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क्या कोरोना लॉकडाउन से आम का कारोबार तबाह हो जाने का खतरा पैदा हो गया है?

भारत का आम इस बार एक्सपोर्ट नहीं हो पा रहा है.

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लॉकडाउन की वजह से आम का उत्पादन और उसका एक्सपोर्ट प्रभावित हुआ है. फोटो-इंडिया टुडे
एक साल पहले देश में लोकसभा के चुनाव चल रहे थे. अप्रैल के महीने में पीएम नरेंद्र मोदी का एक नॉन पॉलिटिकल इंटरव्यू खूब वायरल हुआ. इसमें अभिनेता अक्षय कुमार ने पीएम मोदी से कई सवाल पूछे थे. एक सवाल आम को लेकर भी था. अक्षय ने कहा था कि मेरे ड्राइवर की बेटी जानना चाहती है कि क्या हमारे प्रधानमंत्री आम खाते हैं? पीएम मोदी ने कहा था, 'मैं आम खाता हूं. आम मुझे पसंद भी है. बचपन में पेड़ पर पके हुए आम खाना मुझे ज्यादा पसंद था. लेकिन अब मुझे सोचना पड़ता है कि खाऊं या न खाऊं.'
ये कोरोना काल से पहले की बात थी. लेकिन अब क्या आम, क्या खास, कोरोना ने सबको बुरी तरह प्रभावित किया है. पीएम हों या आम आदमी, आम तो तब खाएंगे, जब इसकी फसल तैयार होगी. मंडियों तक पहुंचेगी और वहां से लोगों के घरों में. लेकिन हर कारोबार की तरह इस बार आम का बिजनेस भी प्रभावित हुआ है. आम के उत्पादन में भारत दुनिया में पहले नंबर पर है. दुनिया में आम का जितना उत्पादन होता है, उसका आधा सिर्फ भारत में होता है. लेकिन इस बार मौसम और लॉकडाउन से चीजें प्रभावित हुई हैं.
लॉकडाउन का आम पर कितना असर पड़ा है, इस बारे में 'दी लल्लनटॉप' ने बात की 'ऑल इंडिया मैंगो ग्रोवर एसोसिएशन ऑफ इंडिया' के अध्यक्ष इसराम अली से. उन्होंने बताया कि पिछले साल इंडिया में एक करोड़ 75  लाख मैट्रिक टन आम की पैदावार हुई थी. लेकिन इस बार पहले मौसम और अब लॉकडाउन की वजह से इसकी पैदावार पर असर पड़ा है.
महाराष्ट्र में क्या हैं हालात?
इसराम अली का कहना है कि इस समय मंडियों में जो आम आ रहा है, वो महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश का है. महाराष्ट्र में लगभग 12 लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है. अल्फांसो आम की पेटी शुरू में 1500-1600 रुपए में बिकती थी, लेकिन अब 400 और 300 रुपए बिक रही है. दूसरी बात ये है कि महाराष्ट्र सरकार ने ट्रांसपोर्टेशन का चार्ज डबल कर दिया है. अगर आम के किसान को किसी गाड़ी के लिए एक हजार रुपए देने होते थे, तो उसे अब दो हजार रुपए देने पड़ रहे हैं.
नहीं हो रहा है एक्सपोर्ट
भारत से सबसे ज्यादा अल्‍फांसो आम का एक्सपोर्ट होता है. अल्‍फांसो महाराष्ट्र के रत्नागिरि और सिंधुदुर्ग जिलों में ज्यादा होता है. अल्‍फांसो  मार्च में तैयार हो जाता है. जून तक बाजार में रहता है. हर साल दुबई, कतर सिंगापुर और यूरोप में आम का एक्सपोर्ट होता था, लेकिन इस बार अब तक निर्यात सौदे नहीं हुए हैं.
इसराम अली का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से मजदूर नहीं मिल रहे हैं. आम की पैकिंग के लिए पेटियां बनाने वाली फैक्ट्रियां बंद हैं. ऐसे में कैसे एक्सपोर्ट होगा?
अल्‍फांसो आम मार्च में तैयार हो जाता है और मार्च से जून तक बाजार में रहता है. फोटो-इंडिया टुडे अल्‍फांसो आम मार्च में तैयार हो जाता है और मार्च से जून तक बाजार में रहता है. फोटो-इंडिया टुडे

यूपी के आम पर क्या असर पड़ेगा?
यूपी में 15-16 मैंगो बेल्ट हैं. सहारनपुर, बुलंदशहर, मेरठ हरदोई, मलीहाबाद, प्रतापगढ़- ये सब मैंगो बेल्ट के तहत आते हैं. यूपी में 2.75 लाख हेक्टयर में आम का उत्पादन होता है. इसकी पैदावार 40 से 50 लाख मीट्रिक टन के बीच में. पिछले महीने में ओला और बारिश से 6, 7 लाख मैटिक टन का नुकसान हो चुका है. अनुमान है कि 30 से 35 लाख मीट्रिक टन का ही उत्पादन हो पाएगा. मलीहाबाद जैसे मैंगो बेल्ट में सिंचाई की दिक्त आ आ रही है. नहरों में पानी नहीं है. बिजली कम आ रही है.
उत्तर प्रदेश के आम 20 मई के बाद बाजार में आने शुरू होते हैं. उत्तर प्रदेश के आम 20 मई के बाद बाजार में आने शुरू होते हैं.

इसराम अली का कहना है,
हम सरकार से यही चाहते हैं कि जिस तरह सरकार गेंहू और अन्य फसल खरीदती है, उसी तरह आम की भी खरीद करे. इसके भी दाम फिक्स हों.
तो क्या लॉकडाउन की वजह से आम की मिठास कम हुई है. इस मामले में कृषि के जानकार सुधीर पंवार कहते हैं,
लॉकडाउन से पहले आम पर मौसम की मार पड़ी. बिन मौसम बारिश और ओला से फसल बर्बाद हुई. उसके बाद जब दवा के छिड़काव का समय आया, तो लॉकडाउन हो गया. दवाइयां मिली नहीं. इससे फसल खराब हुई.
वहीं खेती से जुड़े मुजफ्फरनगर के किसान धर्मेंद्र मलिक का कहना है,
उत्तर प्रदेश में आम के आने में समय है. आम पर जो प्रभाव है, वो लॉकडाउन का नहीं है. ओला और बारिश का असर पड़ा है. 30 प्रतिशत के नुकसान का जो आंकलन है, वो बेमौसम बारिश और ओला की वजह से है. यूपी के आम 15-20 मई के बाद मार्केट में आने शुरू होंगे.
लॉकडाउन के अलावा आम की फसल पर मौसम का भी मार पड़ा है. लॉकडाउन के अलावा आम की फसल पर मौसम का भी मार पड़ा है.

मलीहाबाद में मैंगोमैन के नाम से मशहूर पद्मश्री कलीम उल्लाह खां के बेटे नजीमउल्ला खां का कहना है कि पहले ठंड और फिर बारिश से आम की फसल को नुकसान हुआ. फिर लॉकडाउन हो गया. जब आम तैयार हुआ, तो बागों की सिंचाई नहीं हो पा रही है. उन्होंने बताया,
मलीहाबाद में 20-25 मई से आम मंडियों में जाना शुरू हो जाता है. अगर लॉकडाउन लंबा खींचता है, तो मंडी तक पहुंचने में दिक्कत होगी. कैरेट और डिब्बा भी नहीं है. फैक्ट्रियां बंद हैं. दवाओं को छिड़काव में दिक्कत हुई, क्योंकि लॉकडाउन की वजह से चीजें नहीं मिल रही थीं.
उनका कहना है कि 20 तारीख को छूट दी गई, लेकिन तब तक जो नुकसान होना था हो गया. उम्मीद है कि लॉकडाउन खुलने के बाद आम मंडी जाने लगेगा. पिछले साल 500 से 600 ट्रक हर रोज निकलते थे. दिल्ली, इंदौर, मुंबई हर जगह आम जाता था. विदेशों में भी जाता था लेकिन इस बार चीजें प्रभावित होंगी. अगर तीन मई को लॉकडाउन नहीं खुलता है, तो और ज्यादा नुकसान होगा. साउथ इंडिया में आम की फसल तैयार है.लेकिन लॉकडाउन की वजह से किसान इसे मंडियों तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं. आम को मंडियों और सीधे घरों तक पहुंचाने के लिए सरकार और अन्य एजेंसियों काम कर रही हैं. इंडिया पोस्ट भी कुछ जगहों पर आम की होम डिलिवरी कर रहा है.
यूपी के आम के उत्पादकों को उम्मीद है कि लॉकडाउन तीन मई को खत्म हो जाएगा. अगर ऐसा होता है, तो जब तक उनकी फसल तैयार होगी, तब तक चीजें सामान्य होने लगेंगी और लोग आम का स्वाद ले पाएंगे.


जल्दीबाजी में लॉकडाउन खत्म करने पर कोरोना के किस दूसरी लहर की बात कर रहे यह एक्सपर्ट

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