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ये हैं चीन के सात सूबेदार

शी चिनफिंग अपनी निर्विरोध सत्ता के लिए हर जगह अपने भरोसेमंद प्यादों को तैनात कर रहे हैं.

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18 अक्टूबर को कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की 19वीं कांग्रेस का आयोजन होना है.
दुनिया की निगाहें चीन पर हैं. चीन की निगाहें अपने राष्ट्रपति शी चिनफिंग पर हैं. शी चिनफिंग की निगाहें PLA (पीपल्स लिबरेशन आर्मी) पर हैं. इन तीनों की निगाहें, अगले हफ्ते होने जा रही एक मीटिंग पर हैं. कम्युनिस्ट कांग्रेस. इसे मीटिंग नहीं, 'सम्राट' चिनफिंग का राज्याभिषेक ही समझ लीजिए.


 
इन पांच सालों में ही शी चिनफिंग ने अपना नाम चीन के सबसे मजबूत राष्ट्रपतियों की फेहरिस्त में शुमार करा लिया है.
इन पांच सालों में ही शी चिनफिंग ने अपना नाम चीन के सबसे मजबूत राष्ट्रपतियों की फेहरिस्त में शुमार करा लिया है.

पतझड़ के मौसम में चीन का माहौल गर्म है. जेठ की दोपहरी जैसा. 18 अक्टूबर को यहां एक मीटिंग है. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CPC) की. बहुत हाई-प्रोफाइल. 10 साल में कुल दो बार ही होती है. अगले पांच साल चीन में किसकी चलेगी, ये इसी बैठक में तय होगा. इसी मीटिंग के बहाने चिनफिंग अपनी सत्ता पर मुहर लगाएंगे. उनके लिए ये मीटिंग बहुत मायने रखती है. इसमें सेंट्रल कमिटी और पोलित ब्यूरो के अलावा PLA के नए नेतृत्व का भी नाम तय होगा. बाहरी देशों के साथ जुड़े मुद्दों में चीन के सामने कई चुनौतियां हैं. दक्षिणी और पूर्वी चीन सागर विवाद, अमेरिका के साथ टकराव, उत्तरी कोरिया तनाव, भारत के साथ जुड़े सीमा विवाद. इन सब पर उसे ध्यान देना होगा. वैसे तो चीन की विदेश नीति पहले से ही बहुत आक्रामक है. देखा जाए, तो ज्यादातर बार बेमतलब ही जोर दिखाता है चीन. फिर भी, वो हर मसले को तू-तड़ाक से नहीं सुलझा सकता. ये सारे मसले तो हैं ही, लेकिन फिलहाल बात चीन की अंदरूनी महत्वाकांक्षाओं की.
कम्युनिस्ट कांग्रेस का आयोजन 18 अक्टूबर को होना है. इसमें न केवल प्रीमियर के नाम पर मुहर लगेगी, बल्कि पार्टी और सेना से जुड़ी सभी अहम नियुक्तियां भी होंगी.
कम्युनिस्ट कांग्रेस का आयोजन 18 अक्टूबर को होना है. इसमें न केवल प्रीमियर के नाम पर मुहर लगेगी, बल्कि पार्टी और सेना से जुड़ी सभी अहम नियुक्तियां भी होंगी.

फिलहाल चिनफिंग की सत्ता को चुनौती देने की स्थिति में कोई नहीं है नवंबर 2012 में चिनफिंग ने चीन की बागडोर संभाली. इन पांच सालों में उन्होंने चीन की सेना को ज्यादा से ज्यादा मॉडर्न और ताकतवर बनाने पर खूब काम दिया. सबसे ज्यादा फोकस किया PLA पर. PLA की व्यवस्था दुनिया की बाकी सेनाओं से बिल्कुल अलग है. बाकी जगहों पर सेना की निष्ठा देश के लिए होती है. चीन में सेना की निष्ठा सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के लिए है. कुछ समय पहले तक PLA की स्थिति 'स्टेट विदिन अ स्टेट' जैसी थी. यानी, बहुत ताकतवर. सत्ता के एक केंद्र की तरह. सरकार अपना काम करती थी. PLA अपना काम करती थी. PLA ने कभी जनता के दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया. सरकार के प्रति निष्ठा बनाए रखी, लेकिन अपनी राह में अडंगा नहीं बनने दिया. सरकार और कम्युनिस्ट पार्टी ने भी इस निष्ठा का खूब मान रखा. PLA को उसके जनरल्स की मर्जी पर छोड़ दिया. दोनों अपने-अपने रास्ते पर चलते रहे. फिर आए चिनफिंग और धीरे-धीरे उन्होंने सब बदल दिया.
चिनफिंग ने अपने कार्यकाल की शुरुआत से ही PLA में सुधार करने और इसकी नकेल कसने पर ध्यान दिया.
चिनफिंग ने अपने कार्यकाल की शुरुआत से ही PLA में सुधार करने और इसकी नकेल कसने पर ध्यान दिया.

चिनफिंग ने लगातार PLA पर कंट्रोल बढ़ाया, कड़े फैसले लिए पिछले पांच सालों में चिनफिंग लगातार PLA के पर कतरते रहे. उस पर नियंत्रण बढ़ाया. चिनफिंग का हर कदम निर्विरोध सत्ता कायम करने की ओर बढ़ रहा है. PLA की डोर चिनफिंग के हाथों में है. PLA क्या, ऐसा लग रहा है कि सारी शक्तियां फिलहाल चिनफिंग के ही हाथों में केंद्रित हो गई हैं. PLA में सुधार की गुंजाइश लंबे समय थी, लेकिन सेना के जनरल्स बदलाव के लिए तैयार नहीं थे. चिनफिंग ने पहल की. खूब सारे सुधार किए. PLA को सीधे-सीधे कम्युनिस्ट पार्टी की सेंट्रल मिलिट्री कमिशन (CMC) के नेतृत्व में रख दिया. खुद चिनफिंग इस CMC के प्रमुख बन गए. इसके बाद उन्होंने PLA में पैठ बना चुके भ्रष्टाचार को निशाना बनाया. कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की. बड़े-बड़े प्रतिष्ठित नामों को किनारे कर युवाओं को आगे बढ़ाया.
PLA को आधुनिक बनाने के लिए चीन ने पिछले करीब दो दशकों में बेतहाशा पैसा खर्च किया है.
PLA को आधुनिक बनाने के लिए चीन ने पिछले करीब दो दशकों में बेतहाशा पैसा खर्च किया है.

हर ओर अपने वफादार तैनात कर रहे हैं चिनफिंग जिन वरिष्ठ अधिकारियों में चिनफिंग को विरोध की आशंका नजर आई, उन्हें किनारे कर दिया गया. युवा अधिकारियों को मौके दिए. इनमें से ज्यादातर लोग चिनफिंग के विश्वासपात्र थे. अहम पदों पर अपने लोगों को नियुक्त किया. अपने भरोसेमंद लोगों को प्रमोट कर ऊपर ले गए. ये भी एक किस्म का भाई-भतीजावाद ही है. चिनफिंग कहते हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस है. मतलब, एकदम बर्दाश्त नहीं करेंगे. इस लिहाज से देखा जाए, तो वो खुद भी गलत कर रहे हैं. ऐसे अपने लोगों को ऊपर बढ़ाना और अपने फायदे के लिए नियुक्तियां करना कौन सा सही काम है. फिर बात वही आ जाती है, जिसकी लाठी उसकी भैंस. जिसके पास ताकत होती है, सही-गलत भी वो ही तय करता है.  PLA को अपनी मुट्ठी में रखने के लिए चिनफिंग ने सबसे अहम भूमिका अपने सात विश्वस्तों को सौंप दी है. ये सात नाम बस सेना के जनरल नहीं हैं, चिनफिंग की महत्वाकांक्षाओं के लिए जरूरी 'नींव के पत्थर' हैं. चिनफिंग के ये सात वफादार कौन हैं, जानिए:
शिलांग शी राष्ट्रपति चिनफिंग के काफी करीबी और विश्वासपात्र माने जाते हैं.
शिलांग शी राष्ट्रपति चिनफिंग के काफी करीबी और विश्वासपात्र माने जाते हैं.

शिलांग शी ये फिलहाल PLA के सबसे हाई-रैंकिंग जनरल हैं. इससे पहले वे वायुसेना कमांडर रह चुके हैं. 18 अक्टूबर को होने जा रही मीटिंग में भी इनकी मौजूदा जिम्मेदारी बरकरार रखे जाने की पूरी संभावना है. लगता है, इन्हें फिर से सेंट्रल मिलिट्री कमिशन (CMC) के लिए चुन लिया जाएगा. ये फिलहाल इस कमिशन के उपाध्यक्ष हैं. उनका और राष्ट्रपति चिनफिंग का पुराना परिचय है. 1991 में चिनफिंग और शिलांग, दोनों ही फुजियान में पोस्टेड थे. फुजियान दक्षिण-पूर्वी चीन का एक प्रांत हैं. पहाड़ों और तटीय शहरों वाला. शिलांग को चिनफिंग की भरोसेमंद टीम में माना जाता है.
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जांग यूजिया

जांग यूजिया जांग अभी सेंट्रल मिलिट्री कमिशन (CMC) में नियुक्त हैं. PLA के ऊपर फिलहाल सबसे ज्यादा पकड़ CMC की ही है. वो भी चिनफिंग के करीबी हैं. कम्युनिस्ट कांग्रेस में उन्हें भी प्रमोशन देकर उपाध्यक्ष बनाया जा सकता है. चिनफिंग और जांग, दोनों के पिता सहयोगी थे. दोनों ने चीन की क्रांति में हिस्सा लिया था. यानी ये सहयोग एक पीढ़ी का नहीं, बल्कि दो पीढ़ियों का है.
ली जुओचेंग
ली जुओचेंग

ली जुओचेंग 64 साल के ली का नाम उस समय सुर्खियों में आया, जब उन्हें हेड जॉइंट स्टाफ डिपार्टमेंट बनाया गया. ली की छवि बहुत अच्छी मानी जाती है. वे जनता के बीच भी काफी लोकप्रिय हैं. वियतनाम युद्ध में सक्रिय रूप से शामिल थे. जंग के मैदान में बहादुरी भी दिखाई. बहुत कम समय में उन्हें खूब तरक्की मिली है. वो फिलहाल PLA नेतृत्व के इकलौते सदस्य हैं, जिसके पास एक्टिव कॉम्बैट अनुभव है. ये सेना के उस वेस्टर्न कमांड में भी रह चुके हैं, जो कि भारत के साथ जुड़ी सीमा को संभालता है. उनका प्रमोशन करने के लिए आर्मी कमांडर जनरल फांग फेंगझुई की अनदेखी की गई. उनकी जगह ली को पदोन्नत किया गया.
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एडमिरल मियाओ हुआ

मियाओ हुआ चिनफिंग ने मियाओ को डबल प्रमोशन दिया. 62 साल के मियाओ PLA के सबसे कम उम्र के जनरल्स में से एक हैं. वो PLA नौसेना के राजनैतिक अधिकारी भी हैं. जनरल शिलांग शी की ही तरह मियाओ भी चिनफिंग के पुराने भरोसेमंद हैं. ये भी चिनफिंग के साथ फुजियान प्रांत में नियुक्त थे.
वी फेंगझे
वी फेंगझे

वी फेंगझे फेंगझे PLA की फोर्थ सर्विस- द रॉकेट फोर्स के कमांडर हैं. इसे पहले आर्टिलरी कॉर्प्स के नाम से जाना जाता था. उम्मीद है कि इस कम्युनिस्ट कांग्रेस में उन्हें भी प्रमोशन देकर CMC में शामिल कर लिया जाएगा.
र्कररिर
राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ झाओ जोंगझाई

झाओ जोंगझाई भारत के लिहाज से देखें, तो झाओ की भूमिका बहुत अहम है. वो वेस्टर्न कमांड के प्रमुख हैं. PLA का ये धड़ा भारत के साथ जुड़ी सीमा का ध्यान रखता है. इससे जुड़े मुद्दे ये कमांड ही संभालता है. हालिया डोकलाम विवाद के समय झाओ काफी सक्रिय थे. एक समय में डोकलाम को लेकर काफी संशय था. लोग सोच रहे थे कि कहीं ऐसा तो नहीं कि चीन का राजनैतिक नेतृत्व पड़ोसी देशों के साथ विवाद सुलझाना चाहता है और PLA इन विवादों को हवा देता है. संशय था इसे लेकर. कहीं ऐसा तो नहीं कि PLA और चीनी नेतृत्व में आपसी मतभेद है! ये सारे संशय गलत निकले. झाओ ने डोकलाम मामले को वैसे ही संभाला, जैसा चिनफिंग चाहते थे. इनकी पदोन्नति भी तय मानी जा रही है.
चिनफिंग का अगले पांच सालों के लिए भी राष्ट्रपति चुना जाना एकदम तय है. देश के अंदर अपनी स्थिति मजबूत करने के बाद वो बाकी देशों के साथ जुड़े चीन के विवादों पर फोकस करना चाहेंगे.
चिनफिंग देश के अंदर अपनी स्थिति मजबूत करने के बाद बाकी देशों के साथ जुड़े चीन के विवादों पर फोकस करना चाहेंगे. चीन फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकसाथ कई मोर्चों पर घिरा हुआ है.

झोंग शाओजुन कहने को झोंग बस एक वरिष्ठ कर्नल हैं. लेकिन असल में वो PLA के अंदर चिनफिंग के सबसे करीबी और सबसे भरोसेमंद सहयोगी हैं. वो CMC की सबसे प्रमुख जगह यानी शी चिनफिंग के दफ्तर के प्रमुख हैं. सेना के अंदर वो चिनफिंग की आंख और कान का काम करते हैं.


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