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ये बीजेपी विधायक बड़ा बवाली है

कभी सदन से फेंके गए, कभी किसी को बाजारू कह दिया, कभी किसी पर पिल पड़े और कहा काश मेरे हाथ में बंदूक होती.

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फोटो - thelallantop
बचपन में गांव में एक पोस्टर लगा था. बहुत बड़ा. इतना बड़ा पोस्टर कभी नहीं देखा था. गहरे चटख रंग. एक आदमी बड़ा सा मुंह खोले हंस रहा था. लिखा था जादूगर ओ पी शर्मा. आपके शहर में पहली बार. मैं कभी जा नहीं पाया ओ पी शर्मा के जादू के शो देखने. लेकिन फिर सालों बाद टीवी पर एक बार फिर एक ओ पी शर्मा को देखा. इस बार जादू करते नहीं किसी को दौड़ा के मारते हुए. हमने पूछा कौन है ये तो मालूम चला कि ये बीजेपी के एमएलए हैं. एमएलए यानी विधान सभा के चुनावों में अपने क्षेत्र से चुने हुए विधायक. इनको खंगाला तो मालूम चला कि 2015 के चुनावों में इन्हें 58,124 वोट मिले थे. कुल वोटों का 45% हिस्सा. बहुत बड़ा नंबर होता है. मतलब ये कि इनपर लगभग आधी जनता ने भरोसा किया. थोड़ा और खंगाला तो जो मिला वो गजब का बलंडर. इनकी हरकतें एकदम वैसी जैसे बिग बॉस में सालों पहले केआरके को देखा था. तमीज़ शब्द से काफी लम्बी दूरी बनाई हुई थी इन्होनें.
जो बात सबसे पहले देखने को मिली वो थी एक फोटो. इस फोटो में इन्हें सदन के मार्शल अपने कंधे पे ऐसे उठाये जा रहे थे जैसे हमने चार लोगों को कंधे पे लाश ले जाते देखा है. अंतर बस इतना था कि ये हाथ-पांव फेंक रहे थे. वैसे जैसे कोई बच्चा गुब्बारे वाले की दुकान पे गुब्बारा लेने की ज़िद कर बैठे और उसके पापा उसे घसीटते हुए घर लेके चले जायें.
हुआ ये था कि दिल्ली में केजरीवाल और नजीब जंग के बीच में सास बहू की वैसी जंग चल रही थी जैसी कभी एकता कपूर के सास-बहू वाले सीरियल में देखने को मिलती थी. जो जंग साहब कहते थे, उसपे केजरीवाल मुंह फुला लेते थे. जो केजरीवाल कहते थे उसपे नजीब जंग खार खाते थे. इसलिए केजरीवाल ने इस मुद्दे से निपटने के लिए एक इमरजेंसी सेशन बुलाकर सदन में डिस्कशन किया जा रहा था कि लंच के बाद शर्मा जी सनक पड़े.
आप के 67 एमएलए के मुकाबले भाजपा के 3 एमएलए वैसे ही लग रहे थे जैसे अंडरटेकर के सामने शिनचैन बैठा हो. लेकिन शर्मा जी ने अचानक हल्ला काटना शुरू दिया. कहने लगे कि स्पीकर साहब आम आदमी पार्टी का साथ दे रहे हैं. इतना तक कह डाला कि स्पीकर राम निवास गोयल को कही हुई बातों के लिए माफ़ी मांगनी चाहिए और कुर्सी छोड़ देनी चाहिए. हो हल्ला इतना बढ़ गया कि लगने लगा कि दो दिन के इमरजेंसी सेशन में कुछ भी न हो पायेगा. स्पीकर का पारा चढ़ा और उन्होनें इनकी पतंग सद्दी से काट दी. इनको सदन के बाहर भिजवा दिया गया. ये जाने को नहीं राज़ी हुए तो मार्शल बुलाये गए. हमारे गांव में मार्शल गाड़ी बुला के उसपे सब्जी लाद दी जाती थी जो मंडी जाती थी. यहाँ मार्शल पे लदे शर्मा जी चले जा रहे थे.
BJP MLA OP Sharma being carried away
BJP MLA OP Sharma being carried away



फिर एक ऐसी बात जो शर्मनाक थी. इतनी कि किसी विधायक से उम्मीद नहीं की जाती. हांलांकि अपने देश में ऐसा मसाला विधायकों के पास से सबसे ज्यादा आता है. हुआ ये कि सदन की लल्लो-चप्पो के बीच ओ पी शर्मा फिर बिफर पड़े. बात यहाँ से शुरू हुई थी कि आप विधायक अलका लाम्बा ने ओ पी शर्मा के किसी रेस्टोरेंट पर छापा पड़वा दिया था. वहीँ छापे के दौरान अल्का लाम्बा पर किसी ने पत्थर फेंक के दे मारा. खोपड़ी खुल गयी. खून बह निकला. आप कार्यकर्ता रेस्टोरेंट में घुस पड़े. गजब भसड़ हुई. ये बात थी 9 अगस्त 2015 की.  तबसे इन दोनों के बीच टेंशन वैसी ही थी जैसे शक्तिमान और डॉक्टर जैकाल के बीच.
Alka Lamba after being attacked
Alka Lamba after being attacked

फिर आया महीना नवम्बर का. अल्का लाम्बा सहित तमाम आप विधायक और 3 बीजेपी वाले आपस में पिल पड़े. तू-तू मैं-मैं का दौर चल पड़ा. न मालूम किस मनहूस घड़ी में शर्मा जी ने अल्का लाम्बा को 'बाजारू औरत कह डाला'. कहने लगे कि ये रात को सडकों पर घूमने वाली औरत है. साफ़ शब्द में उन्होनें अल्का लाम्बा के कैरेक्टर पे कीचड उछालने की घटिया कोशिश कर दी. बस, फिर क्या था. स्पीकर साहब ने फिर से माइक ऑन किया और शर्मा जी को मार्शल में लदवा कर सदन के बाहर अनलोड करवा दिया.
BJP MLA OP Sharma being thrown out of the house
BJP MLA OP Sharma being thrown out of the house



नया मामला कल ही का है. वही जिसने हमको ये सब खंगालने पर मजबूर किया. जवाहर लाल नेहरु यूनिवर्सिटी यानी जेएनयू में चल रहे बवाल में जेएनयू स्टूडेंट यूनियन के प्रेसिडेंट कन्हैया को गिरफ्तार कर लिया गया था. कल उसकी कोर्ट में पेशी थी. वहां तमाम मीडिया वाले और स्टूडेंट्स सुनवाई को देखने के लिए इकट्ठे थे. न मालूम ऐसा क्या बम फूटा कि वकीलों का एक बड़ा ग्रुप मीडिया वालों पे फायर हो पड़ा. अरुण जेटली की सुनवाई जिस कमरे में चल रही थी उसी के बगल वाले कमरे में वकीलों ने मीडिया के रिपोर्टरों को धुलना शुरू कर दिया.
बाहर सड़क पर सीपीआई के लीडर अमीक जामई कन्हैया के सपोर्ट में नारे लगा रहे थे. शर्मा जी ने आव देखा न ताव, और अमीक को दौड़ा लिया. उनके पीछे रिपोर्टर भी दौड़ पड़े. अमीक को सड़क पर ही लिटा दिया और हत्था-पैय्यां शुरू. कुछ एक गालियां भी सुनाई पड़ रही थीं. शर्मा जी का कार्य प्रगति पर था. एक पुलिस वाले ने आकर सब कुछ कंट्रोल करने की कोशिश की मगर शर्मा जी वो हैं जिन्हें सदन से बाहर करने के लिए 4-4 मार्शल बुलाने पड़ते हैं. फिर एक अकेला पुलिस वाला क्या करता? अमीक पिटते रहे. थोड़ी देर बाद लोगों ने पकड़ के शर्मा जी को अलग हटाया. ओ पी शर्मा कुछ देर बाद ये कहते सुने गए कि 'अगर मेरे हाथ में बन्दूक होती तो मैं उसे गोली मार देता.'
OP Sharma seen beating Ameeque Jamei
OP Sharma seen beating Ameeque Jamei



शर्मा जी के पास बन्दूक होती तो वो क्या करते ये तो नहीं मालूम लेकिन बिना बन्दूक वो इतना कुछ कर रहे हैं कि ऊपरवाले से अर्जी है कि बन्दूक क्या एक तमंचा भी उनके आस पास ना फटके. वैसे जैसी हरकतें हैं उस हिसाब से मेरी मानें तो बीजेपी कश्मीर मुद्दा ओ पी शर्मा से 2 मिनट में हल करवा सकती है.

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