The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • leh airport spicejet and other flights cancelled due to high temperature explained

लेह में इतना ज्यादा तापमान कि हवाई जहाज नहीं उतर पा रहे, ऐसा क्यों हो रहा है?

लेह जितनी ऊंचाई पर A320 Neo एयरप्लेन के उड़ान भर सकने के लिए, 33 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान की जरूरत होती है. इससे ज्यादा तापमान पर यहां, इस एयरप्लेन की उड़ाने प्रभावित हो सकती हैं. इसकी वजह भी है.

Advertisement
pic
31 जुलाई 2024 (अपडेटेड: 31 जुलाई 2024, 11:12 AM IST)
leh airport spice jet
प्लेन पर चार तरह की फोर्स लगती हैं (सांकेतिक तस्वीर, X)
Quick AI Highlights
Click here to view more

हाल के दिनों में लेह एयरपोर्ट पर कुछ फ्लाइट रद्द किए जाने की बात कही जा रही है. यहां घरेलू एयरलाइंस के द्वारा A320 और B737 प्लेन चलाए जाते हैं. बताया जा रहा है, ज्यादा तापमान होने के चलते उड़ाने प्रभावित हुई हैं. पर इतनी ठंडी जगह पर, तापमान का प्लेन के उड़ने से क्या लेना देना? समझते हैं. (Leh airport flights canceled due to high temperature)

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, लेह की कितनी फ्लाइट रद्द की गई हैं, यह जानकारी अभी नहीं मिल पाई है. इस बारे में इंडिगो एयरलाइंस के स्पोक्सपर्सन ने भी बताया, 

ज्यादा तापमान के चलते, लेह आने-जाने वाली IndiGo फ्लाइट्स की उड़ानें प्रभावित हुई हैं. जो कि एयरलाइंस के नियंत्रण से बाहर है. 

एयर बस फ्लाइट के सीनियर पायलट ने भी PTI को इस बारे में जानकारी दी है. बताया कि लेह जितनी ऊंचाई पर A320 Neo एयरप्लेन के उड़ान भर सकने के लिए, 33 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान की जरूरत होती है. इससे ज्यादा तापमान पर यहां, इस एयरप्लेन की उड़ाने प्रभावित होती हैं.

वहीं स्पाइस जेट के एक अधिकारी के मुताबिक, लेह एयरपोर्ट पर बोइंग 737 के उड़ान भरने के लिए 32 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान की जरूरत पड़ती है. ये भी बताया जा रहा है कि प्लेन के उड़ान भरने के लिए, अधिकतम तापमान कई बातों पर निर्भर करता है. जैसे उड़ान किस एयरपोर्ट पर भरी जा रही है? वह कहां मौजूद है? कितनी ऊंचाई पर है? 

बता दें, लेह का कुशोक बकुला रिंपोचे विमानपत्तन, औसत समुद्रतल से 10,682 फुट की ऊंचाई पर मौजूद है. जो दुनिया के सबसे ऊंचाई पर स्थित हवाई अड्डों में से एक है. यहां पर उड़ान भरने के लिए पायलट्स को खास ट्रेनिंग दी जाती है. वहीं हाल के दिनों में यहां का तापमान 30 डिग्री से ज्यादा पहुंच रहा है, जिसकी वजह से कई उड़ानों पर असर पड़ा है. 

ये  भी पढ़ें: Marvel वाले Deadpool जैसों से भरी पड़ी है ये दुनिया, असल दुनिया के इन जीवों की सुपर पावर जान लीजिए

पर ज्यादा तापमान पर क्या होता है? 

पहले समझते हैं कि प्लेन कैसे उड़ता है. कोई भी विमान जब उड़ान भरता है, तो उस पर चार फोर्स लगते हैं. थ्रस्ट, ग्रैविटी, ड्रैग और लिफ्ट. 

थ्रस्ट (Thrust): एयरप्लेन का पंखा चलने से वो आगे की तरफ बढ़ता है. ऐसा थ्रस्ट की वजह से होता है.

ग्रैविटी (Gravity): ग्रैविटी यानी गुरुत्वाकर्षण बल, जो प्लेन के वजन की वजह से उस पर लगता है.

ड्रैग (Drag): यह वह बल है, जो प्लेन को हवा के घर्षण वगैरह की वजह से पीछे की तरफ खींचता है.

लिफ्ट (Lift): अब प्लेन को उड़ाने के लिए. यही मेन चीज है. प्लेन के पंखों की वजह से हवा का दबाव बनता है, जो प्लेन को ऊपर की तरफ उठाता है. इसी की मदद से प्लेन उड़ पाता है.

अब समझते हैं ज्यादा ऊंचाई और तापमान से क्या खेला होता है? दरअसल जैसे-जैसे हम ऊंचाई पर जाते हैं. हवा का दबाव कम होता जाता है. जैसे लेह एयरपोर्ट को ही ले लीजिए.

वहीं जब हवा गर्म होती है तब भी यही खेला होता है. आपने देखा होगा कि गर्म हवा फैलती है. जैसे ठंडी बोतलों के भीतर की हवा, गर्म होने पर फूल जाती हैं. 

अब हवा जब फैलती है, तो इसकी डेंसिटी या घनत्व कम हो जाता है. जिसकी वजह से प्लेन उतना लिफ्ट नहीं जनरेट कर पाते, जितनी उड़ान भरने के लिए जरूरी होता है.

CNN की खबर के मुताबिक 3 डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ने पर प्लेन 1% कम लिफ्ट पैदा कर पाते हैं. ज्यादा ऊंचाई पर हवा की डेंसिटी वैसे भी कम होती है. जिसकी वजह से इस काम में और दिक्कतें आती हैं और प्लेन उड़ाना मुश्किल हो जाता है.

वीडियो: दुनियादारी: ईरान में बड़ा हमला, लेबनान में सर्जिकल स्ट्राइक, दुनियाभर में हड़कंप क्यों?

Advertisement

Advertisement

()