हम अक्सर सोचते हैं कि गायें सिर्फ चरती रहती हैं. दूध देती हैं और ज्यादा सोच-विचार नहीं करतीं. पर जानवरों के बारे में हमारी सोच कभी-कभी गलत साबित हो ही जाती है. ऑस्ट्रिया में एक पालतू गाय वेरोनिका (Veronika) ने इसी धारणा को चुनौती दे दी है. उसने ऐसा कुछ किया है जो अब तक सिर्फ चिंपैंजी जैसी बुद्धिमान प्रजातियों में ही देखा गया था. वो एक टूल (उपकरण) को लचीले ढंग से इस्तेमाल कर रही है. ये पहली बार है जब किसी गाय में ऐसा फ्लेक्सिबल टूल यूज साइंटिफिक रूप से दर्ज किया गया है.
गायों की ‘आइंस्टाइन’ वेरोनिका ने साइंटिस्टों को चौंकाया, हजारों साल में पहली बार टूल यूज दिखाया
ऑस्ट्रिया की पालतू गाय वेरोनिका ने साबित किया कि गायें भी बुद्धिमान होती हैं. उसने लचीले उपकरण का बहुउद्देश्यीय इस्तेमाल करके टूल यूज की क्षमता दिखाई, जो अब तक केवल चिंपैंजी जैसी प्रजातियों में देखा गया था. ये खोज पशुपालन और जानवरों की समझदारी पर नए सवाल खड़े करती है.


ये खोज न सिर्फ गायों की समझदारी पर नई रोशनी डालती है, बल्कि पशुपालन और जानवरों की बुद्धिमत्ता पर भी बड़े सवाल खड़े करती है. कौन है वेरोनिका और कहां रहती है? साइंटिस्ट इस गाय के बारे में क्या कह रहे हैं, ये सब विस्तार से जानते हैं.
वेरोनिका का परिचयवेरोनिका एक स्विस ब्राउन (Swiss Brown) नस्ल की गाय है. जो अब 13 साल की हो चुकी है. वो ऑस्ट्रिया के छोटे से शहर नॉच इम गाइलताल (Nötsch im Gailtal) में एक ऑर्गेनिक फार्मर विटगर विगेले (Witgar Wiegele) के घर का पालतू जानवर है.
साइंटिफिक अमेरिकन से जुड़े केट वोंग की रिपोर्ट के मुताबिक विगेले ने बताया कि कई साल पहले वेरोनिका को कीड़ों के काटने से होने वाली खुजली हुई थी. जिसे मिटाने के लिए वो लकड़ी की टहनियां उठाकर खुद को खुजलाने लगी थी. धीरे-धीरे उसने ये कला सीख ली और अब वो एक डेक ब्रश (deck brush, यानी झाड़ू जैसा ब्रश, जिसके एक तरफ बाल होते हैं और दूसरी तरफ चिकना हैंडल) का इस्तेमाल करती है.
वेरोनिका को घरेलू जानवर की तरह रखा जाता है. वो खुली जगह में घूमती है, लोगों से जुड़ती है, और विगेले के साथ उसकी गहरी बॉन्डिंग है. वो कारों को देखकर आवाज लगाती है, क्योंकि उसे लगता है कि विगेले उस कार में आ रहे हैं. साइंटिस्ट का मानना है कि इस माहौल में वेरोनिका के पास खेलने, एक्सप्लोर करने और ऑब्जेक्ट्स से इंटरैक्ट करने की आजादी है. शायद इसी वजह से उसमें ऐसा व्यवहार देखने को मिल रहा है.
वेरोनिका ने टूल कैसे इस्तेमाल किया?वेरोनिका ब्रश को सिर्फ रगड़ने के लिए नहीं इस्तेमाल करती, बल्कि उसे multi purpose टूल की तरह यूज करती है. वो अपने मुंह से ब्रश को पकड़ती है, जीभ से उठाती है, दांतों से मजबूती से पकड़ती है और फिर शरीर के पीछे वाले हिस्से को खुजलाती है. अब आप सोचेंगे कि इसमें क्या खास है!
पर यही खास है. वो ब्रश के दोनों सिरों का अलग-अलग इस्तेमाल करती है. माने ब्रिसल वाले सिरा (बालों वाला हिस्सा) से वो शरी के ऊपरी हिस्से जैसे कमर, रंप (पीठ का मोटा हिस्सा) और लोइन (कमर के नीचे) पर जोर से रगड़ती है. क्योंकि इस हिस्से की त्वचा मोटी होती है.
वहीं, चिकना हैंडल वाला सिरा (स्टिक वाला हिस्सा) वो निचले हिस्से जैसे पेट और स्तन पर खुजलाने के लिए यूज करती है. क्योंकि वहां त्वचा नाजुक होती है.
वो ये तय करती है कि किस हिस्से पर कितना जोर लगाना है. वैज्ञानिकों ने दर्जनों ट्रायल्स में देखा कि वो रैंडम तरीके से ब्रश चुनती है. लेकिन जरूरत के हिसाब से सिरा बदलती है. ये व्यवहार एंटिसिपेशन (पूर्वानुमान) दिखाता है. यानी, वो जानती है कि ब्रश का कौन सा हिस्सा किस काम आएगा.
वैज्ञानिक इसे फ्लेक्सिबल टूल यूज कहते हैं. माने, एक ही ऑब्जेक्ट को अलग-अलग गुणों के आधार पर अलग कामों के लिए इस्तेमाल करना.
वैज्ञानिकों ने क्या किया?इसकी खोज वियना यूनिवर्सिटी ऑफ वेटरनरी मेडिसिन की कॉग्निटिव बायोलॉजिस्ट एलिस ऑयर्सपेर्ग (Alice Auersperg) और उनके सहयोगी एंटोनियो जे ओसुना-मास्कारो (Antonio J. Osuna-Mascaró) ने की. एलिस को जब विगेले का वीडियो दिखा, तो उन्हें तुरंत लगा कि ये संयोग नहीं, बल्कि असली टूल यूज है.
उन्होंने गर्मियों में वेरोनिका के साथ समय बिताया, वीडियो रिकॉर्ड किए और 76 इंस्टेंस में व्यवहार का अध्ययन किया. रिजल्ट्स 19 जनवरी 2026 को जर्नल करंट बायोलॉजी में प्रकाशित हुए. ओसुना-मास्कारो कहते हैं,
दूसरे जानवरों से तुलना“हम नहीं मानते कि वेरोनिका गायों में आइंस्टीन है, लेकिन ये दिखाता है कि खास परिस्थितियां मिलने पर गायें भी जटिल व्यवहार दिखा सकती हैं.”
फ्लेक्सिबल और मल्टी-पर्पज टूल यूज बहुत दुर्लभ है. चिंपैंजी ही ऐसे हैं जो नियमित रूप से एक टूल के अलग-अलग हिस्सों को अलग कामों के लिए इस्तेमाल करते हैं. कौवे (corvids) भी टूल यूज करते हैं, लेकिन गाय जैसी बड़ी प्रजाति में ये पहली बार देखा गया है.
प्राइमेटोलॉजिस्ट जिल प्रुएट्ज (जिनके पास खुद दो पालतू गायें हैं) बताते हैं,
इस खोज का मतलब क्या है?“ये शानदार है! वेरोनिका की सटीकता और सिरा बदलने की क्षमता कमाल की है.”
ये स्टोरी बताती है कि हमने पशुधन (livestock) की बुद्धिमत्ता को बहुत कम आंका है. दुनिया में लगभग 150 करोड़ गायें हैं, और इंसान उनके साथ कम से कम 10,000 साल से रह रहे हैं. फिर भी हम एक्सोटिक जानवरों (जैसे दूर द्वीपों के पक्षी) के बारे में ज्यादा जानते हैं, और गायों के बारे में कम.
ओसुना-मास्कारो कहते हैं,
“ये चौंकाने वाला है कि हम अब जाकर ये देख पा रहे हैं.”
ज्यादातर गायें फैक्ट्री फार्म्स में रहती हैं, जहां कोई ऑब्जेक्ट नहीं होता. ना ही खेलने की कोई चीज होती है. अगर वेरोनिका जैसी आजादी मिले, तो शायद कई गायें ऐसे व्यवहार दिखाएं. ये पशु कल्याण (animal welfare) के लिए बड़ा संदेश है. गायों को अगर खिलौने, वैसा माहौल और इंटरैक्शन दिया जाए तो उनकी असली क्षमता सामने लाई जा सकती है.
वेरोनिका की कहानी सिर्फ एक गाय की नहीं, बल्कि हमारी सोच की है. हमने गायों के मेंटल लेवल को उस तरह से नहीं देखा. पर वो भी समस्या सॉल्व कर सकती हैं, टूल यूज कर सकती हैं और सीख सकती हैं. ये खोज हमें याद दिलाती है कि बुद्धिमत्ता हर प्रजाति में अलग-अलग रूप में हो सकती है, बस उसे देखने और समझने की जरूरत है. अगर हम पशुओं को बेहतर जीवन दें, तो शायद और भी कई चौंकाने वाले तथ्य हमारे सामने आ सकते हैं.
वीडियो: आसान भाषा में: कहानी CAG की जिसने कई सरकारें हिला दीं


















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