खबर है,
'फिनलैंड की नई प्रधानमंत्री सना मारिन ने हफ्ते में चार दिन और दिन में सिर्फ छह घंटे काम का प्रस्ताव दिया है.'अब सोचिये, कौन ऐसे देश में नहीं रहना चाहेगा जहां हफ्ते में सिर्फ चार दिन ऑफिस जाना पड़े. वो भी सिर्फ छह घंटे के लिए.
लेकिन ये खबर झूठी है. सच से कोसों दूर. फिनलैंड के सरकारी सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि इस तरह के किसी प्रस्ताव पर सरकार कुछ सोच भी नहीं रही है.
तो फिर ये खबर अचानक इंटरनेशनल मीडिया में कैसे आई. और इस तरह कैसे छा गई?
हम भी इस झूठी खबर के झांसे में आ ही गए थे. खबर छपने ही वाली थी कि एक ट्वीट हमें दिखा. इसमें दावा किया गया था कि ये खबर झूठी है. DW वेबसाइट ने इस खबर पर माफी भी मांगी. लेकिन गूगल पर फिनलैंड डालने पर हर जगह यही खबर दिख रही थी. कहीं भी इस खबर के फेक होने की बात नहीं लिखी थी.
गूगल न्यूज़ पर Finland सर्च करने पर ये रिज़ल्ट दिख रहा है. स्क्रीनशॉट में सभी वेबसाइट्स आ नहीं पाई हैं.खोजते हुए हम फिनलैंड की न्यूज़ वेबसाइट newsnowfinland
पर पहुंचे. वहां हमें पता चला कि ये खबर असल में आई कहां से.
चुनाव से पहले यानी अगस्त, 2019 में सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी ऑफ फिनलैंड के कुछ सीनियर नेता और कार्यकर्ताओं की तुर्कु नाम की एक जगह पर बैठक हुई थी. पार्टी के 120 साल पूरे होने के जश्न में. इस बैठक में सना मारिन भी शामिल हुई थीं. तब वो ट्रांसपोर्ट मंत्री थीं.
पैनल डिस्कशन चल रहा था. इसी दौरान सना ने कहा कि फिनलैंड की प्रोडक्टिविटी को बढ़ाने के लिए हफ्ते में चार दिन या फिर दिन में काम के घंटों को घटाकर छह किया जा सकता है. उन्होंने दोनों चीज़ें एक साथ लागू करने की बात नहीं कही थी. वेबसाइट के मुताबिक, मारिन ने इसे ट्वीट भी किया था. लेकिन यह कभी भी सरकार की पॉलिसी मेकिंग का हिस्सा नहीं बना.
तो चार महीने पुराने इवेंट की ये खबर अब कैसे वायरल हो गई?
मारिन के पीएम बनने के छह दिन बाद यानी 16 दिसंबर, 2019 को ऑस्ट्रिया की वेबसाइट Kontrast
ने यह खबर छापी. पैट्रिशिया हूबर ने मारिन को कोट करते हुए लिखा,
“हफ्ते में चार दिन और दिन में छह घंटे काम. ये हमारा अगला कदम क्यों नहीं होना चाहिए? क्या आठ घंटे की नौकरी हमारा आखिरी सत्य है? मुझे लगता है कि लोग अपने परिवार, दोस्तों, करीबियों के साथ ज़्यादा वक्त बिताना डिज़र्व करते हैं. उन्हें अपनी हॉबीज़ के लिए ज़्यादा वक्त दिया जाना चाहिए. ये हमारी वर्किंग लाइफ में अगला कदम हो सकता है.”उस वक्त यानी अगस्त, 2019 में फिनलैंड की मीडिया ने मारिन का यही कोट प्रकाशित किया था.
इसके बाद 2 जनवरी को ये खबर बेल्जियम की वेबसाइट New Europe में छपी. इस खबर में लिखा था कि पीएम बनने के बाद मारिन ने ये प्रस्ताव दिया है. उसके बाद ये खबर धीरे-धीरे ब्रिटिश मीडिया में पहुंची और फिर भारत तक पहुंच गई. 7 जनवरी को भारत की कई हिंदी-अंग्रेज़ी वेबसाइट्स में यह खबर छपी है.
इंटरनेट के जरिए एक तरफ पूरी दुनिया एक क्लिक की दूरी पर है. पर ये एक खबर एक बड़ा उदाहरण है कि अगर मीडिया हाउसेस की तरफ से सावधानी न बरती जाए तो कैसे एक झूठी खबर पूरी दुनिया में आसानी से फैल सकती है.
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