अपने सीनियर्स से, अपने माता-पिता से. और अगर किसी भी तरह से आपको अन्कम्फर्टेबल महसूस करवाया जा रहा हो तो उस स्कूल, उस घर या उस ऑफिस को छोड़कर मत भागिए. उसकी शिकायत करिए.
बोलिए.














