पर फोन ब्लास्ट क्यों होते हैं? क्या वो बम की तरह होते हैं?
फोन की स्क्रीन बड़ी होती जा रही है. फोन पावरफुल होते जा रहे हैं. उनकी बैटरी की जरूरत बढ़ती जा रही है. ये बात पूरी तरह सच है कि अगर ब्लास्ट होता है तो ये बनाने वालों की ही गलती होती है. बैटरी को पूरा इस्तेमाल करने के चक्कर में वो लोग गड़बड़ा देते हैं. बढ़ाने के चक्कर में बैटरी की 90 परसेंट क्षमता इस्तेमाल की जा चुकी है. इन लिथियम ऑयन बैटरियों की ब्लास्ट होने की कई वजहें हैं. पर सबसे ज्यादा इसीलिये होता है कि उनसे काम बहुत ज्यादा ले लिया जाता है. लिथियम आयन बैटरियां स्मार्टफोन में बहुत ज्यादा इस्तेमाल होती हैं. क्योंकि ये बहुत हल्की होती हैं और इनमें बहुत सारी ऊर्जा इकट्ठा की जा सकती है.फोन की प्रोसेसिंग स्पीड हर डेढ़ साल में डबल हो जाती है. जबकि बैटरी में उस हिसाब से बदलाव नहीं आ पाता. आमतौर पर फुल चार्ज स्मार्टफोन एक दिन से ज्यादा नहीं चल पाता. बैटरी लाइफ समस्या तो है. पर इसको सॉल्व करना उससे बड़ी समस्या बन गई है.
बैटरी क्या होती है?
बैटरी केमिकल एनर्जी को स्टोर करती है. जब स्मार्टफोन को चार्ज किया जाता है, तो केमिकल रिएक्शन शुरू हो जाते हैं. इलेक्ट्रॉन एनोड से कैथोड जाते हैं और बैटरी चार्ज हो जाती है. जब इसको यूज किया जाता है तो इलेक्ट्रिसिटी पैदा होती है. इलेक्ट्रॉन एनोड की तरफ जाने लगते हैं. और जब सारे चले जाते हैं तो बैटरी डिस्चार्ज हो जाती है.पर बैटरी किस चीज की बनी होती है?
एक बैटरी में एनोड, कैथोड और इलेक्ट्रोलाइट रहते हैं. जिसमें से इलेक्ट्रॉन घूमते रहते हैं. लिथियम ऑयन बैटरियों में कैथोड कोबॉल्ट, निकेल, मैंगनीज का बना होता है. एनोड ग्रेफाइट का होता है. इलेक्ट्रोलाइट लिथियम सॉल्ट का बना होता है.जब सारा खेल इलेक्ट्रॉन का ही होता है तो फिर दिक्कत क्या है?
सुनने में फोन का काम बड़ा आसान सा होता है. लेकिन केमिस्ट्री और टेक्नॉलजी का चक्कर अलग होता है. बैटरी में चाहे कुछ भी लगा लें पर ये चलेगी सिर्फ केमिकल चीजों के दम पर. और ये चीजें सबमें बराबर होती हैं. इसका उपाय होता है कि फोन का साइज बढ़ा दें. पर अब फोन पतले होते जा रहे हैं. तो ये फॉर्मूला भी नहीं चलेगा. फिर फोन के बार-बार चार्ज-डिस्चार्ज होने से एनोड और कैथोड पर इलेक्ट्रॉन और केमिकल की एक परत जम जाती है. बैटरी का रजिस्टेंस बढ़ जाता है. लोड ज्यादा बढ़ने लगता है.पर ब्लास्ट कैसे हो जाता है?
रजिस्टेंस बढ़ने से बैटरी को ज्यादा काम करना पड़ता है. टेम्परेचर बढ़ जाता है. 80 डिग्री सेंटिग्रेड से ऊपर जाने पर बैटरी के कंपोनेंट खराब होने लगते हैं. और यहीं पर वो जलने लगते हैं. छोटी सी बैटरी में प्रेशर बनने लगता है. ब्लास्ट हो जाता है. इलेक्ट्रोलाइट ही जलने लगता है. हालांकि साइंटिस्ट इसपे काम कर रहे हैं. कि ऐसा इलेक्ट्रोलाइट आ जाये जो ब्लास्ट ना करे.सैमसंग ने अभी तक ये क्लियर नहीं किया है कि नोट 7 की दुर्दशा की क्या वजह है.











