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तेंदुए के 5 जले बच्चों की यह तस्वीर देखकर दिल बैठ जाता है

तीन हफ़्ते की उम्र. जलकर मर गए. उन्होंने खुद को आग नहीं लगाई. जानवरों को आग जलाना नहीं आता.

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ये पांचों तेंदुए शायद जिस गन्ने के खेत में पैदा हुए, उसी में जलकर मर भी गए (फोटो: पंकज खेलकर)
पुणे का अवासारी गांव. एक गन्ने का खेत. तेंदुए के पांच बच्चे (leopard cubs). तीन हफ़्ते की उम्र. जलकर मर गए. उन्होंने खुद को आग नहीं लगाई. जानवरों को आग जलाना नहीं आता. वो किसी और की लगाई आग में जल-झुलसकर मर गए. वो पांचों बच्चे शायद उसी खेत में पैदा हुए थे. कई बार मादा तेंदुआ खेतों में बच्चे देती है जंगल तो मुट्ठीभर बचे हैं. और इसमें जानवरों का कोई दोष नहीं. सारा दोष इंसानों का है. जानवरों को इंसानी आबादी वाले इलाकों में घुसना पड़ता है. कई बार मादा तेंदुआ जब बच्चे देने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं पाती, तो गन्ने के खेतों में छुप जाती है. ये खेत घने होते हैं. इनमें छुपना आसान होता है. बच्चे थोड़े बड़े हो जाते हैं, तो मादा तेंदुआ उन्हें लेकर चली जाती है. पुणे की इस घटना में भी ऐसा ही हुआ था. वो पांचों बच्चे शायद उसी खेत में जन्मे थे. मादा तेंदुआ उस दिन शायद अपने बच्चों को वहां छोड़कर खाने की तलाश में गई थी. उसके पीछे खेत के मालिक ने मज़दूरों को काम पर लगाया. खेत पर एक ओर कूड़ा पड़ा था. उनमें से किसी को वहां एक सांप दिख गया. डरकर उन्होंने वहां आग लगा दी. तेंदुए के पांचों बच्चे आग में फंस गए. भाग नहीं पाए और जलकर मर गए. खेत के सांप तो किसान की मदद करते हैं, उनको जलाया नहीं जाता खेत में सांप होते हैं. सांप नहीं होंगे, तो चूहे खूब हो जाएंगे. वो फसल खोद देंगे. फसल बर्बाद कर देंगे. खेत में केंचुए होते हैं, जिनके दम पर मिट्टी उपजाऊ बनती है. ये एक इकोसिस्टम है. उस कुदरत का सिस्टम, जिसका हम हिस्सा हैं. सिस्टम खत्म, हम भी खत्म. ये टीवी का बिग बॉस वाला ड्रामा शो थोड़े न है कि खिड़की-दरवाज़े बंद करके अपने जैसे कुछ इंसानों के साथ तीन महीने अकेले बिता लो और इनाम मिल जाएगा. असल दुनिया में बिना भरे-पूरे इको-सिस्टम के इंसान भी सर्वाइव नहीं कर सकते. आमतौर पर किसान एकदम जान पर न बन आए, तब तक खेत के सांपों को नहीं मारते. उन्हें भगाने के लिए कोई आग लगा दे और आग इतनी बड़ी हो कि उसमें तेंदुए के 5 बच्चे जलकर मर जाएं, ये विचित्र बात है. उनकी लाश वन विभाग के सुपुर्द कर दी गई है. केस भी दर्ज़ हो गया है. मुझे कई बार समझाया जाता है कि खबर लिखते हुए भावुक न हुआ करूं. लेकिन मैं हो जाती हूं कई बार. जैसे इस मामले में मैं सोच रही हूं. मादा तेंदुआ जब लौटी होगी, तो उसने बच्चों को वहां न देखकर क्या सोचा होगा? क्या उसने दूर कहीं से छुपकर अपने बच्चों की जली हुई लाश देखी होगी? मैंने उन जले बच्चों की तस्वीर देखी है. वो फोटो बहुत वक़्त तक मेरे साथ रहेगी. वो जब-जब याद आएगी, मेरा दिल बैठ जाएगा.
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