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15 दिन, 807 लोग गायब, सोशल मीडिया बोला ‘मर्दानी 3 याद आ गई!’ असल कहानी क्या है?

Delhi Missing Persons 2026: दिल्ली में 15 दिनों के भीतर 800 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर ने हलचल मचा दी है. सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसका जिक्र मर्दानी 3 से जोड़कर कर रहे हैं, लेकिन आंकड़े क्या बताते हैं? इस बीच Delhi Police ने भी Missing Persons से जुड़ी खबरों को 'पेड प्रमोशन' का हिस्सा बताया है.

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गायब होते लोग और स्क्रीन पर मर्दानी 3.

दिल्ली. भीड़-भाड़, रोज़-मर्रा के काम और ट्रैफिक के बीच अचानक एक ख़बर उभरती है जो पढ़ने में लगती है जैसे कोई कहानी शुरू हो रही है. 2026 के पहले 15 दिनों में लगभग 800 से ज़्यादा लोग गायब हुए हैं यानी रोज़ाना औसतन 50 से ऊपर लोग शहर से लापता. महिलाओं और लड़कियों का हिस्सा खास तौर पर बड़ा है.

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सोशल मीडिया पर जैसे ही ये आंकड़े घूमने लगे, लोगों के मन में सवाल चमक उठा: “क्या दिल्ली शहर कहीं खो रहा है?”

गायब होने वाले लोगों के बारे में पोस्ट्स, वीडियो और चर्चा तेजी से फैलने लगी, और उसी समय मर्दानी 3 फिल्म की रिलीज़ का समय भी था - उसी फिल्म में गायब लड़कियों और अपराध की धारणा दिखाई जाती है.

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अब कहानी थोड़ा फिल्मी-सी लगने लगी: एक तरफ़ असली डेटा, दूसरी तरफ़ फिल्म और चर्चा का माहौल.

असल डेटा बताता है क्या

सबसे पहले यह साफ़ हो जाए कि पुलिस के रिकॉर्ड में जो बड़ी संख्या दिखती है, वह कोई अचानक नई समस्या नहीं है. दिल्ली पुलिस के डेटा के हिसाब से 2016 से अब तक हर साल लगभग 23,000 से 24,000 लोग Missing Persons के रूप में रिपोर्ट होते रहे हैं. यह एक दशक से लगभग एक ही रफ्तार पर है. 

इसी का असर है कि औसतन हर महीने लगभग 2,000 लोग गायब होने की रिपोर्ट दर्ज होती है. जनवरी 2026 में महीने के पूरे आंकड़े 1,777 रहे, जो औसत से थोड़ा कम था. यानी 2026 के शुरुआत में जो “800+” की संख्या खबर बनकर घूम रही है, वह उसी पुराने डेटा का छोटा हिस्सा है, जिसे अलग-थलग दिखाया जा रहा है.

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अगर हम पिछले सालों को देखें तो यह सिलसिला इस तरह रहा है:

  • 2025 में कुल 24,508 लोग गायब हुए जिनमें से कई को पुलिस ने ट्रेस भी किया लेकिन लगभग 9,087 मामले अभी भी बिना हल के हैं. 
  • पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 2016 से 2026 तक लगभग 2,32,737 लोग गायब हुए, जिनमें से करीब 1.8 लाख लोगों को पुलिस ने फैमिली से मिलाया. बाकी लगभग 52,000 मामले आज भी अनट्रेस्ड हैं. 
  • खास बात यह है कि हर साल लगभग वही रेंज बनी रहती है - कभी थोड़ा ऊपर, कभी थोड़ा नीचे - पर “एकाएक बूम” जैसा कुछ नहीं दिखता. 
सरल शब्दों में, अगर सालों की कुल संख्या को देखें, तो 2026 के पहले 15 दिनों के 800 का आंकड़ा अपने आप में कोई असाधारण चौंकाने वाला नंबर नहीं है.

आंकड़े अगर आसान लेवल पर समझें

सोचिए हर साल एक ही तरह की लिस्ट होती है - एक साल में लगभग 24 हज़ार लोग गायब रिपोर्ट होते हैं. यानी,

  • हर महीने लगभग 2,000 लोग
  • हर रोज़ औसतन 60 से नीचे लोग
  • और 15 दिनों में 800 जैसा आंकड़ा भी औसत के अंदर ही आता है. 

लेकिन अगर इसे सिर्फ़ एक छोटे हिस्से से देखते हैं जैसे “पहले दो हफ़्ते के 807”, तो वह बहुत बड़ा दिखने लगता है. तभी सोशल पोस्ट्स और रील्स में यह इतना ज़्यादा सनसनी जैसा फैल रहा है.

महिलाओं और किशोरियों पर खास ध्यान

दिल्ली में गायब होने वाले लोगों में महिलाओं और किशोरियों का हिस्सा काफी ऊंचा है.

  • 2025 में रिपोर्ट होने वाले लोगों में से अधिकतर महिलाएं थीं - लगभग 60% से ज़्यादा. 
  • दस साल के रिकॉर्ड में भी यह एक ध्यान खींचने वाली बात है कि टीनएज लड़कियां ज़्यादा संख्या में गायब रही हैं. 
  • ऐसा ही 2026 के शुरुआती दिनों में भी देखा गया कि लगभग दो-तिहाई गायब लोगों में महिलाएं और लड़कियां थीं. 

इस एक हिसाब से सुरक्षा और जागरूकता के सवाल उठते हैं - न कि सिर्फ आंकड़ों के कारण भय फैलाने के लिए.

NCR के आसपास की स्थिति

दिल्ली के आस-पास के हिस्सों - जैसे नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुरुग्राम - में भी अलग-अलग Missing Persons के प्रकरण आते रहे हैं. यह सभी इलाक़े NCR का हिस्सा हैं और अलग-अलग पुलिस रिकॉर्ड रखते हैं.

लोग सोशल मीडिया पर इन्हें जोड़कर बताते हैं कि कहीं-कहीं इसी तरह के मामलों की चर्चा है, लेकिन यह अलग-अलग शहर और अलग-अलग रिकॉर्ड होते हैं, सीधे दिल्ली के डेटा से मेल नहीं खाते.

सोशल मीडिया की आवाज़

अब आते हैं उन पोस्ट्स और टिप्पणियों पर जो तेजी से फैल रही हैं. कुछ पोस्ट्स और वीडियो सीधे जोड़ रहे हैं कि शायद यह सब PR स्टंट है मर्दानी 3 फिल्म के लिए, ताकि फिल्म का विषय और चर्चा दोनों एक साथ चले. यह जोड़ खूब वायरल हो रहा है. कुछ ने तो सीधा-सीधा इन खबरों को फिल्म ‘मर्दानी-3’ के प्रमोशन से जोड़ दिया.

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सोशल मीडिया पर ‘मर्दानी-3’ को लेकर चर्चा


Reddit जैसे मंच पर कई लोगों ने अपने अंदाज़ में यह आंकड़े पोस्ट किए हैं, कुछ डर और चिंताओं के साथ. कुछ ने लिखा कि “ऐसा लगता है जैसे शहर में एक Kidnapping Zone है.” 
कुछ उपयोगकर्ताओं ने यह बताया कि अगर आंकड़ों को महीने-और-साल के हिसाब से देखें, तो यह सिर्फ वही सिलसिला है जो हर महीने आता रहा है. लोगों के सवालों का इशारा रानी मुखर्जी की फिल्म ‘मर्दानी-3’ की तरफ था.

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इंस्टा पर भी लोगों ने उठाए सवाल

ध्यान देने वाली बात यह है कि सोशल मीडिया तरह-तरह की व्याख्याएं जोड़ता है - कभी डर फैलाने वाली, कभी साज़िश वाली - लेकिन इन पोस्ट्स में साक्ष्य जैसा कुछ ठोस नहीं होता.

पुलिस क्या कह रहा है

दिल्ली पुलिस ने फिल्म ‘मर्दानी-3’ का नाम लिए बिना गुमशुदगी की इन खबरों को ‘पेड प्रमोशन’ का हिस्सा बताया. अपने एक्स पोस्ट में दिल्ली पुलिस ने कहा,

कुछ सुरागों का पीछा करने के बाद हमने पाया कि दिल्ली में लड़कियों के लापता होने में बढ़ोतरी को लेकर जो हाइप बनाई जा रही है, उसे पेड प्रमोशन के जरिए फैलाया जा रहा है. आर्थिक लाभ के लिए डर का माहौल बनाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

 

इस पूरे हंगामे पर दिल्ली पुलिस ने भी पहले भी अपना बयान जारी किया था, उन्होंने कहा था कि 

कोई अचानक या असामान्य बढ़ोतरी नहीं हुई है, बल्कि यह वही पुराना डेटा है जो हर साल दर्ज होता रहा है

पुलिस ने यह भी बताया कि रिपोर्टिंग सिस्टम में कुछ मामले अस्थायी गायब होने जैसे दर्ज हो जाते हैं - जैसे कम समय के लिए घर से दूर रहने वाले, स्कूल न पहुंचने-जैसी शिकायतें - और यदि परिवार अपडेट न करे तो वह रिकॉर्ड में ही बने रहते हैं.

पिछले कुछ सालों में पुलिस की ट्रेसिंग दर और तकनीक में भी सुधार हुआ है, जिससे काफी मामलों में लोग परिवार से मिल चुके हैं. पुलिस का संदेश साफ़ है: अफ़वाहों पर जल्दी भरोसा ना करें, असली रिकॉर्ड वही है जो सालों से इस तरह का दिखता रहा है.

मर्दानी 3 PR का मामला - कनेक्शन या सिर्फ चर्चा?

इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प पहलू ये है कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग कहते हैं कि मर्दानी 3 फिल्म के आसपास चल रही Missing Persons की चर्चा शायद जानबूझकर पैदा की गई है. लेकिन सवाल ये कि हकीकत क्या है. फिल्म की रिलीज़ और Missing Persons का टॉपिक बाहर आने की टाइम लाइन महज एक संयोग भी हो सकता है. लेकिन दिल्ली पुलिस के बयान के बाद सवाल उठने लगे हैं कि ‘मर्दानी-3’ वालों ने फिल्म के लिए डेटा जुटाया है, बनाया या फैलाया है?

दिल्ली पुलिस के डेटा और उसके रिकॉर्ड में कोई भी दलील नहीं है कि फिल्म के प्रचार ने आंकड़े बढ़ाए या उन्हें इस्तेमाल किया. यह सिर्फ़ सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बाद आया बयान है.

यानी यह कहना कि यही सब PR का खेल है - अभी तक आधिकारिक रूप से कहीं से साबित नहीं हुआ है. हां, अब सोशल मीडिया की चर्चाओं को दिल्ली पुलिस के ट्विट का साथ जरूर मिल गया है.

वीडियो: लदाख घूमने गए चार लापता दोस्तों को पुलिस ने कैसे ढूंढा?

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