आज ही के दिन पैदा हुए अरुण ने अपना बचपन मेरठ में गुजारा. मेरठ यूनिवर्सिटी से ही पढ़ाई की. 17 साल की उम्र में गए मुंबई बिजनेस करने पर घुस गए अभिनय में. फिल्म पहेली (1977) में बॉलीवुड में पहला ब्रेक मिला.

फिल्म माशूका से एक सीन
पर एक्सेलेरटर मिला टीवी शो विक्रम और बेताल से जिसमें ये बने थे विक्रमादित्य. इसके पहले इन्होंने कुछ उड़िया और तेलुगु फिल्मों में भी काम किया.

विक्रम-बेताल का एक सीन
पर भगवान तो उन्हें भगवान बनाने पर उतारू था. 1986 में आया 'रामायण' जिसे बनाया रामानंद सागर ने. दीपिका चिखालिया ने इनके साथ किया सीता का रोल. जब पहली बार अरुण ने रामायण का ऑडिशन दिया, वो फेल हो गए. पर कुछ ही हफ्तों बाद उनके पास रामानंद सागर का फोन आया. उन्होंने कहा कि अरुण को शो में न लेने का फैसला उन्होंने बदल दिया है. साथ ही ये भी कहा कि राम के रोल के लिए इससे बेहतर चेहरा शायद ही उन्हें कहीं मिले.

रामानंद सागर की रामायण में राम
राम का रोल करने के बाद तो अरुण की लाइफ ही बदल गयी. लोग अरुण को पब्लिक में देखते तो उनके पांव छूने लगते और आशीर्वाद मांगते. लोग उनको उनके रोल से अलग नहीं देख पाते थे. एक समय चेन स्मोकर हुआ करने वाले अरुण को लोगों के डर से पब्लिक में सिगरेट पीना छोड़ना पड़ा.

अरुण आज 'लक्ष्मण' सुनील लाहिरी के साथ राम-लक्ष्मण नाम की प्रोडक्शन कंपनी के मालिक हैं. 57 साल के अरुण आजकल स्वयंवर में सीता को जीतने वाले राम जैसे यंग तो नहीं लगते, पर वो राम वाली हल्की सी सिग्नेचर मुस्कान जरूर साथ रखते हैं.














