पाकिस्तान. दुनिया का एकमात्र देश जो इस्लाम के नाम पर बना. इस्लामिक देशों में एकमात्र देश, जिसके पास एटम बम है. जिसकी लोकेशन इतनी महत्त्वपूर्ण है कि हर बड़ा देश वहां अपना एक पैर रखना ही चाहता है. पर इस देश की राजनीति में काई बहुत है. क्योंकि ये देश ही बरसों से जमा किये गये नफरत के कीचड़ पर बना था. तो सबके पैर फिसल जाते हैं. 69 सालों में ये देश खुद ही ढंग से खड़ा नहीं हो पाया है. 2013 में पहली बार ऐसा हुआ कि एक चुनी सरकार के जाने के बाद दूसरी चुनी सरकार आ पाई. तीन बार मिलिट्री राज झेलने के बाद इस देश का वजूद इतना कमजोर हो गया है कि जब भी ये अपने अंदर झांकने की कोशिश करता है तो इसे या तो हिंदुस्तान दिखता है या फिर अफगानिस्तान.

आबादी: 20 करोड़ (लगभग यूपी के बराबर, दुनिया में छठे नंबर पर) भाषा: पंजाबी (सबसे ज्यादा), पश्तो, सिंधी, उर्दू, कश्मीरी एथनिक ग्रुप: पंजाबी (44%) पश्तून (15%), सिंधी (14%), सरियाकी (8%), मोहाजिर (7.5%), बलोची (3.5%) धर्म: इस्लाम (96%)
पूर्व में इंडिया, पश्चिम में अफगानिस्तान जिसकी एक पतली पट्टी छोड़ दें तो ताजिकिस्तान से भी जुड़ा है, साउथ-वेस्ट में ईरान, और नॉर्थ-ईस्ट में चीन. पाकिस्तान- पंजाब से P, अफगानिस्तान से A, कश्मीर से K, सिंध से S , बलूचिस्तान से TAN.चार प्रोविंस हैं-
बलोचिस्तान (राजधानी-क्वेटा, आबादी-1.3 करोड़), पंजाब (राजधानी-लाहौर, आबादी-9.1 करोड़), सिंध (राजधानी-कराची, आबादी-5.5 करोड़), खैबर पख्तूनख्वा (राजधानी-पेशावर, आबादी-2.7 करोड़)वहां के केंद्र शासित प्रदेश-
FATA (Federally Administered Tribal Areas), राजधानी- पेशावर, आबादी-39 लाख इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी, राजधानी- इस्लामाबाद, आबादी- 11 लाखऑटोनोमस टेरिटरी
आजाद जम्मू और कश्मीर, राजधानी- मुजफ्फराबाद, आबादी- 30 लाख गिलगिट बाल्टिस्तान, राजधानी- गिलगिट, आबादी- 14 लाख
पाकिस्तान
कैसे इस्लाम के नाम पर बने देश ने आतंकवाद को पालने तक का सफर तय किया:
1.
आजादी के बाद पाकिस्तान ब्रिटिश यूनियन का डोमिनियन स्टेट बनकर रहा था. 1956 में इस्लामिक स्टेट बनने से पहले पाकिस्तान ब्रिटेन की रानी के अंडर आता था. और भारत छोड़ो आंदोलन इसी बात पर हुआ था कि अंग्रेज भारत को डोमिनियन स्टेट का दर्जा दे रहे थे. भारत के नेताओं को ये मंजूर नहीं था. पूरी आजादी चाहिये थी.
मुहम्मद अली जिन्ना
2.
मौलाना शब्बीर अहमद उस्मानी और मौलाना मदूदी ने पाकिस्तान बनने के साथ ही जोर लगाना शुरू कर दिया कि देश में शरिया कानून लगाया जाये. क्योंकि देश ही इस्लाम के नाम पर बना था. जब तक मुहम्मद अली जिन्ना थे, तब तक ये मांग उतनी मजबूत नहीं थी. उन्होंने वादा भी किया था कि देश में सबको जगह मिलेगी. पर मार्च 1949 में एक ऑब्जेक्टिव रिजॉलूशन पास हुआ शरिया को लेकर. बाद में जब संविधान बना तो इसी को प्रस्तावना की तरह रखा गया.
जिन्ना की मौत
3.
प्रधानमंत्री लियाकत अली खान बड़ी असुरक्षा में देश चला रहे थे. भ्रष्टाचार रोकने के लिये कानून भी बनाया. पर इसका बड़ा मिसयूज हुआ. लोगों ने नेताओं को फंसाना शुरू कर दिया. लियाकत पर आरोप लगा कि वो अपने दुश्मनों को साध रहे हैं इसी बहाने. फिर उनकी हत्या हो गई. 1956 में मिलिट्री जनरल अयूब खान ने सत्ता अपने हाथ में ले ली.
1958 में एक रैली में फोटो खींचती एक लड़की
4.
उसके बाद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से बढ़ी. पर अयूब खान ने एक गलती कर दी. 1965 में भारत से लड़ाई कर ली और फिर अर्थव्यवस्था लुढ़क गई. अयूब पर इतने आरोप लगे कि उन्होंने याह्या खान को सत्ता सौंप दी.
पाकिस्तान के फौजी अजीज भट्टी ने अपना सामान इस तरह रखा और तुरंत ही भारतीय फौज के हाथ मारे गये 1965 की लड़ाई में: Dawn
5.
फिर 1970 में पाकिस्तान में पहली बार लोकतांत्रिक चुनाव हुये. इरादा था कि मिलिट्री से डेमोक्रेसी हो जाये. पर हुआ नहीं. क्योंकि ईस्ट पाकिस्तान की अवामी लीग ने सबसे ज्यादा सीटें जीत ली थीं. ये याह्या खान को मंजूर नहीं था. सत्ता देने से मना कर दिया. ईस्ट पाकिस्तान में आजादी के पहले से ही बंगाली नेशनलिज्म फैल रहा था. अब विद्रोह हो गया. 1971 में ईस्ट पाकिस्तान बांग्लादेश के नाम से नया देश बन गया. इसी समय पाकिस्तान के 90 हजार सैनिकों को भारत के सामने सरेंडर करना पड़ा था.
90 हजार सैनिकों की रिहाई के लिये पाकिस्तान सरकार ने डाक टिकट निकाला था
6.
जुल्फिकार अली भुट्टो (लेफ्ट) ने खुद जिया उल हक (राइट) को चुना थाइसके बाद याह्या खान की जगह पर जुल्फिकार अली भुट्टो प्रेसिडेंट बने. देश में एक नया माहौल बना. एकदम से सोशलिस्ट विचारधारा आने लगी. प्रगति होने लगी. भारत के एटम बम बनाने की बात सुन कर पाकिस्तान में भी रिसर्च होने लगा. लगा डेमोक्रेसी आ ही गई है. पर ऐसा हुआ नहीं. 1977 में मिलिट्री जनरल जिया-उल-हक ने तख्तापलट कर दिया.

जुल्फिकार की फांसी के बाद रोती उनकी बीवी
7.
जिया ने अपने मिलिट्री रूल को सही साबित करने के लिये शरिया को कानून में घुसा दिया. इसके साथ ही देश में इकॉनमिक सुधार शुरू कर दिये. फिर अमेरिका की शह पर अफगानिस्तान में सोवियत रूस को रोकने के लिये पाकिस्तान में मुजाहिदीन ट्रेनिंग दी जाने लगी. यहीं से पाकिस्तान का रिश्ता आतंकवाद से जुड़ा. इसी समय कश्मीर में भी आतंकवाद शुरू हुआ.
एंटी-जिया प्रोटेस्ट में मार खाती लड़की
8.
1988 में एक प्लेन क्रैश में जिया की मौत हो गई. और बेनजीर भुट्टो पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बनीं. तानाशाही, आतंकवाद और शरिया से जूझते देश में महिला प्रधानमंत्री. इसके साथ ही देश में एक और नेता उभरा. नवाज शरीफ. फिर दोनों नेताओं में देश की राजनीति बंटती रही. दस साल तक. पर इस दौरान अर्थव्यवस्था चरमरा गई. मिलिट्री शासन के ठीक उलट. इसके अलावा नेताओं पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे. इसके बीच उनको भारत के साथ टेंशन बढ़ाने में सुकून मिलता था. जनता को संदेश जाता कि कुछ तो कर ही रहे हैं.
पत्रकारों की पिटाई
9.
फिर पैसे से जूझते देश ने 1998 में एटम बम फोड़ लिया. अमेरिका ने पाकिस्तान पर कई प्रतिबंध लगा दिये. पर भारत के साथ टेंशन बढ़ता रहा. पाकिस्तानी सेना ने करगिल में घुसपैठ शुरू कर दी. फिर 1999 में भारत-पाक की लड़ाई हो गई. जिसमें पाक की हार हुई. 1948, 1965, 1971 के बाद 1999 में ये चौथी हार थी. जबकि ये क्रिकेट नहीं, जंग थी. फिर भी बार-बार होती रही.
करगिल के नायक कैप्टन विक्रम बत्रा
10.
1999 में ही मिलिट्री जनरल परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ से सत्ता हड़प ली. उसके बाद देश फिर से नये रास्ते चल पड़ा. अमेरिका के साथ अफगानिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ लड़ने लगा. और भारत में आतंकवाद के साथ. ऐसे ही चलता रहा. फिर 2007 में चुनाव हुये. चुनाव प्रचार के दौरान ही बेनजीर भुट्टो की हत्या हो गई थी. सहानुभूति में उनकी पार्टी को जीत हासिल हुई. उनके पति आसिफ अली जरदारी प्रेसिडेंट बने. यूसुफ रजा गिलानी प्रधानमंत्री बने.
1999 का तख्तापलट
11.
पर जुडिशियरी के साथ पंगे होने के चलते यूसुफ रजा गिलानी को 2012 में पद छोड़ना पड़ा. 2013 में फिर चुनाव हुये. अबकी नवाज शरीफ की पार्टी को जीत हासिल हुई. 14 साल के बाद ये फिर प्रधानमंत्री बने. तब से ये पाकिस्तान को झेल रहे हैं और पाकिस्तान इनको.
नवाज शरीफ
पाकिस्तान में सक्रिय मुख्य आतंकवादी ग्रुप्स:
1. तालिबान
ये सुन्नी मुस्लिम ग्रुप है, जो वहाबी और देवबंदी विचारधारा से चलता है. इनका ज्यादा पैसा ड्रग और अरब देशों से आता है. ये लोग इस्लाम के नाम पर सबको भड़काते हैं. पाकिस्तान की एजेंसी आईएसआई पर इल्जाम लगता है इनकी मदद करने का. ये लोग अफगानिस्तान में काम करते हैं.
तालिबान
2. तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान
ये पाकिस्तानी तालिबान है. इसको बैतुल्ला मसूद ने शुरू किया था. ये लोग भी अफगानिस्तानी तालिबान के पश्तून समुदाय से आते हैं. इनका इरादा है पाकिस्तान की सरकार को उखाड़ फेंकना और इस्लामी राज लाना. यही वो ग्रुप है, जिसने पेशावर के स्कूल में ब्लास्ट किया था.
ब्लास्ट के बाद का सीन
3. लश्कर-ए-तैय्यबा
इस ग्रुप को हाफिज सईज ने बनाया था. इसी ग्रुप ने मुंबई में हमला किया था. कश्मीर में इन लोगों ने बहुत आतंकवाद फैलाया है. आईएसआई इस ग्रुप को सपोर्ट करती है.
इसी होटल ताज पर हमला हुआ था
4. लश्कर-ए-जांघवी
ये सुन्नी देवबंदी ग्रुप है. इसी ग्रुप ने डेनियल पर्ल को मारा था. जब मुशर्रफ ने इनको बैन कर दिया था, तो ये लोग अफगानिस्तान भाग गये. अब इनका पाकिस्तान आना-जाना लगा रहता है.
डेनियल पर्ल
5. अल-कायदा
ये लादेन और जवाहिरी का ग्रुप है. लादेन के मरने के बाद ये अब कमजोर पड़ गया था. पर इरादे कमजोर नहीं हैं. अभी भी तमन्ना है कि पूरी दुनिया में इस्लाम का राज हो.
पाकिस्तान में लादेन का घर
6. हिज्ब-ए-गुलबुद्दीन
काबुल का कसाई हिकमतियार गुलबुद्दीन अफगानिस्तान से भागकर पाकिस्तान आ गया था. तालिबान से इनका झगड़ा है. अब जा के अफगानिस्तान की सरकार से इनका समझौता हुआ है.
गुलबुद्दीन हिकमतियार
7. जैश-ए-मुहम्मद
मुहम्मद की सेना. कंधार कांड में छोड़े गये आतंकी मसूद अजहर का बनाया ग्रुप है. इसी को बैन करवाने के लिये भारत कोशिश कर रहा है. और चीन इसे नहीं करने दे रहा है.
मसूद अजहर
8. हरकत-उल-मुजाहिदीन
डॉक्टर बदर मुनीर ने इसको शुरू किया था. ये कश्मीरी ग्रुप है. जो पाकिस्तान की शह पर चल रहा है.
होटल मैरियट ब्लास्ट
9. हक्कानी ग्रुप
ये एक ट्राइबल ग्रुप है. जलालुद्दीन हक्कानी और उसका बेटा सिराजुद्दीन हक्कानी इसे चलाते हैं. इनका बहुत बड़ा ग्रुप नहीं है, पर पहुंच बहुत है.
2007 लाल मस्जिद में सैनिक कार्रवाई के बाद विरोध
पर इसका मतलब ये नहीं है कि पाकिस्तान में इतने ही आतंकवादी संगठन हैं. बहुत हैं. हाल के समय में इस बात को लेकर अमेरिका ने पाकिस्तान पर बहुत दबाव बनाया है. तो पाकिस्तान की आर्मी ने पाकिस्तानी तालिबान को अपना टारगेट बनाना शुरू कर दिया.
आतंकवादियों के खिलाफ पाक आर्मी का ऑपरेशन जर्ब-ए-अज्बइसमें भी हर आतंकवादी ग्रुप के साथ अलग-अलग व्यवहार किया जाता है. इसी चक्कर में आतंकवादियों ने पाकिस्तान में ही बम ब्लास्ट करना शुरू कर दिया. पाकिस्तान के हिसाब ही उनके 68 बिलियन डॉलर खर्च हुये हैं आतंकवाद से लड़ाई के नाम पर. हजारों लोग मरे हैं. लाखों लोग घर छोड़-छाड़कर भागे हैं. अब आतंकवादियों ने पाकिस्तानी सरकार को उखाड़ फेंकने का मन बना लिया है.
अमेरिका, अफगानिस्तान, भारत, चीन, आर्मी, आतंकवाद और ड्रग से जूझता पाकिस्तान आज काई पर खड़ा है. जहां से ये ना तो आगे जा पा रहा है, ना ही पीछे. बस फिसल रहा है.
फोटो क्रेडिट- डॉन
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