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दिल्ली अगर दिल वालों की है तो कानपुर कान वालों का क्यों नहीं कहते?

एक कहानी रोज़ में आज पढ़िए अमन सिन्हा 'अभी' की मजेबुल कहानी 'दिल मेरा मुफ्त का'.

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फोटो - thelallantop
आज सुबह अलार्म की शोर से जब आंख खुली तो पाया दिल की धड़कनें तेज़ हैं. गजब के जोश के साथ दिल जोर-जोर से धड़के जा रहा रहा है. भला माज़रा क्या है. न ही मेरी लॉटरी लगी है, न ही सुबह-सुबह किसी नारी के दर्शन हुए हैं. तो फिर भला क्यों फड़क रहा? मैंने खुद को तलब करते हुए वजह जानने की कोशिश की फिर ये सोच कर इग्नोर किया कि आखिर “नादां है बेचारा दिल ही तो है”. थोड़ी देर बाद इंटरनेट सर्फ करते हुए मालूम चला कि आज World heart day है. अब भला Children’s day के दिन चिल्ड्रेन फुदकते हैं, Teacher’s day के दिन टीचर्स फुदकते हैं तो हार्ट डे के दिन हार्ट क्यों न फुदके? बकौल शायर "दिल तो बच्चा है जी." बहरहाल, इतना पता चलने की देर थी कि मेरे अंदर का रिपोर्टर जाग गया और सोचने लगा कि क्यों न आज दिल का एक साक्षात्कार ही ले लिया जाए. आनन-फानन में मैं एक माइक और कैमरामैन लिए पहुंच गया अपनी पड़ोस के शर्मा जी की बेटी के पास. दरअसल, वो क्या है कि मेरा दिल कभी-कभी उसी के पास ही पाया जाता है अब क्या करूं? दिल है की मानता नहीं. अपने आने की वजह बताकर मैंने दिल को इंटरव्यू के लिए राजी कर लिया. फिर घंटो दिल ने अपनी आत्मकथा सुनाई और अपने दर्द-ओ-गम को हमसे साझा किया. पूरी बातचीत यहां पेश करने में थोड़ी मुश्किल है इसीलिए हम पेश कर रहे ‘दिल की कहानी, दिल ही की जुबानी’ के कुछ हिस्से.
"मैं दिल हूं, जिसे इंग्लिश में हार्ट, हिंदी में ह्रदय और प्रेम की भाषा में दिल कहा जाता है. हां ,वही दिल जो आपके सीने में धड़कता है और जिसके रुक जाने पर आपके स्वर्ग सिधार जाने की संभावना 100% हो जाती है. मेरे बारे में मानव समाज में कई मिथक और अवधारणायें हैं. मेरे चरित्र को कलंकित करने के लिए कई अफवाहें उड़ाई गई हैं. खासकर कि फ़िल्म इंडस्ट्री ने तो मेरा बेड़ा गर्क कर रखा है. मैं मानव शरीर के कई विवादित अंगो में एक हूं. मेरे रंग, रूप एवं आकार को लेकर बुद्धिजीवियों में काफी मतभेद है. मनुष्य ने अपने सुविधा के अनुसार मेरे कम्प्लेक्स स्ट्रक्चर, जिसमें वाल्व, चैम्बर, आर्टरी, वेंस होते हैं, को सरल करके एक अजीब सा आकार दे दिया है. जिसे देखकर लगता मानों किसी नौसिखिए ने टेढ़ी-मेढ़ी रोटी पकाई हो. भारतीय समाज में किसी मानव शरीर में मेरे आकार का बड़ा होना जहां एक तरफ उदारता का प्रतीक है वहीं दूसरी तरफ युवक-युवतियों के बीच मेरा आदान प्रदान एक अक्षम्य अपराध माना जाता है. फिर भी हर दूसरे दिन इश्क़-मुहब्बत के मसले में मेरे लेन-देन की ख़बरें टीवी चैनल्स पर सुर्ख़ियां बनाती रहती है. मगर आज मैं ये साफ़ कर देना चाहता हूं कि मेरा काम सिर्फ और सिर्फ पूरे शरीर में रक्त संचारण का है. और हां ! साथ ही साथ अशुद्ध रक्त को शुद्ध भी करता हूं किन्तु, मेरा प्रेम संबंधो में कोई हस्तक्षेप नहीं है. न ही मेरा प्रेम के दौरान किसी नारी/पुरुष से आदान-प्रदान किया जा सकता है. और न ही प्रेम समाप्ति पर मैं टूट कर चूर होता हूं. ये मानव का भरम मात्र है कि “शीशा हो या दिल हो आखिर टूट जाता है". मैं मांस का बना एक अंग हूं न कि शीशे का बना कोई पात्र. मैं तो कहता हूं मेरा मुंह ही न खुलवाओ. सारी भसड़ फ़िल्म वालो ने मचा रखी है. मुझ अकेले को 100 सालों से घसीटे जा रहें हैं. अरे भाई साहब! और भी अंग हैं, जैसे लिवर, किडनी छोटी आंत, बड़ी आंत, अमाशय, इन पर गाने लिखो, इन पर फिल्में बनाओ. ताकि कोई नायक अपनी नायिका से कह सके कि “मैं तुमसे गुर्दा-ओ-जान (दिल-ओ-जान पढ़ें!) से प्यार करता हूं और तुम्हे सारी उम्र अपनी अमाशय में छिपा कर रखना चाहता हूं. मियां! प्यार तुम करो और इल्जाम मुझ पर कि “दिल है कि मानता नहीं”. ये बार-बार अपनी प्रेमिका को कहना बंद करो कि “तुम्हें दिल में बसा लूंगा”, यहां पहले से ही जगह की किल्लत है. लेफ्ट वेसल और राईट वेसल आपस के सीमा विवाद में अक्सर गोलीबारी करते रहते हैं और थोड़ा दिमाग लगाया करो कि आखिर, कैसे 5 फुट की नारी एक दिल में रह पाएगी. दम घुट जायेगा बेचारी का. मुझे बदनाम करने में फिल्म इंडस्ट्री का बड़ा हाथ हैं. इनकी वजह से एक सामान्य मनुष्य दिन भर में बीसियों बार मुझे कोसता है. मेरे ऊपर ऐसे-ऐसे गाने बनाने लगे हैं जिसे सुनकर शरीर के बाकी अंग मेरा मज़ाक उड़ाते रहते हैं. कल ही टीवी पर देख रहा था कि रेखा नाम की अभिनेत्री गा रही थी “दिल चीज़ क्या है आप मेरी जान...” अब भला मैं क्या बताऊं कि क्या चीज़ हूं मैं? कभी कोई कहता है कि “दिल तो पागल है" कभी "दिल बदतमीज है" और कभी "दिल तो बच्चा है जी!" भला मेरी कोई इज्जत है कि नहीं इस दुनिया में? कभी गाना गाते हैं “गिला गिला गिला दिल गिला गिला” और कभी गाते हैं “दिल में लगी है आग" कन्फ्यूज्ड स्पीशीज! अरे गीला तो होना ही है आखिर शरीर के तीन चौथाई हिस्से में पानी भरा है. कभी अपने प्रेमिका से पूछते कि “दिल मेरा चुराया क्यों? भला मैं क्या कोहिनूर हूं जो चुरा लेगा कोई? कभी गाते हो “और इस दिल में क्या रखा है तेरा ही दर्द छिपा रखा है". मैं क्या स्विस बैंक हूं जो मुझमे छिपा रखे हो? इसके इलावा मेरा इस्तेमाल अवैध रूप से मुहावरों में भी करते रहते हैं जैसे “दिल्ली दिल वालों की तो उस हिसाब से कानपुर कान वालों की हो जाएगी? और नागपुर नाग वालों की? और मोहाली मुंह वालों की? अमां हद करते हो मियां. तुम्हारी इन्ही बातों से ये हार्ट, हर्ट हो गया तो “दिल मेरा मुफ्त का" गाने के बावजूद सौदा महंगा पड़ जाएगा. वैसे, कई और शिकायतें भी हैं मगर मेरे पास टाइम नही है, अभी बॉडी को ब्लड पंप करने का टाइम हो रहा है. आखिर में, मानव जाति को मेरी ये सलाह है कि वक़्त रहते मेरे बारे में अफवाह फैलाना बंद करे और मुझे रक्त संचार के कार्य को सुचारू रूप से करने दें अन्यथा बेड़ा उनका ही गर्क होना है."
तो ये थी दिल से लम्बी बातचीत का छोटा सा हिस्सा . संवाददाता: अमन सिन्हा 'अभि' कैमरामैन: अमन सिन्हा 'अभि' (Front Camera, 8 मेगा पिक्सल )

गडांसे की धार से उस प्यार की आखिरी बूंद तक बाथरुम के सिंक में बह जाती है

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