लखनऊ अग्निकांड: बिल्डिंग मालिक समेत 4 अरेस्ट, 4 अफसर सस्पेंड, SIT करेगी जांच
Lucknow Coaching Centre Fire: अलीगंज स्थित तीन मंजिला बिल्डिंग में आग लगने के बाद 15 लोगों की मौत गई. इनकी उम्र 20-25 साल बताई गई है. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया है. इन आरोपियों में बिल्डिंग के मालिक भी शामिल हैं.

लखनऊ के अलीगंज में 22 जून को एक तीन मंजिला बिल्डिंग में आग लगने से 15 लोगों की मौत गई. अब इस मामले में चार नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने 6 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की थी. जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, उसमें बिल्डिंग के मालिक भी शामिल हैं. जांच के बाद 4 अफसरों को भी सस्पेंड कर दिया गया है.
आजतक से जुड़े आशीष श्रीवास्तव की रिपोर्ट के मुताबिक, बिल्डिंग मालिक वीरेंद्र शुक्ला, एनीमेशन ट्रेनिंग स्टूडियो के फाउंडर तुषांक कृष्णा जायसवाल, स्टूडियो मैनेजर रामकृष्ण उपाध्याय और सुरेश कुमार साहू की गिरफ्तारी हुई है. बताया गया कि हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए और जांच के सख्त आदेश दिए. जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (SIT) का गठन किया गया है.
7 दिन में रिपोर्ट देगी SITदो सदस्यीय SIT का गठन हुआ है. ये फैसला कई हाई लेवल रिव्यू मीटिंग के बाद लिया गया. SIT में अमृत अभिजात, अपर मुख्य सचिव (पर्यटन, धर्मार्थ कार्य एवं संस्कृति विभाग) और प्रवीण कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी), लखनऊ जोन को शामिल किया गया है.
सरकार ने SIT को सात दिन के अंदर एक विस्तृत रिपोर्ट सबमिट करने को कहा है. सरकार ने टीम को आग लगने के कारण, कानूनी मंजूरी, बिल्डिंग में सेफ्टी नियम और किसी भी प्रकार की संभावित लापरवाही, सभी पहलुओं पर गंभीरता से जांच करने के आदेश दिए हैं. राज्य सरकार ने साफ़ कहा कि हादसे के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति या संस्था को बख्शा नहीं जाएगा.
इस मामले में योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर, लखनऊ विकास प्राधिकरण, अग्निशमन विभाग और विद्युत विभाग के चार अधिकारियों को भी निलंबित किया गया है.
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अवैध निर्माण का आरोपहादसे के बाद मिली जानकारी के मुताबिक, जिस बिल्डिंग में आग लगी है, उसे आवासीय नक्शे की स्वीकृति मिली थी. लेकिन बाद में उसी बिल्डिंग का इस्तेमाल कमर्शियल कामों के लिए किया जाने लगा. आरोप है कि लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने समय रहते इसपर ठोस कार्रवाई नहीं की. बताया गया कि साल 2016 में LDA ने इस कथित अवैध बिल्डिंग के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था. जिसके बाद इसे गिराने के भी आदेश दिए गए थे.
लेकिन बाद में भवन मालिकों ने यह कहते हुए आपत्ति दर्ज कराई कि उन्हें सुनवाई का सही मौका नहीं मिला और निर्माण स्वीकृत मानचित्र के अनुसार ही है. इसके बाद 5 जुलाई 2016 को बिल्डिंग ध्वस्त करने के आदेश को निरस्त कर दिया गया.
वीडियो: लखनऊ अग्निकांड के पीड़ितों ने क्या बताया?

