
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक पुलिस की एक गश्त के दौरान इसे देखा गया था. लेकिन जब पुलिस आगे बढ़ी तो बंदरों के साथ बच्ची भी इन पर चीखी. वो बंदरों में इतनी घुल मिल गई थी कि बड़ी मशक्कत के बाद ही पुलिस उसे अपने साथ ला पाई. जंगल से लाकर उसे ज़िला अस्पताल में भर्ती कराया गया है.चूंकि बच्ची ने लंबा समय बंदरों के साथ बिताया है, उसकी हालत में सुधार बड़े धीरे हो रहा है. इंसानों को लेकर उसका डर गया नहीं है. हाथों की जगह सीधे मुंह से खाना खाती है. कई बार हिंसक हो जाती है. फिलहाल ये मालूम नहीं चला है कि ये बंदरों के बीच कैसे पहुंची.
दुनियाभर में इस तरह के मामले सामने आते रहे हैं जब कोई बच्चा इंसानी सभ्यता से छिटक कर जंगलों में रह गया. लंबा समय वहां बिता कर उसने जंगल के माहौल में ढल गया. और जब वापस इंसानों में लौटा तो एकदम अनोखे शख्स के रूप में. इन्हें फेरल चाइल्ड कहा जाता है. फेरल का मतलब जंगली होता है. कुछ चर्चित फेरल चाइल्ड ये रहेः
# मरीना चैपमैनःचर्चित और विवादित

मरीन चैपमैन. (फोटोः जॉन चैपमैन)
ऐसे सभी मामलों में सबसे चर्चित (और विवादित भी) किस्सा है कोलंबिया की मरीना चैपमैन का. मरीना का कहना है कि उन्हें 1954 के आस-पास 4 साल की उम्र में किडनैप करके जंगल में छोड़ दिया गया था. बाहर निकलने का कोई रास्ता न मिलने पर वो धीरे-धीरे बंदरों की एक टोली में मिल गईं. उनके साथ लगभग तीन साल रहने के बाद उन्हें एक इंसानी कैंप मिला. लेकिन इंसानों ने उन्हें नहीं अपनाया. फिर एक दिन कुछ शिकारियों ने उन्हें पकड़कर एक ब्रॉथल में बेच दिया. वहां से उन्हें मरुजा नाम के एक पड़ोसी ने बचाया और अपनी बेटी के साथ बेगौटा भेजा. बेगौटा से फिर उन्हें बच्चों की आया बनाकर इंगलैंड भेजा गया, जहां वे आज भी रहती है.
मरीना ने अपने अनुभवों पर 'अ गर्ल विद नो नेम' नाम से एक किताब भी लिखी. कुछ लोगों ने मरीना की कहानी पर शक भी किया है. सच जो भी रहा हो, इस मामले की दुनिया भर में चर्चा हुई.# नाम जैसी किस्मत वाली लड़की
2012 में मिज़ोरम में एक ऐसी औरत जंगल से बाहर आई जो 1978 में गुम हुई थी. नग छायदी 4 साल की उम्र में अपने भाई के साथ खेलते-खेलते जंगल में खो गई थीं. कुछ दिनों बाद भाई मिल गया लेकिन छायदी नहीं मिलीं. उन्हें मरा मान लिया गया. लेकिन छायदी 30 साल तक जंगल में ज़िंदा रहीं. भटकते-भटकते म्यांमार की तरफ के जंगल में पहुंच गईं जहां एक औरत ने उन्हें आसरा दिया. जब वो औरत किसी काम से मिज़ोरम आई तो उसने छायदी के पिता नग छिलाओ को देखा. उनकी शक्ल शायदी से मिलती-जुलती लगी. उसे लगा कि हो न हो उन्होंने जिस औरत को बचाया है, वो नग छिलाओ की बेटी है. इसके बाद छिलाओ मैनमार जाकर छायदी से मिले और उसे पहचान कर घर ले आए.
इस किस्से की सबसे दिलचस्प बात ये रही कि छायदी के कबीले की भाषा (मारा) में 'छाय' का मतलब होता है दूर होना. और 'दी' का मतलब होता है स्वागत करना. छायदी की ज़िंदगी में ये दोनों बातें सच में हुईं.# वेयरवुल्फ बॉय

2007 में रूस में 10 के करीब उम्र का एक लड़का मिला जो लंबे समय से भेड़ियों के साथ रह रहा था. वो भेड़ियों की तरह ही इंसानों पर गुर्राता था और उसके नाखून और दांत काफी पैने थे. बचाए जाने के बाद उसने एक दिन अस्पताल में निकाला और फिर स्टाफ की नज़र बचाकर भाग निकला. उसे आम लोगों के लिए इतना खतरनाक माना गया था कि उसे ढूंढने के लिए पुलिस ने खासतौर पर ऑपरेशन चलाया था. उसकी असल पहचान मालूम नहीं चली और उसे पुलिस के दिए नाम 'ल्योखा' से ही जाना गया. अंग्रेज़ी प्रेस ने उसे वेयरवुल्फ बॉय कहा.
# बम से डर कर 44 साल जंगल में रहे
2013 में विएतनाम में लोगों को दो ऐसे लोग मिले जो 41 साल से जंगल में थे. ये बाप-बेटे थे. इनमें से बेटे 'हो वैन लैंग' की उम्र 44 साल थी. मतलब उसकी लगभग अपनी पूरी उम्र जंगल में बीती थी. विएतनाम की लड़ाई में अमरीकी एयरफोर्स ने जमकर बमबारी की थी. इनमें से ही एक बम 1972 में 'हो वैन थान' के घर पर गिरा. इसमें उनकी बीवी और बच्ची की मौत हो गई. हो वैन थान फौज में रहे थे. इसलिए जानते थे कि इंसानी बसाहटों पर दोबारा हमला होने की ज़्यादा संभावना होती है. तो जंगल में छिप गए, और खोजे जाने तक वहीं थे. जंगल से निकलने के बाद दोनों जंगल के किनारे एक कस्बे में बस गए.
# अनोखी फेरल चाइल्ड जो सभ्यता अपना पाई

मरी एंजेलीक़ (स्केच विकीमीडिया कॉमन्स से)
एक बड़ा पुराना किस्सा मरी एंजेलीक़ मेमी ली ब्लैंक का है. 1712 के आस-पास पैदा हुईं मरी फ्रांस के जंगलों में 10 साल रहीं. इन्हें ऐसा अकेला फेरल चाइल्ड माना जाता है, जो इतने लंबे समय तक जंगल में रहकर पूरी तरह इंसानी सभ्यता को अपना पाया. मरी की कहानी फ्रांस और ब्रिटेन में काफी चर्चित हुई, खासकर 1768 में ' An Account of a Savage Girl, Caught Wild in the Woods of Champagne' नाम से एक बुकलेट प्रकाशित होने के बाद. कहा जाता है कि 63 साल की उम्र में जब मरी गुज़रीं, तब तक लिखना-पढ़ना सीख चुकी थीं. चूंकि ये एक अभूतपूर्व कहानी थी, मरी पर भी लोगों ने सवाल उठाए. कुछ इसे सच मानते हैं, कुछ फिक्शन.
मूलतः ये आर्टिकल 06 अप्रैल, 2017 को पब्लिश किया गया था. इसका सबसे रिसेंटली 06 अप्रैल, 2019 को अपडेट किया गया है.












