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वायनाड भूस्खलन के चलते 320 की मौत, बचाव कार्य अंतिम चरण में, मगर वजह क्या है कि हर साल बाढ़ आती है?

बताया जा रहा है क़रीब 10 साल पहले इलाक़े को इको-सेंसिटिव ज़ोन (Eco sensitive zone) क़रार दिया गया था. मगर जिस एक्सपर्ट कमेटी ने ऐसा किया था, उनके सुझावों को लागू नहीं किया गया.

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साल 2019 में भी ऐसा ही डीप क्लाउड सिस्टम बना था (Image: PTI)

पिछले हफ़्ते, भारी बारिश के चलते केरल के वायनाड में कई भूस्खलन (Wayanad landslide) हुए. जान-माल का भारी नुक़सान हुआ. मरने वालों की संख्या अब 320 के पार हो चुकी है. हज़ारों लोग बेघर हो गए हैं. गांव के गांव बह गए हैं. राहत कार्य अपने अंतिम चरण की तरफ़ बढ़ रहा है. वहीं दूसरी तरफ, इसके पीछे की वजह समझने की भी कोशिशें हो रही हैं. बताया जा रहा है कि अरब सागर के गर्म होने की वजह से इतनी भारी बारिश हुई है. एक और वजह ये बताई जा रही है कि दस साल पहले ऐसी अनहोनी से निपटने के लिए जो कमेटी बनी थी, उसके सुझावों पर अमल न किया गया. इसीलिए आज समझेंगे - 

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केरल की हालत इतनी बुरी कैसे?

केरल में जितना नुक़सान हुआ है, ये कोई पहली बार नहीं. केरल ऐसी आपदाओं के प्रति कितना संवेदनशील है, इसके उदाहरण हाल में ही मिल जाएंगे.

  • 2018 की बाढ़. एक सदी में आई सबसे भयानक बाढ़. कुल 483 लोगों की मौत हुई और बहुत बुरी तरह से डैमैज हुआ. 
  • 2019 में वायनाड के ही पुथुमाला में भूस्खलन आया. 17 लोगों की जान चली गई. 
  • 2021 में भूस्खलन और भारी बारिश के कारण 53 लोगों की मौत हुई. 
  • और, 2022 में भूस्खलन और बाढ़ के कारण 18 लोगों की. संपत्ति को नुक़सान हुआ, सो अलग. 

2015 और 2022 के बीच भारत में सबसे ज़्यादा भूस्खलन की घटनाएं केरल में ही दर्ज की गई हैं. कुल 3,782 भूस्खलनों में से लगभग 2,239 (59.2%) ‘गॉड्ज़ ओन कंट्री’ में दर्ज किए गए.

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केरल में कुल 14 ज़िले हैं. द वीक की रिपोर्ट के मुताबिक़, इनमें से 13 भूस्खलन के लिए अतिसंवेदनशील हैं. केवल तटीय ज़िला अलप्पुझा एकमात्र अपवाद है. केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (KSDMA) ने ख़ुद माना है कि 1,848 वर्ग किलोमीटर इलाक़े में भूस्खलन का जोख़िम उच्चतम है.

इसकी वजह क्या है? मुख्यतः बारिश. बेलगाम या अप्रत्याशित बारिश. फिर सवाल है कि -

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इतनी ज़्यादा बारिश के पीछे की वजह क्या?

अरब सागर में डीप क्लाउड सिस्टम्स (Deep cloud system). बादलों का एक तरह का तंत्र, जिसमें कई बड़े बादल जमा होते हैं और इसकी वजह से भारी बारिश होती है. ये एक प्रमुख वजह बताई जा रही है.

न्यूज़ एजेंसी PTI से बातचीत में कोचीन विज्ञान व प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CUSAT) के डॉयरेक्टर एस अभिलाष बताते हैं कि कन्नूर, वायनाड, कासरगोड, कालीकट और मलप्पुरम ज़िलों में पिछले दो हफ़्ते से भारी बारिश हुई है. इसकी वजह है, कोंकण इलाक़े का ऐक्टिव मॉनसून. बकौल अभिलाष,

दो हफ़्तों की बारिश के बाद मिट्टी सैचुरेट हो गई थी (माने जितना पानी सोख सकती थी, सोख चुकी थी). ऐसे में फिर सोमवार, 29 जुलाई को अरब सागर के तट के पास ‘डीप मीजोस्केल क्लाउड सिस्टम’ (deep mesoscale cloud system) बना.

इस सिस्टम में कई बिजली वाले तूफ़ान इकट्ठा हो जाते हैं. इनकी वजह से वायनाड, कालीकट, मल्लापुरम और कुन्नूर में भीषण बारिश हुई. नतीजतन मिट्टी और पानी नहीं रोक पाई और कई जगहों पर भूस्खलन हुए.

उन्होंने ये भी बताया कि साल 2019 में जब केरल में बाढ़ आई थी, तब भी ऐसे ही डीप क्लाउड सिस्टम देखे गए थे. वैज्ञानिकों ने दक्षिण-पूर्व अरब सागर में ऐसे भारी-भरकम बादलों के बनने का ट्रेंड देखा है. यही सिस्टम कभी-कभार ज़मीन की तरफ चले आते हैं, जैसा कि साल 2019 में भी हुआ था.

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हालांकि, कुछ रिसर्च में दक्षिण-पूर्व अरब सागर के गर्म होने की बातें सामने आई हैं. इसकी वजह से केरल समेत आस-पास का वायुमंडल तापमान अस्थिर हो रहा है. अस्थिरता के चलते ज़्यादा बड़े बादलों का सिस्टम बन रहा है.

इसके पीछे वजह क्या? क्लाइमेट चेंज. पहले इस तरह की भारी बारिश उत्तरी कोंकण बेलट में आम थी. क्लाइमेट चेंज के साथ यह डीप क्लाउड और बारिश वाली बेल्ट दक्षिण की तरफ़ बढ़ रही है. जानकारों का कहना है कि यही ऐसी भयानक बारिश के पीछे मुख्य वजह है.

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1990 के बाद से अरब सागर का तापमान बढ़ने की तेजी (Data: ResearchGate)
अरब सागर का तापमान और चक्रवाती तूफान 

अरब सागर के तापमान में हो रहे बदलावों को चक्रवाती तूफ़ानों से जोड़कर भी देखा जाता है. दरिया का तापमान गर्म होने के चलते पास के इलाक़ों में मौसम बदलने की बातें कही जा रही हैं. इसके लिए हाल के सालों में अरब सागर के पास आए चक्रवाती तूफ़ानों का एक ट्रेंड दखते हैं. 

तीव्रतासाइक्लोन का नामकब आया?
सुपर चक्रवाती तूफान (SuCS)GONU1–7 जून, 2007
सुपर चक्रवाती तूफान (SuCS)KYARR24 अक्टूबर – 3 नवम्बर, 2019
अत्यधिक भीषण चक्रवाती तूफान(ESCS)ARB 01221–28 मई, 2001
अत्यधिक भीषण चक्रवाती तूफान(ESCS)NILOFER23–31 अक्टूबर, 2014
ESCSCHAPALA28 अक्टूबर–4 नवम्बर, 2015
ESCSMEGH4–10 नवम्बर, 2015
ESCSTAUKTE14–19 मई, 2021
काफ़ी तेज चक्रवाती तूफान (VSCS)PHET31 मई–7 जून, 2010
भीषण चक्रवाती तूफान (SCS)NISARGA1–4 जून, 2020


 

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अलग-अलग सालों में अरब सागर में तापमान का ट्रेंड. नीला कम ताप, लाल ज्यादा ताप

वहीं, अन्य वैज्ञानिक केरल लैंडस्लाइड के पीछे की सभी वजहों को समझने में और वक़्त लगाने की ज़रूरत बताते हैं. 

भूस्खलन क्यों होता है?

खड़ी ढलान वाले पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का जोख़िम रहता है. बड़ी-बड़ी चट्टानें, बोल्डर, ढीली मिट्टी और मलबा ढलानों और पहाड़ियों से लुढ़कते हुए बहुत तेज़ी से नीचे गिरता है. अपने साथ ज़मीन, जंगल, इमारतों बहा ले जाता है.

दो मुख्य कारण हैं:

  • मिट्टी की टोपोग्राफ़ी, चट्टानों और ढलान के कोण. ऐसे प्राकृतिक बने हुए कारण होते हैं. इस वजह से कहीं का जोख़िम कम, कहीं ज़्यादा हो सकता है.
  • तेज़ बारिश और इंसानी करतूतों की वजह से भूस्खलन का जोख़िम बढ़ता है.

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इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक़, उत्तरी केरल के ज्यादातर हिस्सों में लैंडस्लाइड का खतरा रहता है. ऐसी ही वजहों के चलते वायनाड़िजिले की मेप्पडी पंचायत, को करीब 10 साल पहले इक- सेंसटिव ज़ोन बताया गया था. ऐसा दो एक्सपर्ट कमिटीज़ ने किया था. इसी इलाक़े में ये भीषण लैंडस्लाइड आई हैं. 

वहीं, डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट कहती है कि जो भी हालिया निर्माण हुए हैं, उसमें संवेदनशील पारिस्थितिकी (Fragile ecosystem) का ध्यान नहीं रखा गया है. निर्माण के लिए घाटियों के समतल किया जा रहा है, पहाड़ी इलाकों में निर्माण कार्य, ज्यादा सड़कें और एक ही तरह की खेती की जा रही है. इन वजहों से ख़तरा बढ़ा है. 

अन्य एक्सपर्ट्स भी यहां जंगलों के काटे जाने और मिट्टी को बांधकर रखने की ज़मीन की क्षमता कम करने पर चिंता जताते हैं.

 
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Soil Piping (Image: researchGate)
सॉयल पाइपिंग 

डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, चार साल पहले पुथुमाला भूस्खलन की वजह से ‘सॉयल पाइपिंग’ (Soil Piping) की बात सामने आई थी. इसमें पानी के जरिए जमीन के नीचे बड़ी सुरंगें सी बन जाती हैं. ये खाली जगह हवा से भरी रहती हैं. इस वजह से अक्सर भूस्खलन और धंसाव होते हैं.

पुथुमाला, 30 जुलाई को हुए भूस्खलन की जगह से महद दो किलोमीटर दूर है. कहा जा रहा है कि मुंदक्कई और चूरलमाला के भूस्खलन में सॉयल पाइपिंग भी एक वजह हो सकती है.

वीडियो: वायनाड में बारिश, लैंडस्लाइड, क्या है कारण?

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