“अब तक शरीर में खून तो बह रहा था, लेकिन वो हिन्दुस्तानी खून नहीं था…और जो (भारत को) आजादी मिली थी वो भीख में मिली आजादी थी. असली आजादी 2014 में मिली है.”कंगना के इस बयान के बाद नेताओं और लोगों की तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली. लोग हाल ही में कंगना को मिले पद्मश्री अवार्ड वापस लेने की मांग करने लगे. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब ने कंगना से पद्मश्री वापस लेने की मांग की. इसके अलावा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी सहित कई नेताओं ने कहा कि कंगना से उनका पद्मश्री अवार्ड वापस लिया जाए. पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने ट्वीट किया,
माननीय @rashtrapatibhvn को सुश्री रनौत को दिया गया पद्म पुरस्कार तुरंत वापस लेना चाहिए. इस तरह के पुरस्कार देने से पहले मानसिक मनोचिकित्सीय मूल्यांकन किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे व्यक्ति राष्ट्र और उसके नायकों का अपमान न करें"."
हैदराबाद स्थित NALSAR लॉ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और इंडियन ऐकडेमिक एंड लीगल एक्सपर्ट फैजान मुस्तफा का कहना है,
पद्म अवॉर्ड वापस लेने के लिए कोई स्पष्ट रूल नहीं है. लेकिन एक जनरल रूल है कि अगर कोई किसी को अपॉइंट कर सकता है तो उसे हटा भी सकता है. अब यूनिवर्सिटी का ही उदाहरण लें, हर यूनिवर्सिटी के एक्ट में लिखा होता कि यूनिवर्सिटी अपनी दी हुई डिग्री कभी भी वापस ले सकती है. अगर किसी की MA, PhD की डिग्री वापस ली जा सकती है तो ये तो एक अवॉर्ड है.दिल्ली में UPSC स्टूडेंट्स को कोचिंग कराने वाले सरोज ने आजतक रेडियो से बातचीत में बताया,
सामान्य स्थिति में ऐसा नहीं होता, फिर भी कुछ परिस्तिथियां होती हैं. जिसने पहले अच्छा काम किया जरूरी नहीं कि वह भविष्य में भी राष्ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता को बरकरार रखे. ऐसे व्यक्ति जो तीनों में से कोई भी पद्म अवॉर्ड ले चुके हों, और देशद्रोह या राष्ट्रीय मूल्य मान्यताओं का मान मर्दन करते हैं ऐसे लोगों से सरकार अवॉर्ड वापस ले सकती है. हालांकि ऐसा बहुत कम देखने को मिला है. ऐसे मामले जरूर हुए हैं जिसमें अवॉर्ड पाने वाले ने खुद अवॉर्ड सरेंडर करने बात कही हो.पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और शिरोमणि अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल को 2015 में पद्म विभूषण दिया गया था. कृषि कानूनों के विरोध के चलते उन्होंने पद्म विभूषण वापस करने की घोषणा की थी और राष्ट्रपति को पत्र भी लिख दिया था. इस मामले में एक आरटीआई चंडीगढ़ से राष्ट्रपति भवन में लगाई गई थी जिसका जवाब में राष्ट्रपति भवन से जारी की गई ईमेल पर कहा गया कि आगे की कार्रवाई के लिए राष्ट्रपति भवन ने गृह विभाग को पत्र भेज दिया गया है. हालांकि आगे क्या एक्शन लिया गया, इस बारे में मीडिया में कोई जानकारी नहीं है.










