राजस्थान में अरावली की पहाड़ियों की तलहटी में एक शहर बसा हुआ है, बूंदी. किसी जमाने में यहां बूंदा मीणा नाम के राजा का शासन हुआ करता था. तब इस जगह को 'बूंदा की नाळ' के नाम से जाना जाता था. 1342 में शाकम्भरी के चौहानों की हाडा शाखा ने इस शहर से मीणाओं को खदेड़ दिया. कहते है कि हाडाओं को यह जीत मिली एक सूफी संत के आशीर्वाद से. नाम था मीरा बाबा.
मलबे से निकले हनुमान, बूंदी में बवाल
राजस्थान के बूंदी में एक मूर्ति और दरगाह के नाम पर लोग मरने-मारने की कसमें खा रहे हैं.

बूंदी शहर के पश्चिमी छोर की पहाड़ी पर बाबा मीरा साहेब की दरगाह है. अंग्रेज इस पहाड़ी से अरावली के जंगलों में घूमते बाघ देखा करते थे. इस वजह से इस पहाड़ी को नया नाम मिला 'टाइगर हिल्स'. हाडा राजाओं के अलावा आस-पास के हिन्दुओं की भी बाबा मीरा साहब में गहरी श्रद्धा रही है. आज भी मंगल के रोज जब दरगाह से तोप दागी जाती है तो बूंदी की गलियों में किसी ना किसी के मुंह से निकल ही जाता है-
"गोला बारूद गोला बारूद रंगनाथ का, मदद मीरा साहब की, और फतह हाडा राव की."

बूंदी का किला ( Picture courtesy: Flickr/taylorandayumi/Creative Commons)
मीरा साहेब की दरगाह इस इलाके में कौमी एकता का प्रतीक है. 2017 के बजट में राजस्थान सरकार ने मीरा साहेब की दरगाह को पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करने की बात कही थी. साल भर भी नहीं बीता है कि सरकार की इस कवायद ने सालों पुराने धार्मिक सौहार्द को खतरे में डाल दिया है.
दरअसल टाइगर हिल्स रामगढ़ अभयारण्य का हिस्सा है. यहां पर रजवाड़ों के समय की बहुत सारी छतरियां बनी हुई हैं. इनमें से एक है, मानदाता की छतरी. छतरी माने गुम्बदनुमा समाधि. समय के साथ-साथ मानदाता की छतरी लगभग खंडहर में बदल चुकी थी. इन पहाड़ियों को पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाने के लिए मानदाता की छतरी का जीर्णोद्धार शुरू हुआ. छतरी के मलबे में एक हनुमान जी की मूर्ति भी थी. इसे उठाकर छतरी में रख दिया गया. बस यहीं से विवाद शुरू हो गया.

बाबा मीरा साहेब दरगाह ( Picture courtesy: bundionline.in)
28 अप्रैल, 2017 के रोज हनुमान जी की मूर्ति मानदाता की छतरी में रखी गई. 29 अप्रैल को इलाके के मुसलमानों ने इसके विरोध में प्रदर्शन शुरू कर दिया. मुसलमानों का कहना था कि ऐसी कोई मूर्ति पहले से यहां पर नहीं थी. इसे वन विभाग और प्रशासन के दूसरे अधिकारीयों ने साजिशन यहां रखवाया है. यह बाबा मीरा साहेब की जमीन पर अवैध कब्जा था और साथ ही साथ उनकी आस्था पर भी.
इस प्रदर्शन के बाद एक शांति समिति बनाई गई. इसमें हिन्दू और मुस्लिम बिरादरियों से चार-चार लोग और 2 पुरातत्वविद रखे गए. इधर इस प्रदर्शन के तुरंत बाद विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और हिन्दू महासभा ने 'मानदाता हनुमान मंदिर' में पूजा के लिए प्रशासन से इजाजत मांगी. उस समय माहौल काफी गर्म था, लिहाजा पूजा की इजाजत नहीं दी गई. इसके बाद इन संगठनों ने ऐलान कर दिया कि 1 जनवरी 2018 के रोज वो 'मानदाता हनुमान मंदिर' पर पूजा करेंगे. इस तरह 2018 के शुभारम्भ की नींव रख दी गई थी.

बूंदी के लिए 2018 की शुरुआत हुई लाठी, पत्थर और टायरों के धुएं से. 31 तारीख के रोज विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल ने प्रेस नोट जारी कर मानदाता में होने जा रहे पूजा कार्यक्रम से खुद को अलग कर लिया लेकिन हिन्दू महासभा पूजा कार्यक्रम पर बनी रही. इस स्थिति को देखते हुए 31 दिसम्बर की सुबह से ही प्रशासन ने जिले में इंटरनेट सेवा अगले दो दिन के लिए बंद कर दी.
1 तारीख की सुबह 11.30 से शहर के आलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन शुरू हुआ. पुरानी कृषि मंडी, अम्बेडकर चौराहा, मीरा गेट, लंका गेट सहित कई जगहों पर प्रदर्शन शुरू हो गए. पुलिस ने लोगों को हटाती और लोग फिर से जुट जाते. दोपहर करीब डेढ़ बजे 3-4 हजार लोगों की भीड़ मालनमासी बालाजी मंदिर पर इक्कठा हो चुकी थी. मंदिर के महंत लखनदास जी इस भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे. यहां पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई दौर की समझाइश हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पाया.

प्रदर्शन पर काबू पाने के लिए मार्च करते सुरक्षा बलों के जवान
दोपहर करीब ढाई बजे प्रदर्शनकारी 'मानदाता बालाजी की जय', 'जय श्री राम' और 'वन्देमातरम' के नारे लगाते हुए मानदाता की छतरियों की तरफ बढ़ने लगे. पुलिस ने इस रैली को जंगम की बगीची के पास रोक लिया और लाठी चार्ज शुरू कर दिया. इसके बाद तो शहर के हालत बेकाबू हो गए. शहर में जगह-जगह प्रदर्शन शुरू हो गए. पुलिस को कई जगह पथराव का सामना भी करना पड़ा. शाम 5 बजते-बजते स्थिति काबू में आ पाई.
बूंदी को राजस्थान का काशी भी कहा जाता है. मीरा साहेब की दरगाह के बिना इस शहर की शख्सियत मुकम्मल नहीं होती है. भाईचारे का पैगाम देने वाली मीरा साहेब की दरगाह आज दिलों में दरार की वजह बनी हुई है. मीरा साहेब की दरगाह की जमीन बचाने से ज्यादा जरूरी है मीरा साहब की उस विरासत को बचाना, जिसने सालों बूंदी में अमन कायम रखने में मदद की.
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