हेडिंग में ‘ड्रैगन’ पढ़ कर क्या सोचने लगे? वही मिथकीय जीव, जो बेहद शक्तिशाली है और आग उगलता है? नहीं, हम उसकी कहानी बताने नहीं आए. मसला उस ड्रैगन का नहीं, उसके नाम वाले फल का है– ड्रैगन फ्रूट. दरअसल, गुजरात और हरियाणा सरकार की देखादेखी अब केंद्र सरकार ने भी इस फल की खेती को प्रोत्साहन देने का फैसला किया है. वर्तमान में इस विदेशी फल की खेती 3,000 हेक्टेयर में की जाती है. अगले 5 सालों में इसे 50,000 हेक्टेयर में उगाने की योजना है.
अब केंद्र सरकार भी Dragon Fruit को दे रही बढ़ावा, ऐसा क्या है इस फल में?
वही फल है जिसे गुजरात सरकार ने 'कमलम' नाम दिया था.

कृषि मंत्रालय ने हाल ही में एक कॉन्क्लेव आयोजित किया. नेशनल कॉन्क्लेव ऑन ड्रैगन फ्रूट (National Conclave on Dragon Fruit). इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य इस फल के क्षेत्र, उत्पादन, मार्केटिंग और ब्रांडिंग को बेहतर कर बढ़ावा देना था. साथ ही ये भी कि किसानों की आय में वृद्धि हो. वर्कशॉप के दौरान हरियाणा, गुजरात, नागालैंड और कर्नाटक के प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव साझा किए.

इससे पहले गुजरात और हरियाणा ने ड्रैगन फल की खेती को बढ़ावा देने के लिए कुछ अहम कदम उठाए थे. गुजरात सरकार ने कुछ समय पहले ड्रैगन फ्रूट का नाम ‘कमलम’ रखा था. साथ ही इसकी खेती करने वाले किसानों के लिए प्रोत्साहन राशि की घोषणा भी की थी. वहीं हरियाणा सरकार ड्रैगन फ्रूट की खेती करने के इच्छुक किसानों को आर्थिक मदद दे रही है.
लेकिन ड्रैगन फ्रूट में ऐसा क्या है कि पहले देश के दो राज्यों की सरकारों, फिर केंद्र सरकार ने इस फल की खेती में इतना इंटरेस्ट लिया?
क्या है ड्रैगन फ्रूट?क्या आप जानते हैं, ड्रैगन फ्रूट को ‘सुपर फ्रूट’ भी कहा जाता है. क्यों? इसके फायदे ही इतने हैं. पर उनको जानने से पहले, इस फल के बारे में जान लेते हैं. ये फल मूल रूप से अमेरिका से है. ये स्वाद के अनुसार दो प्रकार का होता है– मीठा और खट्टा. मीठे ड्रैगन फ्रूट्स तीन तरह के होते हैं. एक, जिनका छिलका गुलाबी और गूदा सफ़ेद होता है. दूसरा, जिनका छिलका और गूदा दोनों लाल होते हैं. तीसरा, जिसका गूदा सफ़ेद और छिलका पीला होता है.

ड्रैगन फ्रूट अलग-अलग नामों से जाना जाता है– पिताया, पिथाया, स्ट्रॉबेरी पीयर आदि. अपने देश में इसे कमलम भी कहा जाता है. मिजोरम भारत का सबसे पड़ा ड्रैगन फ्रूट उत्पादक है. दिलचस्प बात ये है कि इस फल का नाम इसकी बनावट की वजह से है. इस पर निकले उभार (स्पाइक्स) देखने में आग जैसे लगते हैं. इसकी खाल या छिलके पर बने स्केल्स ड्रैगन जैसे लगते हैं. इसीलिए इस फल का नाम चीनी पौराणिक कथाओं में दर्शाए ड्रैगन पर है.
- ड्रैगन फ्रूट औषधीय प्रभाव वाले गुणों से लैस होता है.
- ये 20 साल तक उपज बनाए रखता है.
- ये फल विटामिन और मिनरल्स का एक समृद्ध स्त्रोत है.
- यही नहीं, ड्रैगन फ्रूट शुगर मरीजों के लिए अच्छा होता है.
- इस फल की दोनों वैरायटी, लाल हो या सफ़ेद, इन्सुलिन रेजिस्टेंस कम करती हैं.
- इसमें प्रीबायोटिक फाइबर होता है जो गट-हेल्थ, बोले तो आंतों के लिए लाभकारी होता है. ये आंतों में गुड-बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देता है, जिससे पाचन क्रिया में सुधार भी होता है.

- ड्रैगन फ्रूट में न केवल कैलोरीज कम होती हैं, बल्कि ये आयरन, कैल्शियम, जिंक, पोटैशियम जैसे पोषक तत्वों से लैस होता है. भारत और विश्व में इसकी ज्यादा मांग इन्हीं वजहों से है.
- ड्रैगन फ्रूट, सूखे और आधे-सूखे (semi-arid) क्षेत्रों में उगाया जा सकता है. साथ ही ये नमक भी सहन कर सकता है. भारत में ठंडे इलाकों को छोड़ कर, सभी राज्य इस फल के पौधों के लिए सही हैं. ये एक ऐसी फसल है जो पोषक तत्वों से भरी है, साथ ही उगाने में आसान है.
जब किसी एक चीज़ से किसी और को लाभ होता है, तो हम भी उसके बारे में सोचने लगते हैं. ड्रैगन फ्रूट के मामले में ऐसा ही कुछ समझ लीजिए. इस फल के निर्यात का वियतनाम की जीडीपी (GDP) में अच्छा खासा योगदान है. इस जानकारी ने भारत सरकार को भी मोटिवेट किया है.
ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती. ये शुष्क ज़मीन पर भी आसानी से उपज सकता है. इसके साथ ऊपर बताए गए स्वास्थ्य संबंधी फायदे तो हैं ही. लेकिन चूंकि ड्रैगन फ्रूट के बारे में लोगों की जानकारी सीमित है, इसीलिए भी सरकार इसकी खेती को प्रोत्साहन दे रही है.
तेलंगानाटुडे वेबसाइट के अनुसार, तेलंगाना के कई किसानों को ड्रैगन फ्रूट की खेती से लाभ हुआ है. उसका एक कारण, राज्य सरकार द्वारा दिया गया प्रोत्साहन और वित्तीय सहायता भी है.

अब केंद्र सरकार भी दूसरे राज्यों को इस फल की खेती के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है. केंद्रीय कृषि सचिव, मनोज आहूजा ने इस बारे में कॉन्क्लेव के दौरान कहा,
‘ड्रैगन फ्रूट की घरेलू और वैश्विक बाज़ारों में ज्यादा मांग है. पांच साल में 50,000 हेक्टेयर खेती का लक्ष्य है. फल की डिमांड रहेगी. किसानों के लिए कीमतें भी अच्छी होंगी. अच्छी बात ये है कि इस फल की खेती उपजाऊ और बंजर दोनों प्रकार की भूमि पर की जा सकती है.’
द हिन्दू अखबार से मनोज आहूजा ने आगे कहा,
‘राज्यों और किसानों को MIDH (मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ़ हॉर्टिकल्चर) के अंतर्गत केंद्र लक्ष्य-आधारित मदद दे सकता है. फ़ूड प्रोसेसिंग मंत्रालय की सहायता से प्रोसेसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर भी विकसित किया जा सकता है. इस फल की खेती किसानों और उपभोक्ताओं, दोनों के लिए फायदेमंद होगी.’
केंद्र के अनुसार ड्रैगन फ्रूट का पोषक महत्त्व काफी ज्यादा है, इसीलिए इसकी डिमांड हर मार्किट में है. इसकी लागत भी कम है. माने इसे उगाने में हालत पस्त होने के हालात नहीं होंगे, सो देश में इसकी खेती का विस्तार किया जा सकता है. सरकार ये भी चाहती है कि भविष्य में ड्रैगन फ्रूट कम दाम पर लोगों को उपलब्ध कराया जा सके. फिलहाल इसका मूल्य 400 रुपये प्रति किलो है, जिसे आने वाले समय में 100 रुपये प्रति किलो करने का लक्ष्य है.
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बता दिया कि सरकार ने किसानों की अब कौन-सी मांगें मान ली हैं!









