गे लेस्बियन स्ट्रेट एजुकेशन नेटवर्क नाम की संस्था ने जूलिया रॉबर्ट्स को 'रेस्पेक्ट अवॉर्ड' दिया. इस इवेंट में ही संस्था ने कुल 7 करोड़ रुपये कमाए जो गे, लेस्बियन और क्वियर लोगों की बेहतरी के काम में लगाए जाएंगे.
अगर आपको याद न हो, तो बता दें जूलिया वही फेमस एक्ट्रेस हैं जो नॉटिंग हिल, रनअवे ब्राइड और ओशंस इलेवन जैसी फिल्मों में थीं.
स्टार एक्टर तो हमारे यहां भी खूब हैं. लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि समलैंगिक अधिकारों पर कभी कोई भी बात करता हुआ नहीं दिखता. और जो कोई दिखने की कोशिश करता है, उसका लोग मजाक उड़ा देते हैं. उदाहरण के तौर पर करण जौहर को ही ले लीजिए. करण एक ऐसे इंसान हैं, जिन्होंने कभी खुद अपनी सेक्शुअल चॉइस पर कोई बात नहीं कही है. पर लोग ऐसी बातें बनाते आए हैं कि वो गे हैं. लोगों ने उन पर जोक्स मारने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. ट्विटर पर लोग उनको ट्रोल करते रहते हैं.
कुछ समय पहले की बात है, किसी ने ट्विटर पर करण से पूछा क्या वो 'होमो' हैं. जिस पर करण ने बड़ा अच्छा जवाब दिया था.
https://twitter.com/karanjohar/status/719855279286816768
जाहिर सी बात है, जब इस तरह ट्रॉलिंग का डर होगा, तो कोई किस तरह रिस्क लेगा समलैंगिकों के हक में बात करने की?
हम खुद को आजाद लोकतंत्र कहते हैं. हर साल स्वतंत्रता दिवस पर चौड़े हो जाते हैं. लेकिन ये आजादी बड़ी अधूरी है. इसी आजाद लोकतंत्र में लोगों को अपनी मर्जी से अपने सेक्स पार्टनर का चुनाव करने की आजादी नहीं है. ऐसा नहीं है कि लोग समलैंगिक होते नहीं. पर समलैंगिक होने को अपनाना उनके लिए खतरे से खाली नहीं होता. क्योंकि हमारे यहां अब भी 'गे' का मतलब वो होता है, जो 'मर्द' नहीं होता, और 'लेस्बियन' वो होती हैं, जिनको बॉयफ्रेंड नहीं मिल पाते.
एक भारी जनता ये मानती है कि समलैंगिक लोग मानसिक और शारीरिक रूप से बीमार होते हैं. याद है, बाबा रामदेव ने कहा था कि 'गे' होने की बीमारी योग से 'ठीक' हो सकती है. वहीं RSS के संयुक्त महासचिव ने कहा था कि गे होना तो ठीक है. पर लड़के का लड़के से शादी करना गुनाह है.
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https://www.youtube.com/watch?v=IEIPn9IGfb4














