The Lallantop

सर डॉन ब्रैडमैन: वो आखिरी 4 रन जो नहीं बने, वरना आज क्रिकेट का इतिहास कुछ और होता!

Sir Don Bradman: क्रिकेट का वो 'हिमालय' जिसे Sachin Tendulkar, Brian Lara और Virat Kohli भी फतह नहीं कर सके. क्या होता अगर सर डॉन ब्रैडमैन अपनी आखिरी पारी में 4 रन बना लेते. पढ़िए 'लल्लनखास' में 99.94 के औसत की पूरी पड़ताल.

Advertisement
post-main-image
सर डॉन ब्रेडमैन का रिकॉर्ड क्यों नहीं तोड़ पाए सचिन, लारा और कोहली? (फोटो- MCC)

आज 26 फरवरी है. क्रिकेट की दुनिया के उस महामानव की पुण्यतिथि, जिसने बल्लेबाजी की परिभाषा ही बदल दी. हम बात कर रहे हैं 'द डॉन' यानी सर डोनाल्ड ब्रैडमैन (Donald Bradman) की.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

आज के दौर में जब विराट कोहली, स्टीव स्मिथ या जो रूट जैसे धुरंधर मैदान पर उतरते हैं, तो रिकॉर्ड्स की झड़ी लग जाती है. लेकिन एक नंबर ऐसा है जिसे देख कर आज के 'मॉडर्न डे लेजेंड्स' के पसीने छूट जाते हैं. 

99.94. ये सिर्फ एक नंबर नहीं है, ये क्रिकेट का वो 'हिमालय' है जिसे पिछले 78 सालों से कोई छू तक नहीं पाया है. तेंदुलकर का संतुलन हो, लारा का स्टाइल हो या कोहली का पैशन, इनमें से कोई भी इस औसत के करीब तक नहीं पहुंच सका.

Advertisement

आइए, लल्लनखास अंदाज में समझते हैं कि आखिर डॉन ब्रैडमैन में ऐसा क्या था जो आज के दौर के हाई-टेक ट्रेनिंग वाले बल्लेबाज भी उनके आस-पास नहीं फटक पा रहे.

वो आखिरी पारी और वो चार रन: जब किस्मत ने गच्चा दे दिया

किस्सा शुरू करते हैं उनके करियर के अंत से. साल 1948, ओवल का मैदान. डॉन ब्रैडमैन अपनी आखिरी टेस्ट पारी खेलने उतरे थे. पूरी दुनिया की नजरें उन पर थीं. उन्हें अपना टेस्ट औसत 100 का रखने के लिए सिर्फ 4 रन चाहिए थे. मतलब एक चौका और इतिहास सौ टका पक्का!

लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. एरिक होलीज की एक गुगली पर ब्रैडमैन बिना खाता खोले (डक) आउट हो गए. ESPNcricinfo में दर्ज जानकारी के मुताबिक वो महज 4 रन नहीं बना पाए और उनका औसत ठहर गया 99.94 पर. अगर वो 4 रन बना लेते, तो आज हम गणित की किताबों में 'परफेक्शन' की मिसाल के तौर पर 100 का औसत पढ़ रहे होते.

Advertisement
Don
सर डॉन ब्रैडमैन की आखिरी पारी (फोटो- MCC)
 गोल्फ की गेंद और स्टंप: वो अनोखा देसी जुगाड़

अब आप सोचेंगे कि क्या डॉन के पास कोई जादुई बल्ला था? नहीं! उनके पास था एक जबरदस्त 'देसी जुगाड़'. बचपन में ब्रैडमैन के पास कोई हाई-फाई एकेडमी या कोच नहीं था. वो अपने घर के पीछे एक लोहे के वाटर टैंक के सामने खड़े हो जाते थे. उनके हाथ में क्रिकेट बैट की जगह एक 'स्टंप' (Stump) होता था और वो गोल्फ की गेंद से प्रैक्टिस करते थे.

सोचिए, एक पतली सी लकड़ी (स्टंप) से छोटी सी गोल्फ की गेंद को मारना कितना मुश्किल है. “ब्रैडमैन म्यूजियम और इंटरनेशनल क्रिकेट हॉल ऑफ फेम” (Bradman Museum & International Cricket Hall of Fame) के मुताबिक वो गेंद टैंक से टकराकर टेढ़ी-मेढ़ी वापस आती थी और डॉन उसे फिर मारते थे. इसी प्रैक्टिस ने उनके 'हैंड-आई कोऑर्डिनेशन' को इतना मजबूत कर दिया कि असली मैच में उन्हें क्रिकेट की गेंद फुटबॉल जैसी दिखने लगी.

12 दोहरे शतक: जब डॉन के सामने गेंदबाज पानी मांगने लगे

टेस्ट क्रिकेट में एक दोहरा शतक (200 रन) बनाना आज भी किसी बल्लेबाज के लिए सपना होता है. लेकिन डॉन ने अपने करियर में 12 दोहरे शतक जड़े थे. यह एक ऐसा रिकॉर्ड है जो 2026 में भी किसी 'चमत्कार' से कम नहीं लगता. तुलना के लिए देखिए, विराट कोहली के नाम 7 और सचिन तेंदुलकर के नाम 6 दोहरे शतक हैं.

उनकी इस भूख का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके 12 दोहरे शतकों में से दो बार तो उन्होंने 300 का आंकड़ा पार किया था. ब्रैडमैन की ये उपलब्धि ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ (Guinness World Records - Most double centuries in Test cricket) में भी दर्ज है. उनके इस रिकॉर्ड के सबसे करीब आज तक सिर्फ कुमार संगकारा (11) पहुंच पाए हैं.

309 रन एक ही दिन में: जब गेंदबाजों की नींद उड़ गई

1930 की The Ashes सीरीज में लीड्स टेस्ट के पहले ही दिन ब्रैडमैन ने 309 रन बना दिए थे. टेस्ट इतिहास में एक दिन में 300 से ज्यादा रन बनाने का यह दुर्लभ रिकॉर्ड आज भी कायम है. उसी मैच में उन्होंने कुल 334 रन की पारी खेली थी.

Don
जब ब्रैडमैन ने एक ही दिन में बनाए 309 रन (फोटो- विज़डन)
बॉडीलाइन सीरीज: जब डॉन को रोकने के लिए 'खूनी खेल' खेला गया

ब्रैडमैन की बल्लेबाजी से अंग्रेज इतने खौफ में थे कि उन्होंने खेल की मर्यादा ही ताक पर रख दी. 1932-33 की एशेज सीरीज में इंग्लैंड के कप्तान डगलस जार्डिन ने एक खतरनाक रणनीति बनाई, जिसे 'बॉडीलाइन' कहा गया. 

उस सीरिज का ज़िक्र ‘नेशनल म्यूजियम ऑफ ऑस्ट्रेलिया’ (National Museum of Australia) के दस्तावेज ‘बॉडीलाइन सीरिज हिस्ट्री’ (Bodyline Series History) में भी मिलता है. आसान भाषा में बॉलीलाइन सीरिज का मतलब था- शरीर की लाइन में बॉल डालता.

गेंदबाज गेंद को बल्लेबाज के शरीर और सिर को निशाना बनाकर फेंकते थे. इरादा साफ था- या तो बल्लेबाज डर कर कैच दे दे, या अस्पताल पहुंच जाए. 

bodyline series
बॉडीलाइन सीरिज की एक तस्वीर (फोटो- National Museum of Australia)

मैदान पर खिलाड़ियों की पसलियां टूटीं और सिर पर चोटें लगीं. इतने खौफनाक माहौल में भी डॉन डटे रहे. उस सीरीज में उनका औसत गिरकर 56.57 पर आ गया, जिसे दुनिया ने 'नाकामी' कहा. आज के दौर में 56 का औसत किसी बल्लेबाज के लिए करियर का सबसे सुनहरा दौर होता है!

‘इनविंसिबल्स’ के कप्तान: 1948 की वो टीम जो कभी हारी ही नहीं

साल 1948 का इंग्लैंड दौरा क्रिकेट इतिहास में “The Invincibles” के नाम से दर्ज है. ऑस्ट्रेलिया ने उस पूरे दौरे में एक भी मैच नहीं हारा. इस ऐतिहासिक टीम की कप्तानी सर Sir Donald Bradman कर रहे थे. यह उपलब्धि आज भी अनोखी मानी जाती है क्योंकि उसके बाद कोई भी ऑस्ट्रेलियाई टीम इंग्लैंड में ऐसा कारनामा नहीं दोहरा सकी.

ESPNcricinfo के मुताबिक ब्रैडमैन ने 24 टेस्ट मैचों में ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी की. उनमें से 15 जीते, 3 हारे और बाकी ड्रॉ रहे. उस दौर में यह जीत प्रतिशत बेहद प्रभावशाली माना जाता है.

फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 95.14 का औसत

अक्सर चर्चा टेस्ट औसत 99.94 पर होती है, लेकिन फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी ब्रैडमैन का औसत 95.14 रहा. ESPNcricinfo के मुताबिक उन्होंने 28000 से ज्यादा रन और 117 शतक बनाए. यह दिखाता है कि उनका दबदबा सिर्फ इंटरनेशनल स्तर तक सीमित नहीं था.

वो 5 गेंदबाज, जिन्होंने 'डॉन' की नाक में दम कर दिया था

भले ही ब्रैडमैन का औसत 99.94 था, लेकिन इन पांच गेंदबाजों ने उन्हें सबसे ज्यादा बार आउट किया. आइये आपको उन पांचों गेंदबाज़ों से भी मिलवाते हैं. 

  • हेडली वेरिटी (8 बार): ये एक स्पिनर थे. इनकी 'आर्म बॉल' ने डॉन को 8 बार पवेलियन भेजा.
  • एलेक बेडसर (6 बार): इंग्लैंड के इस गेंदबाज ने डॉन को सबसे ज्यादा बार अपना शिकार बनाया.
  • हेरोल्ड लारवुड (5 बार): बॉडीलाइन सीरीज के मुख्य हथियार. उनकी रफ्तार ने डॉन को काफी परेशान किया.
  • मौरिस टेट (5 बार): इंग्लैंड के मीडियम पेसर, जिन्होंने डॉन के करियर के शुरुआती दौर में उन्हें खूब छकाया.
  • विलियम एरिक "बिल" बोवेस (5 बार): इंग्लैंड के एक और तेज गेंदबाज जिन्होंने अपनी सधी हुई लाइन लेंथ से डॉन को कई बार मुश्किल में डाला.

सोर्स: Statsguru - Bowlers who dismissed Bradman most often

Verity
हेडली वेरिटी वो गेंदबाज जिसने ब्रैडमैन को सबसे ज्यादा बार आउट किया (फोटो- ICC)
डॉन के 'लकी' मैदान: जहां उनका बल्ला आग उगलता था

डॉन के लिए कुछ मैदान उनके 'दूसरे घर' जैसे थे, जहां गेंदबाजों की शामत आ जाती थी. हम उन क्रिकेट ग्राउंड्स का ज़िक्र कर रहे हैं, जिनमें सर ब्रैडमैन ने अपने करियर के सबसे ज्यादा रन बनाए हैं. आगे बढ़ने से पहले एक नजर इन मैदानों पर भी डाल लेते हैं.

  • मेलबर्न (MCG): ऑस्ट्रेलिया में यहां उन्होंने 11 टेस्ट मैचों में 9 शतकों की मदद से 1671 रन बनाए.
  • एडिलेड ओवल: यहां डॉन का औसत 107.77 का था. सर ब्रैडमैन ने इस मैदान पर कुल 970 रन बनाए.
  • लीड्स (हेडिंग्ले): यहां उन्होंने केवल 4 मैचों में 192.60 की औसत से 963 रन बनाए, जिसमें दो तिहरे शतक शामिल थे!

सोर्स: Howstat - Ground-wise batting statistics for Don Bradman 

don
ब्रैडमैन के आगे कहां ठहरते हैं आज के क्रिकेट धुरंधर
आज के दौर के धुरंधरों से तुलना 

आज के 'फैब-4' और क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के आंकड़े भी डॉन के सामने आधे नजर आते हैं. इस फैक्ट को ग्राफिक्स के जरिए आसान तरीके से समझते हैं.

खिलाड़ीटेस्ट मैचऔसतशतक
सर डॉन ब्रैडमैन5299.9429
स्टीव स्मिथ110+56.832
सचिन तेंदुलकर20053.7851
केन विलियमसन102+54.533
विराट कोहली115+49.029

 सोर्स: ICC Men's Test Player Rankings & Statistics
नोट: डॉन ने मात्र 52 मैचों में 29 शतक ठोक दिए थे, जबकि आज के दिग्गजों को वहां तक पहुंचने में 110 से ज्यादा मैच लग जाते हैं.

नाइटहुड पाने वाले पहले ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर

1949 में ब्रैडमैन को नाइटहुड से सम्मानित किया गया. वह क्रिकेट के लिए यह सम्मान पाने वाले पहले ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी बने. इसके बाद ही उनके नाम के साथ “Sir” स्थायी रूप से जुड़ गया. ऑस्ट्रेलियन सरकार भी इसे देश के लिए बड़ी उपलब्धि मानता है.

ये भी पढ़ें: ताजमहल से जुड़ी ये बातें नहीं पता होंगी, मुमताज की याद में आज ही शुरू हुआ था निर्माण

क्या कोई और 'डॉन' आएगा?

क्रिकेट के पंडित कहते हैं कि 99.94 का औसत अब नामुमकिन है. खेल बहुत प्रोफेशनल हो गया है और डेटा के युग में गलतियों की गुंजाइश खत्म हो गई है. सर डॉन ब्रैडमैन सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं थे, वो एक ऐसी 'आसमानी ताकत' थे जो सदियों में एक बार आती है. 26 फरवरी को उनकी पुण्यतिथि पर पूरी दुनिया उन्हें याद कर रही है, क्योंकि रिकॉर्ड तो टूटते रहते हैं, लेकिन 'ब्रैडमैन' जैसा बेंचमार्क फिर कभी नहीं बनेगा. 

वीडियो: विवियन रिचर्ड्स ने ऐसा क्या कहा था कि गावस्कर ने डॉन ब्रैडमैन का रिकॉर्ड तोड़ दिया?

Advertisement