सरकार ने इन आरोपों पर जवाब भी दिया है. इंडिया टुडे में छपी रिपोर्ट के अनुसार
“बीजेपी शासित कुछ राज्यों की भी झांकियां इस साल रिजेक्ट की गई हैं. इनमें हरियाणा, उत्तराखंड, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं. यहां पर यह बता देना जरूरी है कि पिछले साल 2019 की परेड में पश्चिम बंगाल की झांकी इसी प्रोसेस के ज़रिए शार्टलिस्ट की गई थी.”कैसे मंगाए जाते हैं झांकियों के प्रस्ताव?
हर साल 26 जनवरी को होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में अलग-अलग राज्य, केंद्र सरकार के विभाग, मंत्रालय, केंद्रशासित प्रदेश अपनी अपनी झांकियों का प्रस्ताव भेजते हैं. किसे? ये सब मैनेज करने का काम मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस यानी रक्षा मंत्रालय का होता है. ये बताया जाता है कि परेड में भाग लेने के लिए झांकी का प्रस्ताव भेजना शुरू किया जा सकता है. हर राज्य/संगठन/विभाग अपनी ओर से एक ही डिजाइन भेज सकता है.
इस साल जो नाम चुने गए हैं, वो ये रहे:
कैसे चुनी जाती हैं ये झाकियां?
रक्षा मंत्रालय एक एग्जीक्यूटिव कमिटी गठित करता है. इसमें कला, संस्कृति और इतिहास के जानकार लोग होते हैं. चूंकि झांकियां चुनना अपने आप में काफी समय लेने वाला प्रोसेस है, इसलिए प्रस्ताव काफी पहले मंगवा लिए जाते हैं.
सबसे पहले तो राज्य/केंद्र शासित प्रदेश/ विभाग/मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर भेजनी होती है रक्षा मंत्रालय को कि वो झांकी में भाग लेना चाहते हैं. इसके साथ एक ढंग का प्रपोजल अटैच किया जाना चाहिए. अपने आइडिया के बारे में एक छोटा-सा लेख भी भेजना होता है.
रक्षा मंत्रालय द्वारा प्रस्ताव मंगवाने के लिए लिखी गई चिट्ठी. ये 28 जून, 2019 को भेजी गई थी. एंट्री भेजने के लिए 31 अगस्त तक का समय दिया गया था. 26 जनवरी, 2020 के लिए तैयारी छह-सात महीने पहले से शुरू हो गई थी. (तस्वीर: रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट)झांकी किसी भी चीज पर आधारित हो सकती है, जो उस ख़ास राज्य/विभाग/क्षेत्र की संस्कृति/इतिहास से जुड़ा हो. भविष्य को लेकर उनका क्या विजन है, इस पर भी झांकी हो सकती है. त्योहार, आर्थिक/सामाजिक उपलब्धियां इत्यादि भी झांकियों के सब्जेक्ट हो सकते हैं.
पहले फेज में झांकियों की ड्राइंग प्रस्तुत की जाती है. एक्सपर्ट कमिटी को. उसके बाद उसमें सुझाव और बदलाव इत्यादि सुझाए जाते हैं. उसके बाद एक थ्री डी मॉडल दिखाना होता है झांकी का. इसे अगर एक्सपर्ट कमिटी पसंद करती है, तभी वो शॉर्टलिस्ट हो पाता है.
झांकी सजाने के लिए एक ट्रेलर और एक ट्रैकर रक्षा मंत्रालय की तरफ से मुफ्त मिलता है. ट्रेलर पर दस से ज्यादा व्यक्ति मौजूद नहीं हो सकते. कला हो या संस्कृति, झांकी में उसके साथ पूरा न्याय होना चाहिए. रंगों और साज-सज्जा का खास खयाल रखा जाना चाहिए. वैसे कलाकार ही इस झांकी से जुड़ सकते हैं, जिन्हें आर्ट की समझ हो.
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