
सचिन देव वर्मा. उरई के हैं. अरवाइन, कैलीफोर्निया में रहते हैं. जेएनयू से भौतिकी पढ़ गए हैं. और अभी पोस्टडॉक्टोरल स्कॉलर हैं यूनिवर्सिटी ऑफ कैलीफोर्निया में. तो सचिन कैलीफोर्निया से हमारे लिए वहां के मजेदार किस्से लिख भेजेंगे. आज भेजा है नये साल का इतिहास. साथ ही उस साढ़े पांच हजार किलो की गेंद के बारे में भी बताया है, जिसको ले अमेरिका में मनता है न्यू इयर. पढ़िए-
नया साल बस द्वारे ही खड़ा है. हमने सोचा कि आपको कुछ रोचक तथ्यों और घटनाओं से रु-ब-रु करा देते हैं. नया साल प्राचीन त्योहारों में से वो त्यौहार है जो आज भी हर्ष-ओ-उल्लास के साथ मनाया जाता है. हालांकि, इसकी मनाने की तारीख़ और तरीके में समय समय पर बदलाव आता रहा है.
कभी दस महीने का होता था साल, नये साल को लेकर हमेशा पंगा होता
हज़ारों साल पहले प्राचीन बेबीलोन में इसकी शुरुआत हुई थी. ग्यारह दिन चलने वाले त्यौहार के रूप में वसंत के पहले दिन से शुरू होता था. वसंत माने आमतौर पर आजकल के हिसाब से मार्च का महीना साल का पहला महीना होता था. इसीलिए सितंबर सातवां, अक्टूबर आठवां, नवम्बर नौवां और दिसंबर दसवां महीना होता था. जैसा कि इनके नामों से समझा भी जा सकता है. ये सब था रोमन कैलेंडर के मुताबिक जो सातवीं शताब्दी BC से शुरू हुआ था और चन्द्रमा के चक्र के हिसाब से था. रोमन कैलेंडर अपने आप में एक बड़ा झंझट था. अटकलबाजी के बलबूते बनाया गया था. 1 मार्च को शुरू होता था. एक साल में 304 दिन होते थे और कुल 10 महीने थे. मार्च से लेकर दिसम्बर तक (मर्सिअस, एप्रिलिस, मैयास, जूनियस, क़ुइन्तिलिस, सेक्सटिलिस, सेप्टेम्बर, ओक्टोबर, नोवेम्बर, और डिसेम्बर).

जूलियस सीज़र को बहुत शौक था कैलेंडर बनवाने का, ये उनके मर्डर की पेंटिंग है (काल्पनिक)
दिनों का गणित सही न होने की वजह से वसंत हर साल आगे खिसक जाता था. इसके चलते हर बार सुधार की जरूरत पड़ती थी. दिन जोड़े जाते थे ताकि मौसम अपने सही महीने के हिसाब से पड़ें. जिन लोगों को सुधार करने का जिम्मा सौंपा गया था वो सरकार का कार्यकाल बढ़ाने के लिए और चुनावों में दखलअंदाज़ी करने के लिए इसका दुरूपयोग करने लगे थे. इन्ही वजहों से रोमन कैलेंडर में सुधार की अत्यंत जरूरत आ गयी थी.

45 BC में, जूलियन कैलेंडर लागू होने के बाद, पहली बार नया साल 1 जनवरी को मनाया गया. जूलियस सीज़र जैसे ही रोम के तानाशाह बने, उसके कुछ समय बाद उन्होंने सोसिजनेस, जो कि एक सिकंदरिया एस्ट्रोनॉमर था, की सहायता से जूलियन कैलेंडर बनवाया. चंद्रमा के बजाये सूरज के हिसाब से बनाया गया था नया कैलेंडर. एक साल में कुल 365 और 1/4 दिन आंके गए और कुल 12 महीने. सीज़र ने साल 46 BC को मार्च के बजाये 1 जनवरी से शुरू करने के लिए साल 45 BC में 67 दिन जोड़े. उन्होंने हर चार साल में फरवरी के महीने में 1 दिन जोड़ने का भी एलान किया. 44 BC में अपनी हत्या से कुछ पहले, क़ुइन्तिलिस महीने का नाम बदल कर अपने नाम पर जूलियस करवाया जो कि जुलाई कहा जाता है. बाद में, उनके उत्तराधिकारी ऑगस्टस ने सेक्सटिलिस का नाम बदल कर ऑगस्टस किया जो अगस्त कहा जाता है.
ग्रेगोरियन कैलेंडर में पहली बार 1 जनवरी तय हुआ नया साल
सीज़र और सोसिजनेस ने सब कुछ ध्यानपूर्वक करते हुए भी एक सौर वर्ष में सही दिनों की गिनती में गलती कर दी थी. सही संख्या 365.242199 थी, न कि 365.25, जैसा कि गिना गया था. इसके चलते हर साल 11 मिनट की गड़बड़ी होती थी. और साल 1000 तक एक साल में कुल 7 दिन की गड़बड़ी हुई और 15वीं शताब्दी के मध्य तक कुल 10 दिनों की गड़बड़ी हुई. रोमन चर्च को इसकी जानकारी थी और सन 1570 के आसपास पोप ग्रेगरी XIII ने क्रिस्टोफर क्लेवियस को नया कैलेंडर बनाने का जिम्मा सौंपा. और इस प्रकार सन 1582 में ग्रेगोरियन कैलेंडर अस्तित्व में आया. तबसे लेकर पूरी दुनिया में नए साल का उत्सव बदस्तूर 1 जनवरी को मनाया जाने लगा.

नए साल के त्यौहार के मायने अलग-अलग लोगों के लिए अलग हैं. क्रिश्चियन परंपरा में लोग क्राइस्ट के ख़तना का जलसा मनाते हैं. रोमन कैथोलिक, मैरी की गरिमा को सेलिब्रेट करते हैं. बीसवीं शताब्दी से इस त्यौहार ने अलग मायने अख्तियार कर लिए हैं. आजकल नए साल को नयी शुरुआत के तौर पर मनाया जाता है. पुराने साल से सीख लेकर, नए साल में सुधार करने का प्रण लेना सबसे ज्यादा लोकप्रिय है. अपने यहां तो ज्यादातर लोग नया साल TV पर बॉलीवुड का कोई डांस शो देख कर मना लेते हैं. 12 बजने पे सब लोग अपने अपने परिवारों और दोस्त-यारों को बधाइयां दे लेते हैं. पश्चिमी देशों में आम तौर पर लोग अच्छा खाना, पीना और आतिशबाज़ी से नए साल का स्वागत करते हैं.
अमेरिका में बॉल ड्रॉपिंग की परंपरा है, साढ़े पांच हजार किलो की बॉल इस्तेमाल होती है
वैसे तो पूरी दुनिया में साल के अंतिम कुछ क्षण पटाखों से चिन्हित किये जाते हैं. लेकिन अमेरिका का अपना अलग ट्रेडिशन चल निकला है. 'बॉल ड्रॉपिंग' का. दुनिया का सबसे ज्यादा मशहूर बॉल ड्रॉपिंग न्यू यॉर्क शहर के टाइम्स स्क्वायर पर न्यू इयर्स ईव की मिडनाइट को होता है. पुराने समय में लोग मैनहट्टन डाउनटाउन के ट्रिनिटी चर्च के घंटे को सुनने के लिए आधी रात में जमा होते थे. द न्यूयॉर्क टाइम्स कंपनी ने 1904 में लोगों को आकर्षित करने के न्यूयॉर्क टाइम्स बिल्डिंग पर धमाकेदार आतिशबाज़ी की. लोग तो आकर्षित हुए ही मगर साथ ही पटाखों की वजह से आसपास की सड़कों पर गरम राख़ और पटाखों के टुकड़ों की बरसात हुई जो कि खतरनाक होने के साथ-साथ कचरा जमा होने का कारण भी बना. इन्हीं वजहों से न्यूयॉर्क पुलिस ने वहां आतिशबाज़ी बैन कर दी. तब न्यूयॉर्क टाइम्स के पब्लिशर और मालिक एडोल्फ ऑक्स ने अपने चीफ इलेक्ट्रिशियन वॉल्टर पाल्मर को जगमगाती हुई नयी तरकीब निकालने के लिए बोला. पाल्मर के डिज़ाइन के बल पे, ऑक्स ने आर्टक्राफ्ट स्ट्रॉस साइन कंपनी को लगभग 318 किलो की लोहे और लकड़ी से बनी और 25 वाट के 100 बल्बों से जड़ी हुयी बॉल बनाने की जिम्मेदारी दी. इस बॉल को इलेक्ट्रिसिटी का इस्तेमाल करके 1908 के बॉल ड्रॉपिंग में प्रयोग किया गया.

टाइम्स स्क्वायर बॉल
जैसे जैसे नई-नई टेक्नॉल्जीज आती गयीं, बॉल भी हाई टेक होती गई. 2013 के मुताबिक, बॉल लगभग 5386 किलो की है, 12 फुट व्यास है, 2688 वाटरफ़ोर्ड क्रिस्टल्स हैं जो 32256 फ़िलिप्स LED की लाइट रिफ्रैक्ट करते हैं. कुल मिलाकर भयंकर रूप से जगमगाती हुई गेंद दिखाई देती है दूर-दूर से. हज़ारों, लाखों की तादाद में बूढ़े, जवान और बच्चे सब जमा होते हैं बॉल ड्रॉपिंग देखने के लिए. गाना-बजाना चल रहा होता है, पीना-खाना चल रहा होता है. आप कभी अगर टाइम्स स्क्वायर आए होंगे तो आप समझ सकते हैं कि क्या माहौल बनता होगा. ये कहना शायद गलत नहीं होगा कि असली अमेरिका बस टाइम्स स्क्वायर में ही है, और न्यू इयर्स ईव में तो अलग ही समां बंधता है वहां.
काउंटडाउन तो चल ही रहा है, जल्दी ही नया साल आ भी जायेगा. आप नए साल नए गोल्स बनायें, उन्हें पाएं. नयी गलतियां करें, उनसे सीखें. नयी समस्याओं का सामना करें और उनके नए-नए समाधान भी ढूंढ़ें. गिरें, उठें और आगे बढ़ें, सफलताएं पाएं.
इन्हीं शुभकामनाओं के साथ हैप्पी न्यू ईयर!
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