लेकिन मध्यप्रदेश भाजपा में पार्टी का 'डिफरेंस' बड़ी तेज़ी से ख़त्म होते दिख रहा है.
मोदी कांग्रेस के युवराज को कोसते रहे, भाजपा में ये कुंवर सा आ गये
जो भाजपा दिल्ली में 'युवराज' नहीं देखना चाहती, उसी के मध्यप्रदेश में 'कुंवर' का उदय होता दिख रहा है.
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फोटो - thelallantop
भारतीय जनता पार्टी कहते नहीं थकती कि वो 'पार्टी विद अ डिफरेंस' है. वो ऐसे काम नहीं करती जो बाकी पार्टियां करती हैं. कांग्रेस को गरियाते नहीं थकती कि पूरी पार्टी की धुरी एक खानदान है, जो 10 जनपथ पर रहता है. कुल आठ दिन पहले ही प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी रैली में परिवारवाद पर निशाना साधा था. युवराज, दामाद जैसे शब्द वो जब-तब इस्तेमाल करते ही रहते हैं.
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जो भाजपा दिल्ली में 'युवराज' नहीं देखना चाहती, उसी के मध्यप्रदेश में 'कुंवर' का उदय शुरू होता दिख रहा है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय की राजनीति में आमद की ज़मीन धीरे-धीरे तैयार की जा रही है. रविवार को कार्तिकेय को बतौर चीफ गेस्ट बुदनी में एक इंटर स्कूल स्पोर्ट्स मीट में बुलाया गया था. लेकिन जिस तरह से पूरा वाकया घटा, वो सबने देखा.
साधारण आमद, असाधारण कार्यक्रम
एक स्पोर्ट्स मीट में मुख्यमंत्री के बेटे का जाना आम बात हो सकती है, लेकिन बुदनी वाला कार्यक्रम आम नहीं था. दशहरा ग्राउंड के मंच से कार्तिकेय जो बोले, उसे सुनने के लिए आसपास के सभी स्कूलों के बच्चों को खासतौर पर बुलाया गया था. स्पोर्ट्स मीट में भी 150 स्कूलों को न्योता था. जो कार्ड इस कार्यक्रम के लिए छपवाए गए थे, उन पर कार्तिकेय का नाम 'कुंवर कार्तिकेय सिंह चौहान' लिखा था. मध्यप्रदेश में राजपूत समाज के लोग नाम के आगे 'कुंवर' लगाते हैं, लेकिन शिवराज सिंह इस समाज से नहीं आते. ऐसे में नाम के आगे लगे 'कुंवर' ने बाकायदा ध्यान खींचा. इसलिए कार्ड पढ़ने वालों ने 'कुंवर' का दूसरा मतलब लगाया - राजकुमार. कार्तिकेय के नाम के साथ उनकी मां और उनके सीएम पिता का नाम भी लिखा था.
कार्यक्रम का निमंत्रण पत्र
कार्तिकेय का इस तरह 'क्षेत्र में नज़र आना' नया नहीं है. वो बमुश्किल 18 बरस के थे जब से मुंबई के सिम्बायोसिस में अपनी कानून की पढ़ाई से वक्त निकाल कर 'अपने लोगों' के बीच 'नज़र' आ रहे हैं. जहां शिरकत की, मध्यप्रदेश के प्रथम परिवार के नुमाइंदे की हैसियत से भाषण भी दिया. और तालियां बजाने के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं की फ़ौज हमेशा मौजूद रही. अब कार्तिकेय की डिग्री पूरी हो गई है. उनके पास वक़्त की कमी नहीं है और इसी से कईयों को अपना आने वाला वक़्त खराब नज़र आने लगा है.

'कुंवर' कार्तिकेय बाएं से चौथे
कार्तिकेय ने हमेशा राजनीति से दूर रहने की बात की है. लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर ही सही जिस तरह, एक बड़े समारोह में कार्तिकेय को चीफ गेस्ट बनाया गया, वो भाजपा के लोकल नेताओं के गले नहीं उतरा और सभी ने अपनी हैरानी (नाराज़गी) छुपाई भी नहीं. कार्तिकेय 'कुंवर' भले हों, लेकिन आगे गए तो मौजूदा लोगों की गर्दन पर पैर रख कर ही आगे जाएंगे ये सभी को पता है.
लेकिन 'शिव' के क्रोध का भागी कोई नहीं बनना चाहता इसलिए सब चुप हैं, और मुस्कुरा भी रहे हैं.
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह संघ से आते हैं. काडर-कार्यकर्ता वाली ज़मीन से. लेकिन लगातार 'बड़े नेता' बनते जा रहे हैं. उनके ग्लैमर को टक्कर दे सकने वाले एकमात्र नेता कैलाश विजयवर्गीय को दिल्ली भेज दिए जाने के बाद से, प्रदेश भाजपा में शिवराज का एकछत्र राज है. सरकार में उनकी चलती है और जनता उन्हें पसंद करती है. मज़बूत पकड़. वो सब-कुछ जो भाजपा 'नहीं करती', मध्यप्रदेश में होता दिख रहा है.आगे क्या होता है, वक़्त बताएगा. लेकिन जो भी होगा, दिलचस्प होगा. ये तय है.
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