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लाइव टीवी पर सेक्शुअल असॉल्ट! ये कैसा एंटरटेनमेंट है?

क्या कंटेंट की इतनी कमी हो गई है 'कॉमेडी' शोज में?

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फोटो - thelallantop
हमारे यहां जब कॉमेडी के नाम पर कपिल शर्मा कहते हैं कि उनकी बीवी का रोल कर रहीं शिमोना के होंठ बहुत बड़े हैं, वो बहुत बोलती हैं या खाना नहीं बना पातीं, मेरे कानों से खून आ जाता है. मन करता है, इनसे जाकर पूछें कि क्या औरतों के लुक्स की बुराई करना ही कॉमेडी है? क्या कंटेंट के नाम पर इनके पास इतनी गरीबी है कि सेक्सिस्ट जोक ही आखिरी सहारा है? वो भी एक एपिसोड में नहीं, लगभग हर एपिसोड में. लेकिन फ़्रांस के टीवी चैनल पर आने वाले इस शो ने तो सारी हदें पार कर दीं.
फ़्रांस की टीवी एक्ट्रेस सोराया एक टीवी शो में भाग ले रही थीं. जिसमें वो किम कार्देशियन का रोल कर रही थीं. और लाइव टीवी पर उनके साथी एक्टर के उनके दाहिने ब्रेस्ट को जबरन चूम लिया.
इस कॉमेडी शो में उस वाकये को दोहराया जा रहा था, जब किम के घर में डकैती हो गई थी. किम बनीं सोराया के घर एक चोर घुस आता है. उन्हें बांधकर, बाथटब में ठूंसकर, उन्हें ताले में बंद कर उनका सारा सामान लूट ले गया था. ताला तोड़ने वाले का रोल कर रहे जॉन माइकल आते हैं, ताला तोड़ उन्हें छुड़ा लेते हैं. जब पूरा सीन हो जाता है, तो शो के होस्ट सोराया से कहते हैं कि जॉन ने तुम्हारी जान बचाई, चलो उसे एक किस दो.
सोराया ने किस के लिए मना कर दिया. एंकर उससे पूछते हैं क्यों. सोराया कहती हैं कि यहां किस करना जरूरी है क्या. वो तो मैं स्टेज के पीछे भी कर सकती हूं. ऐसा कहकर सोराया ने फिर से 'ना' कहा. लेकिन उनकी ना को खुद ही हां में तब्दील करते हुए उन्हें किस करने की कोशिश की गई. जब उन्होंने मुंह घुमाया तो उनके ब्रेस्ट को चूम लिया गया. देखिए वीडियो.
 

 
ये सब लाइव टीवी पर हुआ.
एक्टर का चेहरा देखिए. ऐसा जरा भी नहीं लगता कि उसे अच्छा लग रहा है. या इसमें उसकी सहमति है.
कहते हैं वो जमीन फ़्रांस की है, जहां सबसे पहले औरतों ने आजादी का स्वाद चखा था. ओलंप डी गूज नाम की औरत ने सबसे पहले औरतों के अधिकारों की बात की, फ़्रांस की क्रांति के भी पहले. ये बात 18वीं सदी जितनी पुरानी है. फ़्रांस को दुनिया वाले उसकी क्रांति के लिए पहचानते हैं, जिसने दुनिया को बराबरी और आजादी का मतलब समझाया. कहते हैं, दुनिया की समझ के लिए जरूरी है कि फ़्रांस की हिस्ट्री पढ़ी जाए. सिमोन डी बुवर से लेकर जूलिया क्रिस्तेवा तक फ़्रांस ने दुनिया को बड़ी-बड़ी फेमिनिस्ट औरतें दीं, जिन्होंने मात्र लोगों को ही नहीं, लोगों की भाषा तक की बखिया उधेड़कर रख दी.
क्या फ़्रांस में आजादी का मतलब अब अपनी इच्छा को दूसरों पर थोपना हो गया है?
क्या एंटरटेनमेंट का मतलब मोलेस्टेशन हो गया है?

शायद दुनिया में 'कॉमेडी' की परिभाषा बदलने की जरूरत है.

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