रोग नेशन यानी रोग देश. रोग नेशन का मतलब है, वो देश जो इंटरनेशनल नियमों को नहीं मानता और आतंकवाद को बढ़ाता है. रोग देश का मतलब है वो देश जो अंदर से रोगी हो चुका है, आतंकवाद जिसकी खुराक बन गई है. हिंदी और अंग्रेजी (Rogue) दोनों भाषाओं में मतलब एक ही है.
नाइजीरिया. अफ्रीका महाद्वीप का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश. जिसे हाल में सिर्फ इस बात के लिए जाना गया कि वहां के आतंकवादी संगठन बोको-हरम ने 276 स्कूली लड़कियों को किडनैप कर उन्हें सेक्स-स्लेव बना लिया. डेढ़ सौ साल ब्रिटिश गुलाम रहे इस देश ने बोको-हरम तक की 'प्रगति' कैसे कर ली? वो भी तब जब इसके पास तेल बहुत था.
आबादी: 18 करोड़ (अफ्रीका में सबसे ज्यादा, लगभग उत्तर प्रदेश जितना) भाषा: इंग्लिश, होउसा, योरूबा राजधानी: अबूजा धर्म: इस्लाम, क्रिश्चियन

आज़ादी पाने के बाद पहला काम वही हुआ. अपने लोगों को मारना.
ब्रिटिश कॉलोनी रहने के बाद नाइजीरिया 1960 में आजाद हुआ. द्वितीय विश्व-युद्ध के बाद ब्रिटेन अपनी कॉलोनीज रख नहीं पा रहा था. पर ये नया देश लड़खड़ा कर चल रहा था. क्योंकि वहां सत्ता ट्रान्सफर नहीं हुई थी. बस दे दी गई थी. 1967 से 70 तक सिविल वॉर हुआ. उसके बाद 1999 तक डेमोक्रेसी और मिलिट्री राज में दोलन गति करता रहा. 1999 में स्टेबल डेमोक्रेसी आई वहां. और 2011 का प्रेसिडेंट इलेक्शन पहला ऐसा चुनाव था जो साफ़-सुथरे ढंग से हुआ.नाइजीरिया में पैसा बहुत है. तेल के चलते. दुनिया की बीसवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. अफ्रीका में ये साउथ अफ्रीका से ऊपर है. यहां जवान लोगों की आबादी बहुत ज्यादा है. ये एक सेक्युलर स्टेट है. जहां 500 एथनिक समुदाय रहते हैं. होउसा (उत्तरी), इग्बो (पूर्वी) और योरूबा (पश्चिमी) सबसे बड़े समुदाय हैं. ये भविष्य के 11 ऐसे देशों में आता है, जो आगे चलकर बड़ी अर्थव्यवस्था बनेंगे.

सिविल वॉर का एक सीन
पर यहां पर 2002 से नींव डाले रहे मुस्लिम चरमपंथी संगठन बोको हरम ने क़त्ल-ए-आम मचाया हुआ है. जो देश में शरिया लागू करना चाहते हैं. सब कुछ साथ-साथ चल रहा है यहां. सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और शरिया. दोनों में कितना कंट्रास्ट है!
विकसित देश हाथ डालते रहे, सेक्युलर देश में चरमपंथी शरिया की तरफ बढ़ने लगे
यहां पर दिक्कत शुरू हुई चुनाव में गड़बड़ी को लेकर. 60 के दशक में चुनाव हुए और मिलिट्री ने चुनी हुई सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया. क्योंकि आरोप बहुत थे. और ऐसे मौकों पर मिलिट्री को प्रेस कांफ्रेंस करने का मौका नहीं देना चाहिए. प्रधानमंत्री का मर्डर हो गया. फिर पता चला कि सत्ता पलट करने वाले मिलिट्री अफसर नॉर्थ से थे. तो साउथ वाले खफा हो गए. 1967 में जो लड़ाई शुरू हुई उसमें एक तरफ नॉर्थ-वेस्ट के सैनिक थे और दूसरी तरफ साउथ-ईस्ट से. 1970 में लड़ाई रुकी. तब तक युद्ध, भुखमरी, बीमारी से 30 लाख लोग मर चुके थे! विदेशी सरकार से लड़ते वक़्त कानूनी लड़ाई थी और जब अपने लोगों की बारी आई तो गोली से बात हुई. क्योंकि लड़ाई के पीछे फ्रांस, इजिप्ट, रूस, ब्रिटेन, इजराइल सभी खड़े थे. अपने-अपने एजेंडे के साथ.
नाइजीरियन सिविल वॉर का नतीजा
1970 के बाद नाइजीरिया OPEC में शामिल हो गया. उस वक़्त तेल बेचने वाले देश बड़ा पैसा बना रहे थे. इन्होंने भी बनाया. पर और सेक्टरों को विकसित नहीं किया. अब सबको तेल से ही पैसा तो मिलेगा नहीं. तो हुई जंग घमासान. फिर मिलिट्री आ गई 'रक्षा' के लिए. उसके बाद एक दूसरे जनरल आ गए 'सुरक्षा' के लिए. 1990 में मिलिट्री अफसर इब्राहीम बबंगिदा ने खुद को प्रेसिडेंट भी घोषित कर दिया और देश को 'एक सूत्र' में बांधने के लिए आर्गेनाइजेशन ऑफ़ इस्लामिक कांफ्रेंस में शामिल कर दिया. यहीं से शुरुआत हो गई धर्मान्धता की.
देर से ही सही डेमोक्रेसी आई पर अपने साथ एक नासूर लेकर
फिर से वही पहले की माफिक मार-काट चालू. गंदे गिलास में चाय और तख्ता पलट. 1999 में जनरल अबूबकर का हृदय परिवर्तन हुआ और उन्होंने चुनाव करवा विजेता को सत्ता दे दी. हालांकि ये चुनाव निष्पक्ष नहीं था पर कम से कम अगले चुनाव में हटाने का अधिकार था जनता के पास. ऐसे ही प्रोसेस चलता रहा. इस बीच नाइजीरिया ने प्रगति काफी कर ली. फिर 2010 में गुडलक जोनाथन प्रेसिडेंट बने. 2015 में मुहम्मद बुहारी से हर गए और बड़े ही गरिमामयी ढंग से सत्ता ट्रान्सफर कर दी. तो डेमोक्रेसी आ गई नाइजीरिया में.
गुडलक जोनाथन: Reuters
पर इसके साथ ही एक गलती हो गई बहुमत के चक्कर में. नाइजीरिया में 36 राज्य हैं. कई में मुस्लिम बहुसंख्यक हैं, कई में क्रिश्चियन. तो 1999 में नौ मुस्लिम बहुल और तीन मुस्लिम स्वादानुसार राज्यों में शरिया कानून लगा दिया गया. अति उत्साह में. क्योंकि यहां पर सुन्नी इस्लाम मानने वाले ज्यादा थे. एक तरफ देश तेजी से प्रगति कर रहा था. इंडस्ट्री लगने वाली थी. दूसरी तरफ डेढ़ हज़ार साल पहले का कानून थोप दिया गया. दिक्कत होने वाली थी उनको जो मुस्लिम नहीं थे. अब क्रिश्चियन-मुस्लिम दंगे हो गए.
उसके बाद शुरू हुआ तमाशा. 28-30 साल की दो लड़कियों अमीना और साफिया को धर लिया गया. क्योंकि उन्होंने शादी से पहले सेक्स कर बच्चा कर लिया था. उनको पत्थर से मार-मार के जान से मार देने की सजा हुई. इंटरनेशनल लेवल पर बवाल कट गया. तब जा के उनकी सजा माफ़ हुई. पर 2002 में एक आदमी को धार्मिक आधार पर फांसी दे ही दी गई.
फिर ये नासूर देश का सीना चीर के बाहर निकला
बोको हरम ने 2002 से 2009 तक चुपचाप शरिया लाने का काम किया था. पर 2009 में ये लोग हिंसक हो गए. वैसे बोको हरम का मतलब है: वेस्टर्न एजुकेशन हराम है. ठीक है. मत पढ़ो. पर मारना क्या यार? ये लोग हथियार इकट्ठा करने लगे. सरकार ने जांच के आदेश दिए. तो फायरिंग करने लगे. इसमें मिलिट्री अफसर भी इनके साथ शामिल हो गए. पूरी ट्रेनिंग होने लगी. आतंकवादी संगठन की तरह. और जनवरी 2010 में पहला ब्लास्ट हो गया. सितम्बर 2010 में बौची प्रिजन ब्रेक हुआ और 700 बोको हरम मिलिटेंट को छुड़ा लिया गया.
बोको हरम: Reuters
फिर 2011 में पुलिस हेडक्वॉर्टर, UN ऑफिस और क्रिसमस पर ब्लास्ट हुए. 2012 में अबूबकर शेखू बोको हरम का चीफ बना जिसे 2009 में ही मरा मान लिया गया था. इसने अपने लोगों को बड़ा मोटिवेशन दिया. खूब ब्लास्ट हुए. 2012 में इन्होंने स्टूडेंट्स को भी बम से उड़ाना शुरू कर दिया. अब इनको टेररिस्ट संगठन घोषित कर दिया गया था. इन्होंने नाम की लाज रखी और आतंकवादी स्टाइल में लोगों को होस्टेज बनाना और आत्मघाती हमले शुरू कर दिए. 2014 में बोर्नो राज्य के चिबोक के एक स्कूल से 276 लड़कियों को उठा लिया गया. इस चीज ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा. पर कोई फायदा नहीं हुआ. ज्यादातर लड़कियों का कुछ पता ही नहीं चला. यही खबर आती रही कि उनको सेक्स स्लेव बना लिया गया है. या बेच दिया गया है. उसी साल जोस शहर में सीरियल ब्लास्ट कर 118 लोगों की हत्या कर दी गई.
2014 के अंत में बोको हरम ने हमले कर नॉर्थ नाइजीरिया के कई शहरों को कब्जे में कर लिया. फिर सरकार ने चाड, नाइजर और कैमरून देशों के साथ मिल के कई शहरों को छुड़ा भी लिया. पर कई शहरों में बोको हरम का कब्जा मौजूद रहा. 3 जनवरी 2015 को बागा शहर में ब्लास्ट कर दो हज़ार लोगों को मार दिया गया! ये अब तक सबसे बड़ा ब्लास्ट था. इसके बाद अमेरिका ने भी अपने तीन सौ सैनिक भेजे सरकार के सपोर्ट में. सारे लोगों ने मिल के लड़ाई लड़ी. बोको हरम कई जगह हारा. पर ख़त्म नहीं हुआ. क्योंकि समाज के एक वर्ग से इसे मान्यता मिल गई थी. और अब ये आइडिया बन गया था जिसे ख़त्म करना बहुत मुश्किल है.

सरकारी फ़ौज जीतने के बाद: Reuters
नाइजीरिया में अभी कई दिक्कतें चल रही हैं:
1. बोको हरम की पैदा की हुई
नॉर्थ-ईस्ट के 17 शहरों में ये लोग मौजूद हैं. लोगों को बड़ा टॉर्चर करते हैं. खाने-पीने तक की दिक्कत हो गई है. बीस लाख लोग विस्थापित हो गए हैं. जिनके पास खाना, स्कूल और हॉस्पिटल नहीं है. यूएन के मुताबिक 75 हज़ार बच्चे भूख से मरने की कगार पर हैं.2. फ़ौज का कमाल
फ़ौज बोको हरम से लड़ने के नाम पर कई तरह के दाग अपने सेफ पर लगा चुकी है. जिसके बारे में आवाज तो उठी है. पर अभी जांच अच्छे से हो नहीं पाई है.3. दंगे
सालों से चले आ रहे आर्थिक-सामाजिक अंतर अब मुखर हो गए हैं. कई जगह लोग छोटी-छोटी बातों पर हिंसा करने लगते हैं.4. भ्रष्टाचार
इसी के साथ ही मौकापरस्त लोगों की चांदी हो गई है. दबा के नोट छाप रहे हैं. भले देश जाये भाड़ में. इससे जनता में और निराशा पैदा हो रही है.5. फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन
इसकी तो बत्ती लगा दी गई है. पुराने ज़माने के कानून लाये जा रहे हैं लोगों का मुंह बंद करने के लिए. 2014 में कानून बना गे, लेस्बियन सबको गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया. पत्रकारों को डरा-धमका के रखा जा रहा है. ये काम सभी लोग कर रहे हैं.6. नाइजीरिया का तेल चू रहा है
तेल रखा हुआ देश अपनी जरूरत का 50% तेल आयात करता है. क्योंकि देश में रिफाइनरी बहुत कम हैं. फिर बहुत समय से तेल पर बहुत ज्यादा सब्सिडी देने के कारण जनता में बढ़े दाम को लेकर गुस्सा है.मिस लोवेन ने बच्चे को अपनी केयर में रखा था. हॉस्पिटल में भर्ती कर दिया.

मिस लोवेन ने उसी बच्चे की फोटो कुछ सप्ताह बाद जारी की. लोवेन के पास ये बच्चा खुश है. और जादू-टोना नहीं करता! पढ़ाई चल रही है :)

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