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ये है सूसू-पॉटी का पौराणिक तरीका

हमारे वेदों पुराणों में टट्टी पेशाब का सही तरीका बताया गया है. यकीन न हो तो पढ़ लो.

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फोटो - thelallantop
राजा सगर ने और्व से बातों-बातों में बाथरूम जाने के सही तरीके जान लिए थे. मसलन शौच कैसे करें. क्या करें. क्या न करें. सगर के ऐसे सवालों को सुनकर और्व बोले, ठीक है. सब सुनो. तो दिन की शुरुआत ब्रह्ममुहूर्त से करनी चाहिए. सबसे पहले इसी टाइम में पेशाब कर लेनी चाहिए. घर से दूर जाकर ही मल मूत्र त्याग करना चाहिए. पॉटी करने के बाद जो पानी बचे, उसे घर नहीं लाना चाहिए. इसके अलावा किसी पेड़, गाय, आग या किसी बुद्धिमान बंदे के सामने सूसू-पॉटी नहीं करना चाहिए. इसके अलावा और्व ने कुछ जगह पॉटी बॉथरूम करने पर सख्त रिस्ट्रिकशंस लगाई थीं. वो सुनिए. श्मशान, मंदिर, नदी, जल, जलाशय, जुते हुए खेत, गायों के गोष्ठ में कभी ये सब काम नहीं करने चाहिए. इसके अलावा आदमी को दिन के वक्त उत्तर मुख और रात के वक्त दक्षिण मुख होकर पॉटी बाथरूम नहीं करना चाहिए. संडास में बोलना भी नहीं चाहिए. पॉटी से निबटने के बाद धोने होते हैं हाथ. और्व ने इस बारे में भी ज्ञान दिया. और्व ने कहा, चूहों के बिल से निकाली मिट्टी, शौचकर्म से बची हुई मिट्टी, चींटी आदि छोटे-छोटे जीवों द्वारा निकाली हुई और हल से उखाड़ी हुई. इस तरह की मिट्टी का कभी हाथ धोने में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. विष्णु पुराण, 11वां अध्याय, तृतीय अंश

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