चोरी छिपे बूस्टर डोज़ कैसे लगवा रहे हैं लोग?
विशेषज्ञ कह चुके हैं कि बूस्टर डोज़ का कोई साइड इफेक्ट नहीं है.
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WHO के अनुसार, एक्सपायर होने के बाद भले ही वैक्सीन प्रतिरक्षा उत्पन्न ना करे, लेकिन असुरक्षित नहीं होती. (प्रतीकात्मक तस्वीर: इंडिया टुडे)
ओमिक्रोन वेरिएंट के मामले भारत में धीरे-धीरे अपने पैर पसारते हुए दिखाई दे रहे हैं. अब तक ओमिक्रॉन वेरिएंट के 360 केस सामने आ चुके हैं. जिसमें सबसे ज्यादा 88 केस महाराष्ट्र और 67 केस दिल्ली से हैं. बीते 24 घंटों में देशभर में कोरोना संक्रमण के 6 हज़ार 650 नए मामलों के साथ 374 मौतें दर्ज की गईं. केंद्र सरकार ने कहा है कि दुनिया कोरोना की चौथी लहर का सामना कर रही है और इस वक्त भारत सावधानी में कमी नहीं कर सकता. ओमिक्रॉन को लेकर राज्यों ने सिलसिलेवार ढंग से तैयारी शुरू कर दी है. मध्य प्रदेश के बाद उत्तर प्रदेश ने भी नाइट कर्फ्यू की घोषणा कर दी है. एमपी में अभी तक ओमिक्रॉन वेरिएंट का एक भी केस सामने नहीं आया है, लेकिन एतहियात बरतते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को राज्य की जनता के नाम संदेश में नाइट कर्फ्यू की घोषणा की. एमपी में नाइट कर्फ्यू रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक लागू रहेगा. पिछले महीने एमपी में जब कोरोना के इक्के दुक्के मामले सामने आ रहे थे तब प्रदेश में कोरोना प्रतिबंध को हटा दिया गया था. यूपी में 25 दिसंबर की रात 11 बजे से नाइट कर्फ्यू लगने जा रहा है. यह नाइट कर्फ्यू रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक प्रभावी होगा. शादी जैसे समारोह में अब लोगों की संख्या को सीमित कर 200 तक कर दिया है. साथ ही आयोजनकर्ता को कार्यक्रम के बारे में स्थानीय प्रशासन को सूचना देनी होगी. महाराष्ट्र जहां पर सबसे ज्यादा ओमिक्रॉन के केस सामने आ चुके हैं वहां की उद्धव सरकार भी नाइट कर्फ्यू लगाने पर विचार कर रही है. वैसे हम ये साफ कर देना चाहते हैं कि ये सारी रोकथाम सिर्फ आम लोगों के लिए हैं. चुनावी रैलियों पर रोक जैसी कोई बात समाचार की तैयारी तक तो हमें सुनाई नहीं दीं. हमें लगता है कि ICMR की किसी गोपनीय स्टडी में ये सामने आया होगा चुनाव और चुनाव से पूर्व होने वाली रैलियों में कोरोना का डेल्टा ओमिक्रोन वगैरह नहीं फैलता है. इसीलिए आप रात में 11 बजे घर चले जाइएगा, नहीं तो पुलिस बना देगी चालान. लेकिन नेताजी अगली सुबह लाख लोगों को लेकर घूमें, उसमें पुलिस की आंखों पर पट्टी बंध जाएगी. हो सकता है आपको ये तंज़ लगे. लेकिन याद कीजिए किस तरह कोरोना की दो लहरों के बीच हमारे देश में बिहार से लेकर पश्चिम बंगाल तक के चुनाव हुए. किसी ने चूं भी की? इसीलिए हमें लगता है कि कोई तो गोपनीय स्टडी ज़रूर है सरकार के पास. वैसे इन सारी चिंताओं को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक टिप्पणी बहुत चर्चा में है. हुआ यूं कि जस्टिस शेखर कुमार यादव की एकल पीठ एक क्रिमिनल केस की सुनवाई कर रही थी. तारीख थी 23 दिसंबर. मामले में आरोपी को बेल देते हुए अपने आदेश के अंत में जस्टिस यादव ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए नियम बनाने के निर्देश दिए. इन्हीं निर्देशों के साथ जस्टिस यादव ने ये भी कहा कि यूपी विधानसभा के चुनाव नज़दीक हैं और इनके लिए राजनैतिक दल लाखों की भीड़ जुटाकर रैलियां कर रहे हैं. इन कार्यक्रमों में कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना संभव नहीं है. अगर इसे समय रहते रोका नहीं गया, तो नतीजे दूसरी लहर से भी खतरनाक हो सकते हैं. अगर संभव हो, तो फरवरी में होने वाले विधानसभा चुनाव को एक या दो महीनों के लिए टाल देना चाहिए. क्योंकि अगर जीवन रहा, तभी चुनावी रैलियां हो पाएंगी. प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते हुए जस्टिस यादव ने कहा, माननीय प्रधानमंत्री ने बड़ी आबादी वाले इस देश में मुफ्त टीकाकरण की कवायद शुरू करवाई. ये प्रशंसनीय है और अदालत इस काम की तारीफ करती है. अदालत माननीय प्रधानमंत्री से निवेदन करती है कि इस भयावह स्थिति से निपटने के लिए कदम उठाएं और चुनावी रैलियों और चुनावों को टालने पर विचार करें. जान है तो जहान है. अदालत ने ये सारी बातें सुझाव की भाषा में कही थीं. ये अदालती आदेश या निर्देश नहीं था. इसके बाद सारी नज़रें घूम गईं चुनाव आयोग की तरफ. आज समाचार एजेंसी ANI ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा के हवाले से लिखा कि आयोग अगले हफ्ते यूपी का दौरा करेगा, उसके बाद उचित कदम उठाएगा. दर्शक जानते ही हैं कि अगले साल फरवरी-मार्च में पंजाब और उत्तर प्रदेश समेत 5 राज्यों में चुनाव हैं. इस खबर से आगे बढ़ते हुए हम आपको एक और ट्रेंड के बारे में जानकारी देना चाहते हैं. कोरोना के टीके के बूस्टर डोज़ पर भारत सरकार ने फिलहाल अंतिम फैसला नहीं लिया है. सरकार चाहती है कि पहले सभी पात्र नागरिकों को टीका लग जाए, उसके बाद बूस्टर डोज़ लगाने की शुरुआत की जाए. ज़ाहिर है कि इसके पीछे टीकों की उपलब्धता ही बड़ा कारण है. कई विशेषज्ञ ये कह चुके हैं कि बूस्टर डोज़ का कोई साइड इफेक्ट नहीं है. लेकिन इसे लगाने से कितना फायदा होगा, ये फिलहाल स्पष्ट रूप से बताना मुश्किल है. फिर भी भारत में एंटीबॉडीज़ कम होने के डर से कई लोग चोरी छिपे बूस्टर डोज़ लगवा रहे हैं. कोई बिना रजिस्ट्रेशन तो कोई रजिस्ट्रेशन के लिए आधार से इतर दूसरी आईडी और फोन नंबर इस्तेमाल करके. हम अपने दर्शकों से अपील करना चाहते हैं कि टीकों के मामले में सरकार की ओर से स्पष्ट निर्देशों का इंतज़ार कीजिए. चोरी छिपे टीका लगवाना किसी और पात्र के टीके को हड़पने जैसा भी हो सकता है. इसीलिए नियमों के तहत अपनी बारी आने का इंतज़ार कीजिए.
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