1) 2 सितंबर 2009. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी. राज्य के कुरनूल के पास पहाड़ियों में उनका हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. सरकार ने जांच कमेटी गठित की. इस जांच कमेटी ने कई बातें कहीं. इनमें से एक प्रमुख बात ये थी कि ये दुर्घटना पायलट की गलती के वजह से हुई है. जांच कमेटी की रिपोर्ट में इस बात का भी अंदेशा जताया गया कि हेलिकॉप्टर उड़ने लायक़ ही नहीं था. 139 पेज की रिपोर्ट में पायलट कैप्टन एस.के. भाटिया और को-पायलट एम.एस. रेड्डी को इस दुर्घटना के लिए दोषी ठहराया गया. लेकिन दबी ज़ुबान में इस बात का ज़िक्र किया गया है कि मौसम बहुत ख़राब था.

वाईएसआर.
अच्छा मौसम हेलिकॉप्टर की उड़ान के लिए बहुत ज़रूरी मुद्दा है. एयर इंडिया के एक पायलट ने नाम नहीं बताने की शर्त पर हमें बताया,
"हेलिकॉप्टर के लिए लाइन ऑफ़ साइट बहुत ज़रूरी है. अगर मौसम ख़राब होता है और बादल होते हैं तो लाइन ऑफ़ साइट साफ़ नहीं होता है. इसी वजह से पायलट को बाध्य होकर नीचे हेलिकॉप्टर उड़ाते हैं ताकि उन्हें सब कुछ साफ़ नज़र आए. इस वजह से कई ऐक्सिडेंट होते हैं."लेकिन इस जांच की रिपोर्ट में मौसम ख़राब होने के बावजूद ये हेलिकॉप्टर क्यों उड़ाया गया इस पर कुछ भी नहीं कहा गया.
2) बात है 30 सितंबर, 2001 की. नाम माधवराव सिंधिया. भारत के पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री. एक प्राइवेट ऐयरप्लेन में कानपुर जा रहे थे, तब उनका प्लेन क्रैश कर गया. उसमें सवार सभी लोगों की मौत हो गई. इस प्लेन में माधवराव सिंधिया के साथ 4 पत्रकार भी शामिल थे. जांच कमेटी की रिपोर्ट आई. रिपोर्ट ने कहा कि इंजन में आग लगने से प्लेन में आग लग गई. लेकिन ये भी कहा गया कि शायद आग प्लेन में क्रैश होने के बाद आग लगी.
उस दिन भी मौसम काफ़ी ख़राब था. जांच कमेटी की रिपोर्ट में UP के मैनपुरी के तत्कालीन एसएसपी श्रीधर पाठक के हवाले से बताया गया कि प्लेन के क्रैश करने का एक कारण ख़राब मौसम भी था. कमेटी की रिपोर्ट ने ख़राब मौसम के बारे में इससे ज़्यादा कुछ भी नहीं कहा.

माधव राव सिंधिया (फोटो - getty)
इस हादसे और पिछले हादसे में एक बात कॉमन है. ख़राब मौसम. दोनों ही जांच कमेटी की रिपोर्ट में इस पर कोई पुख़्ता बात नहीं कही गई.
3) 3 मार्च, 2002 को लोकसभा अध्यक्ष बालयोगी का हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस हादसे में उनकी मौत हो गई. उस दिन भारी बरिश हो रही थी. जांच कमेटी की रिपोर्ट में इसका ज़िक्र है. लेकिन ज़ोर इस बात पर है कि हेलिकॉप्टर का इंजन फेल हो गया था. इस मामले में भी ख़राब मौसम कॉमन बात है. आप सोच रहे होंगे की ये लेखक ख़राब मौसम पर इतना ज़ोर क्यों दे रहा है. उसकी एक वजह है, कुछ मामलों का ज़िक्र और करने के बाद फिर उस पर भी बात होगी.
4) 30 अप्रैल 2011 को अरुणाचल के तत्कालीन मुख्यमंत्री दोरजी खांडू का हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया था. ये दुर्घटना भारत चीन सीमा के पास हुई थी. उनका शव 5 दिन खोज करने के बाद मिली. इस मामले में कई मीडिया रिपोर्ट्स में एक बात सामने आई कि उस दिन भी मौसम ख़राब था और खांडू ने हेलिकॉप्टर उड़ाने पर ज़ोर दिया था. मीडिया में इस बात का ज़िक्र होने के बावजूद जांच रिपोर्ट में इस पर कोई टिप्पणी नहीं की गई. इस मामले में भी ख़राब मौसम एक कॉमन कॉज की तरह सामने आया.

दोरजी खांडू. (फ़ोटो-आज तक)
5) 9 जुलाई 1994. पंजाब के तत्कालीन राज्यपाल सुरेंद्र नाथ अपने परिवार के नौ सदस्यों के साथ हिमाचल प्रदेश जा रहे थे. वहां उनका प्लेन दुर्घटनाग्रस्त हो गया. सभी लोग मारे गए. तब प्रत्यक्षदर्शियों ने इंडिया टुडे मैगज़ीन
को बताया था कि उस दिन घना कोहरा था. ग्रामीणों के मुताबिक़, विमान पहले पेड़ों से टकराया, फिर एक विस्फोट हुआ और पहाड़ों से टकरा गया. घटना पर जांच कमेटी की लंबी चौड़ी रिपोर्ट
आई. इसमें भी साफ़ कहा गया कि ख़राब मौसम एक बड़ी वजह थी. साथ ही ये भी कहा गया कि पायलट पर समय पर उड़ान को पूरा करने का मानसिक दबाव था. दबाव किस वजह से था इस पर कुछ नहीं कहा गया.
इन घटनाओं को लेकर रिटायर्ड पायलट कैप्टन ए रंगनाथन अंग्रेज़ी अख़बार दी हिंदू से कहते हैं,
"इन घटनाओं को लेकर हुई जांच में छेड़छाड़ की जाती है और समय के साथ लोग इनको भूल जाते हैं. उड़ान से जुड़े निर्णय कॉकपिट का संचालन करने वाले पर छोड़ दिया जाना चाहिए."गौरतलब है कि इस रिपोर्ट में जिन भी मामलों का ज़िक्र यहां हुआ है उनमें और अन्य घटनाओं की जांच कमेटी की रिपोर्ट्स में ख़राब मौसम का ज़िक्र है. लेकिन एक बात का ज़िक्र कहीं भी नहीं है. वो ये कि आख़िर क्यों ख़राब मौसम के बावजूद ये उड़ानें भरी गई थीं. हालांकि सीडीएस बिपिन रावत के साथ हुए हादसे से जुड़ी जांच में इस सवाल का जवाब खोजा जा रहा है.
























