सऊदी अरब और पाकिस्तान ने हाल ही में स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट (SDMA) किया था. इसके तहत दोनों देशों में से किसी एक पर हमला होता है तो इसे दोनों पर हमला माना जाएगा. अब खबरें हैं कि तुर्की भी सऊदी-पाकिस्तान के इस मिलिट्री पार्टनरशिप में जुड़ने पर विचार कर रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स में इसे इस्लामिक NATO तक की संज्ञा दी जा रही है. मालूम हो कि NATO अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों का एक मिलिट्री एलायंस है, जिसमें किसी एक देश पर हमला सभी देशों पर हमले के बराबर माना जाता है.
इस्लामिक NATO के जवाब में India का नया QUAD! पाक-तुर्की-सऊदी गठबंधन के जवाब में भारत इनसे मिलाएगा हाथ?
Mediterranean QUAD vs Islamic NATO: चर्चा है कि पाकिस्तान-तुर्की और सऊदी अरब मिलकर नया इस्लामिक नाटो बनाने जा रहे हैं. अगर ऐसा होता है तो भारत के लिए यह सीधी चुनौती होगी. ऐसे में भारत इसको काउंटर करने के लिए क्या कर सकता है. इसका एक विकल्प है नया QUAD.


ऐसे में अगर तुर्की-पाकिस्तान और सऊदी अरब का इस तरह का मिलिट्री एलायंस बनता है तो भारत के लिए यह एक चुनौती साबित हो सकता है. हालांकि सऊदी अरब से भारत के रिश्ते अभी भी अच्छे हैं, लेकिन पाकिस्तान के साथ मिलिट्री एलायंस से भारत की चिंताएं जरूर बढ़ी हैं. वहीं तुर्की खुलकर पाकिस्तान का समर्थन और भारत का विरोध करता रहा है. खासकर कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर. हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी तुर्की ने पाकिस्तान की खुलकर मदद की थी और उसे ड्रोन और अन्य टेक्नोलॉजी दी थी.
नए QUAD का विकल्पऐसे में सवाल है कि भारत तुर्की-पाकिस्तान और सऊदी अरब के इस सैन्य गठबंधन को काउंटर कैसे कर सकता है. इसके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है, नया QUAD. मालूम हो कि QUAD अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान का एक रणनीतिक ग्रुप है, जिसे मुख्य रूप से चीन के प्रभाव को बैलेंस करने के लिए बनाया गया है. भारत मध्य पूर्व और यूरोप के कुछ देशों के साथ मिलकर इसी तरह का एक नया स्ट्रैटेजिक ग्रुप बना सकता है, जिसमें मेन फोकस डिफेंस पर हो.
खास बात यह है कि ऐसा एक प्लेटफॉर्म बना भी हुआ है. बस भारत को इससे जुड़ने की देर है. यह गठबंधन है इजरायल, ग्रीस और साइप्रस का. तीनों देश पिछले 10-12 सालों से एक त्रिपक्षीय सहयोग फ्रेमवर्क पर काम कर रहे हैं. इसकी सालाना बैठक भी होती है. हाल ही में दिसंबर 2025 में हुई इसकी बैठक में तीनों देशों ने सैन्य सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. ऐसे में सऊदी-पाकिस्तान और तुर्की के अलांयस को बैलेंस करने के लिए भारत इजरायल, ग्रीस और साइप्रस के साथ जुड़ भी सकता है.
तीनों देशों से करीबी संबंधअच्छी बात यह है कि भारत के इन तीनों देशों के साथ करीबी संबंध हैं. सभी देशों की समस्याएं भी लगभग समान हैं. साइप्रस और ग्रीस तुर्की को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानते हैं. वहीं इजरायल, पाकिस्तान और तुर्की दोनों को चुनौती मानता है. यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट में चारों देशों के एक ऐसे ही गठबंधन की संभावना भी जताई गई है. रिपोर्ट में इस ग्रुप को Mediterranean QUAD कहा गया है. मालूम हो कि Mediterranean भूमध्य सागर वाले क्षेत्र को कहा जाता है.
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल, ग्रीस और साइप्रस ने भारत को “3+1” शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत और इजरायल के पारंपरिक रूप से मजबूत रक्षा संबंध रहे हैं. उनके हित समान हैं. भारत के ग्रीस और साइप्रस के साथ भी करीबी संबंध हैं. ऐसे में भारत भूमध्य सागर में अपने हित और भागीदारी के लिए इन देशों के साथ सहयोग और बढ़ा सकता है.

हालांकि भारत ने अब तक ऐसे किसी भी गठबंधन के साथ जुड़ने की कोई इच्छा नहीं जताई है. लेकिन तुर्की-पाकिस्तान और सऊदी के बीच बढ़ते सहयोग से भारत इस विकल्प पर विचार जरूर कर सकता है. रिपोर्ट में सऊदी-पाकिस्तान-तुर्की के रणनीतिक गठबंधन को भारत के लिए बड़ी रणनीतिक चिंता भी बताया गया है. जहां सऊदी वित्तीय यानी फाइनेंसियल मदद दे सकता है. तुर्की टेक्नोलॉजी में मदद कर सकता है. वहीं पाकिस्तान के पास पहले से न्यूक्लियर हथियार की क्षमता है. ऐसे में तीनों देशों का गठबंधन भारत की सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकता है.
यह भी पढ़ें- भारत-UAE के बीच क्या-क्या समझौते हुए? पीएम मोदी-MBZ ने बड़ा टारगेट रखा
हालांकि ऐसा नहीं है कि भारत इसको काउंटर करने पर काम नहीं कर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने इजरायल और अमेरिका जैसे देशों से सहयोग बढ़ाया है. साथ ही ग्रीस, साइप्रस और आर्मीनिया जैसे तुर्की के पड़ोसी देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत किया है. इसके अलावा समुद्री निगरानी बढ़ाने, सऊदी अरब और यूएई से आर्थिक रिश्ते बढ़ाने और घरेलू रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने जैसे कदम भी भारत ने उठाए हैं.
भारत ने हाल ही में UAE के साथ नया रक्षा समझौता करने की भी घोषणा की है. कुछ जानकार इसे भी सऊदी-पाकिस्तान के डिफेंस पैक्ट को बैलेंस करने की कोशिश मान रहे हैं. हालांकि भारत ने साफ किया है कि उसका और UAE का समझौता क्षेत्रीय विवादों से अलग है. भारत ने यह भी कहा है कि वह किसी भी क्षेत्रीय संघर्ष में सीधे शामिल नहीं होगा.
वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: पाकिस्तान का नया दांव, क्या Gen Z के सहारे फैलाएगा आतंक?











.webp?width=275)






.webp?width=120)



