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इस दिवाली-धनतेरस पर गोल्ड ले रहे? सर्राफ़ा व्यापारियों की ये बातें बहुत काम आएंगी

ये भी बताएंगे कि धनतेरस और सोने का यमराज से क्या रिश्ता है.

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फ़ोटो सोर्स - इंडिया टुडे
एक राजा थे, नाम था ‘हिम’. राजा हिम के बेटे को शाप था कि शादी के चौथे दिन उसकी मृत्यु हो जाएगी. आज भी लड़का या लड़की मंगली हो तो शादी में दिक्कतें आती हैं, लेकिन ये लड़का तो राजकुमार का था. शादी होनी ही थी, हो गई. राजकुमार की नयी-नवेली पत्नी आई. पत्नी समझदार थी. सो जब उसे राजकुमार के शाप के बारे में पता चला तो उसने एक प्लान बनाया, यमराज को चकमा देने का प्लान. जब चौथा दिन आया तो उसने पति से कहा कि आज रात वो सोये न. पति जागता रहे इसलिए वो उसे बाकायदा गीत-संगीत भी सुनाती रही, और इसके अलावा उसने दरवाज़े पर सोने-चांदी की कई बेशकीमती चीज़ें रख दीं. घर के आस-पास कई दीपक भी जला दिए. रात को यमराज सांप के भेस में राजा हिम के बेटे की जान लेने आए तो दियों और गहनों की चमक से अंधे हो गए और घर में घुस नहीं पाए. राजकुमार की पत्नी ने जो गहनों का ढेर जमा किया था, यमराज उसी पर बैठे रहे, और रानी का गाना सुनते रहे. सुबह यमराज को राजकुमार की जान लिए बिना ही लौटना पड़ा, क्यूंकि राजकुमार की मृत्यु की घड़ी बीत चुकी थी.
यमराज की प्रतीकात्मक तस्वीर (इंडिया टुडे) यमराज की प्रतीकात्मक तस्वीर (इंडिया टुडे)

इस लघु-कथा का सोने से क्या लेना-देना?

दरअसल माना जाता है कि चौथी रात को, यानी कार्तिक माह की त्रयोदशी को जब रानी की चालाकी से राजकुमार की शाप से जान छूटी, वो धनतेरस की रात थी. इसीलिये इस दिन सोने, चांदी के जेवरात वगैरह खरीदे जाते हैं. हालांकि कहानियां, जनश्रुतियां और मान्यताएं और भी हैं. धन्वंतरि वैसे तो योग और आयुर्वेद के आदि देवता हैं, लेकिन मान्यता ये भी है कि इस दिन माता लक्ष्मी के अलावा धन्वंतरि भी समुद्र मंथन से निकले थे. उनके हाथ में अमृत-कलश था. इसलिए कार्तिक माह की त्रयोदशी के दिन उनकी जयंती के तौर पर धनतेरस मनाते हैं और उसी अमृत-कलश के सांकेतिक रूप में बर्तन खरीदते हैं.
इस साल धनतेरस 4 नवंबर को मनाई जाएगी (फोटो सोर्स - आजतक) इस साल धनतेरस 4 नवंबर को मनाई जाएगी (फोटो सोर्स - आजतक)

धनतेरस से शुरू होकर टोटल त्योहार पूरे पांच दिन तक चलते हैं. पहला दिन धनतेरस, दूसरा नरक चौदस (दक्षिण भारत में इसका बहुत महत्त्व है), तीसरा दिन कार्तिक महीने की अमावस्या यानी दिवाली, चौथा दिन गोवर्धन पूजा और पांचवां दिन भाई-दूज का.
माता लक्ष्मी धन-समृद्धि की प्रतीक मानी जाती हैं, इसलिए दिवाली के दिन गणेश जी के साथ-साथ लक्ष्मी का भी पूजन होता है (रैंडम फोटो) माता लक्ष्मी धन-समृद्धि की प्रतीक मानी जाती हैं, इसलिए दिवाली के दिन गणेश जी के साथ-साथ लक्ष्मी का भी पूजन होता है.

टाइटल की तरफ़ वापस चलते हैं. दरअसल इस पंचदिवसीय कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चमक ज्वेलरी बेचने वालों की आंखों में रहती है. बिकता और भी बहुत कुछ है, गाड़ी से लेकर प्लेट-चम्मच तक. लेकिन सोने की बात अलग है. इस बाज़ार को धार्मिक महत्त्व से इस कदर जोड़ दिया गया है कि आदमी धनतेरस को ज़रूरी या गैर-ज़रूरी सही लेकिन कुछ न कुछ खरीदता ज़रूर है. हालांकि इन्वेस्टमेंट के लिए गोल्ड खरीदने वाले लोग कभी-कभी बड़ी गलती भी करते हैं जो आगे समझाएंगे. #सोना इतना सोना क्यूं? सोने की खरीद और उसके दिवाली लिंक पर आगे बात करेंगे. पहले जानते हैं कि क्यों पूरी दुनिया सोने पर ही टिकी हुई है, ये पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था में बादशाह की कुर्सी पर कैसे बैठा है, वो भी सदियों से. गांव की रामकली चाची से लेकर शहर के सिंहानिया अंकल तक सोने के पीछे दीवाने क्यूं हैं? मात्रा कम हो या ज्यादा, लेकिन सोने की खरीद आम बात क्यूं है? इन सवालों के जवाब के लिए वक़्त के पहिये को थोड़े उल्टा घुमाना होगा.
दुनिया में पहले बार्टर सिस्टम था. हिंदी में वस्तु-विनिमय कहते हैं. अगर करेंसी यानी मुद्रा का कांसेप्ट नहीं आया होता तो ये सिस्टम आज भी होता. यानी आप अपने खेत में उगे हुए कुछ या ढेर सारे गाज़र ‘एप्पल स्टोर’ में देते और एप्पल स्टोर वाला आपको आई फोन इलेवेन दे देता. यानी सामान के बदले सामान. हर महीने की पहली तारीख को आपको सैलरी के रूप में 32 किलो चावल, दो टूथपेस्ट, चार साबुन, एक महीने का नेटफ्लिक्स का सब्सक्रिप्शन और दिल्ली-मुंबई का एक रिटर्न टिकट मिलता. अगर करेंसी न होती तो. अब यदि आपको इनकी या इसमें से किसी चीज़ की जरूरत नहीं होती तो किसी से मिलकर अपनी चीज़ें बदल लेते. जिसे आपसे जो चाहिए होता वो ले लेता और बदले में आपको आपके काम की चीज़ें दे देता.
इस सिस्टम में एक बड़ी कमी थी, पैमाने की कमी. इस पैमाने की कमी से लोगों को अपने सामान की ही क़ीमत ज़्यादा लगती थी. मतलब खेत के गाजर वाले को लगता था कि उसके गाजर कीमती हैं और आई फोन वाले को लगता था उसके आई फोन. ये तय नहीं था कि कितनी गाज़र के बदले एक आई-फ़ोन मिलेगा. या इसका उलटा भी. ऐसे में ज़रूरत थी एक पैमाने की. पैमाना ये तय करता कि किसका दाम कितना होगा. पैमाने का मूल्य ईक्वल रहे, साथ ही सभी के लिए एक्सेप्टेबल भी हो. ये भी पता ही चल गया था कि मेटल यानी धातु से ऐसा एक पैमाना बनाया जा सकता है, जो लम्बे समय तक चलेगा.
अब बस ये तय करना बाकी था कि सिक्के बनाने के लिए कौन सी धातु इस्तेमाल की जाए जिसकी ग्लोबल एक्सेप्टेंस हो, ऐसा मेटल कोई भी हो सकता था. लोहा भी, पीतल भी और सोना (Gold) भी. चूंकि सोने की कीमत ज्यादा थी, कैरी करने में आसान था, इसलिए सोने को चुना गया. तो इस तरह पूरी अर्थव्यवस्था में पहले पैमाने के रूप में ‘सोना’ सामने आया. गाजर के बदले या आइफोन के बदले कितना सोना आएगा, या सोने के बदले के कितनी चीज़ें आएंगी, ये साफ़ होने लगा. इस पैमाने से ये भी साफ़ हो जाता कि गाजर और फ़ोन का परस्पर मूल्य कितना हो.
बात सोने से आगे बढ़ी. विश्व की सरकारों ने काग़ज़, प्लास्टिक, फ़ाइबर के नोट छापने शुरू किए. लेकिन तब भी अंडरलाइंग एसेट सोना ही था. ‘अंडरलाइंग एसेट’ मतलब, किसी देश की सरकार उसी हिसाब से पैसे छापती जितना उसके पास ‘गोल्ड रिज़र्व’ यानी सोने का भंडार होता. हालांकि अब कई देशों ने इस नियम को तिलांजलि दे दी है. #सोने का ट्रांसफॉर्मेशन  सोना अब करेंसी नहीं रह गया था. और आते-आते आज आया जहां सोने से नहीं, सोने की ही ख़रीद-फ़रोख़्त होती है. दो वजहों से. कंजंप्शन के लिए और इंवेस्टमेंट के लिए. कंजंप्शन बोले तो, सुंदर दिखने के लिए, शादी के लिए, या घर में कोई स्वर्ण मूर्ति लगानी हो, या आप सोना-चांदी च्यवनप्राश बनाते हों. और इंवेस्टमेंट बोले तो, ‘आज ख़रीद रहा, मुझे लगता है कल दाम बढ़ेंगे. जब दाम बढ़ेंगे तब बेच दूंगा.’
हालांकि इंवेस्टमेंट के लिए जो लोग डिजिटल गोल्ड खरीदते हैं वो एक तरह से फिजिकल गोल्ड बेचने वाले सर्राफ़ा मार्केट का नुकसान है.
इस बारे में हमने अक्षय रस्तोगी से बात की. अक्षय जेमोलॉजिकल इंस्टिट्यूट ऑफ़ अमेरिका से 'जेम्स और डायमंड ग्रेडिंग' का कोर्स कर चुके हैं और सर्राफे का अपना फैमिली बिज़नेस भी चलाते हैं. अक्षय कहते हैं,
सामान्य तौर पर ये ज़रूर कहा जाता है कि फिजिकल गोल्ड लेना एक सही ऑप्शन नहीं है,  लेकिन मैं इस बात को पूरी तरह सही नहीं मानता हूं. ये बात ज़रूर है कि गोल्ड पर रिटर्न्स लॉन्ग पीरियड में मिलते हैं. लेकिन सब जानते हैं कि फिजिकल गोल्ड का हमारे लिए क्या महत्व है. घर में रखा सोना सुख -दुःख के वक़्त बहुत काम आता है.
अक्षय फिजिकल गोल्ड की खरीदारी के पक्ष में दिखे और ख़ुद भी शोरूम के मालिक हैं, तो हमारा अगला सवाल ये था कि क्या फिजिकल गोल्ड बेचने वाले लोग भी कोई ऐसी स्कीम चलाते हैं जो इन्वेस्टमेंट के लिहाज से रखी गई हों? माने अगर किसी को इंवेस्टमेंट के लिए फिजिकल गोल्ड ही खरीदना है तो विक्रेता क्या स्कीम ऑफर करते हैं? इस पर अक्षय कहते हैं,
गोल्ड ख़ुद में अच्छा इन्वेस्टमेंट है, ऐसे में इन्वेस्टमेंट के लिहाज से हम कोई स्कीम नहीं चलाते, लेकिन अगर आप किसी अच्छे शोरूम से सोना खरीदते हैं तो आपको रेट बेनिफिट मिल सकता है, डिस्काउंट मिल सकते हैं और इंटरेस्ट रेट्स में भी कुछ कन्सेशन मिल सकते हैं.
सोना ख़रीदते वक़्त सबसे पहला सवाल ये होना चाहिए कि आप सोने को किसलिए ख़रीद रहे हैं. अगर इंवेस्टमेंट के वास्ते ख़रीद रहें हैं तो, कभी भी उसे ज़ेवर में न गढ़वाएं. बहुत से लॉस तो तुरंत हो जाएंगे.
सोने के जेवरात इन्वेस्टमेंट का सही तरीका नहीं हैं सोने के जेवरात इन्वेस्टमेंट का सही तरीका नहीं हैं.
#फिजिकल गोल्ड का नुक़सान अगर आप गोल्ड में इन्वेस्टमेंट करना चाहते हैं तो जाहिर है आप इससे रिटर्न की उम्मीद जरूर करेंगे. लेकिन फिजिकल गोल्ड में निवेश करना इस उम्मीद के उलट है. तमाम तरह की दिक्कतें हैं, जिनकी वजह से फिजिकल गोल्ड की खरीद इन्वेस्टमेंट के लिए ठीक नहीं कही जा सकती.
पहला है मेकिंग चार्ज. अगर आप गोल्ड किसी ज्वेलरी स्टोर से खरीदते हैं तो आपको उसके मेकिंग चार्ज के नाम पर ही 10-15% देना पड़ता है. मान लीजिए आपने 1 लाख का सोना खरीदा तो उसमें 10 हजार रुपये तो मेकिंग चार्ज के ही हो गये, सोना नब्बे हज़ार का ही मिला.
दूसरा ये कि अगर आप सोने के कंगन खरीद रहे हैं. तो उसमें सोने से कंगन बनाने के दौरान नाम मात्र को ही सही दूसरे मेटल्स भी मिक्स किये जाते हैं, रीज़न दो हैं, एक कि प्योर सोने पे बारीक डिजाइन बनाना आसान नहीं है और दूसरा मजबूती लाने के लिए.
तीसरा ये कि फिजिकल गोल्ड में आपको ठीक-ठाक रकम के साथ इन्वेस्ट करना पड़ता है, अब एकाध तोले से कम क्या ही लेंगे. इसके उलट आप ऑनलाइन गोल्ड कम-से-कम रकम के साथ भी खरीद सकते हैं. कैसे?, अगले सेक्शन में बताएंगे.
चौथी और बड़ी दिक्कत फिजिकल गोल्ड के साथ सिक्योरिटी रिस्क की है. सुरक्षित घर हो, आस-पास के लोग भरोसेमंद हों, चेन स्नेचिंग से निपट पाने का साहस हो तो ही गोल्ड लीजिये. बैंक के लॉकर में रखने जायेंगे तो वो भी ठीक-ठाक किराया लेते हैं.
बैंक लॉकर की प्रतीकात्मक तस्वीर (आज तक) बैंक लॉकर की प्रतीकात्मक तस्वीर (आज तक)

आख़िरी और सबसे बड़ी दिक्कत है लिक्विडिटी की. लिक्विडिटी को ऐसे समझिये कि इन्वेस्ट तो आपने इसीलिये किया था कि इससे पैसा बढ़े, लेकिन तब क्या करेंगे जब पैसे की ज़रूरत आन पड़े. एक तो इसे तुरंत बेचना आसान नहीं होता, और फिर जब आप ज्वेलर के पास बेचने जाएंगे तो वो मैन्यूफैक्चरिंग कॉस्ट के नाम पर कर्दा काटेगा. इसे बीच का कमीशन ही समझिए. कर्दे का परसेंटेज 15 से लगाके 30 टका तक हो सकता है. हालांकि कुछ बड़े ज्वेलर उनके यहां से खरीदा माल वहीं वापस बेचने पर कर्दा कम या नहीं लेते हैं, लेकिन फिर भी मैन्यूफैक्चरिंग कॉस्ट काटते ही हैं.
इस मैन्यूफैक्चरिंग कॉस्ट को समझने के लिए हमने सर्राफ़ा व्यापारी प्रकाश रस्तोगी से बात की. जो ऑल इंडिया बुलियन ज्वेलर एसोसिएशन के डिस्ट्रिक्ट प्रेसीडेंट भी हैं. प्रकाश कहते हैं, 
जब प्योर गोल्ड से ऑर्नामेंट्स बनाए जाते हैं तो सोना कई प्रक्रियाओं से गुज़रता है. मान लीजिए हार बनना है, तो सबसे पहले सोने की पत्ती कटती है, ढलाई और छिलाई होती है, सोने का तार बनाने में हर दस ग्राम सोने में से 50 मिलीग्राम से 100 मिलीग्राम तक सोने का लॉस हो जाता है. उसके बाद सोने के तारों को जोड़ा जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम पांच से 8 परसेंट सोने का लॉस होता है. इसके अलावा कुछ परसेंटेज प्रॉफिट ज्वेलर ले लेता है.
प्रकाश आगे ये भी कहते हैं कि अगर सोना ज्यादा कैरेट का है तो 10 से 15 परसेंट तक मैन्यूफैक्चरिंग कॉस्ट, लेबर कॉस्ट निकाल के उसको रीसेल कर बाकी कीमत मिल जाती है. 
हार वगैरह खरीदते वक़्त अगर डिज़ाइन सिंपल रहे तो रीसेल करने पर वैल्यू ज्यादा मिलेगी हार वगैरह खरीदते वक़्त अगर डिज़ाइन सिंपल रहे तो रीसेल करने पर वैल्यू ज्यादा मिलेगी

तो कुल-मिलाके इतना साफ़ है कि उंगली में रिंग पहन के वही उंगली दिखाते हुए सामने वाले से बात करनी है, माने गहना दिखाने के लिए पहनना है तब तो ठीक है. लेकिन अगर इन्वेस्ट करना है तो फिजिकल गोल्ड के बजाय कुछ और बढ़िया तरीके हैं इन्वेस्ट करने के, कौन से? आइये समझते हैं. #कैसे करें सोने में निवेश? # बिस्कुट-
आप सोने के बिस्कुट ख़रीद सकते हो, लेकिन ये इंवेस्टमेंट का बहुत पारंपरिक तरीक़ा है. इसमें भी वो सारे नुक़सान बने ही रहते हैं जो ‘कंजंप्शन’ वाले सोने को ‘इंवेस्टमेंट’ की तरह यूज़ करने में होते हैं. और ‘कंजंप्शन’ वाले सोने का एक ड्रॉबैक जो हमने अभी के लिए बचाकर रखा था, वो है GST. जो सोने के बिस्कुट पर भी लागू होती है, लेकिन बाक़ी गोल्ड इंवेस्टमेंट स्कीम्स पर नहीं.
ऐसा ही कुछ प्रकाश ने भी कहा कि अगर फिजिकल गोल्ड लेना है तो थोड़ा भारी डिज़ाइन में लें, वापसी पर कमीशन कम कटता है.
प्रकाश कहते हैं,
गोल्ड सदैव लाइट वेट के बजाय हैवी वेट में लेना चाहिए, लोग कम वजन में बड़े साइज़ की अंगूठी मांगते हैं, उसमें पत्तियों का काम बढ़ जाता है, गोल्ड का लॉस होता है, पुराने वक़्त में सोने की मोहरें चलती थीं. उनमें प्योरिटी परसेंटेज ज्यादा होता था. हल्के आइटम्स में टांका, कर्दा, बट्टा ज्यादा लगता है.
प्रकाश हॉलमार्किंग के हिसाब से बताते हैं कि अगर 75 हॉलमार्किंग या 85 हॉलमार्किंग का सोना लेते हैं तो कर्दा ज्यादा कटता है, लेकिन अगर 916 हॉलमार्किंग का सोना लें तो इसमें सिर्फ 9 परसेंट कर्दा कटेगा. इसलिए ज्वेलरी हमेशा वेटेड यानी वजनीली लेनी चाहिए, डिजाइनिंग के ऊपर न जाके सिम्प्लिसिटी की तरफ़ मूव करना चाहिए.
सोने के बिस्किट्स (फ़ोटो क्रेडिट - Reuters) सोने के बिस्किट्स (फ़ोटो क्रेडिट - Reuters)

# वर्चुअल सोना-
आप सोने में इन्वेस्ट तो करते हो, पर सोने की फ़िज़िकल डिलीवरी आपको नहीं मिलती. बल्कि ऐसे पेपर्स मिलते हैं, जिनकी अंडरलाइंग वेल्यू सोना है. मतलब इन पेपर्स में कहा गया होगा कि आप इस सोने के मालिक हैं. पेपर्स भी छोड़िए, ऑनलाइन के दौर में तो एक क्लिक से सारा काम हो जाएगा.
गोल्ड बार (रैंडम फोटो) गोल्ड बार (रैंडम फोटो)

ऐसा (वर्चुअल) सोना आप कई तरीक़े से ख़रीद सकते हो. सब कुछ पारदर्शी तरीक़े से होता है. फ़्रॉड न हों इसके लिए सरकार की, RBI की या SEBI की नज़र आपके इंवेस्टमेंट पर रहती है. बहरहाल, कई बार तो ये RBI वगैरह भी इंवेस्टमेंट स्कीम्स लेकर आते हैं. ऐसा ही एक इंवेस्टमेंट प्लान है, ‘सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड’.
#क्या है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम?
एक साल में RBI कई बार एक टाइम विंडो खोलती है, जब आप सोने में इन्वेस्ट कर सकते हो. ‘टाइम विंडो खोलती है’ मतलब, साल में कई बार ऐसे दिन आते हैं, जब आप सीधे सरकार से सोना ख़रीद सकते हो. ऑफ़ कोर्स वर्चुअल सोना. इस साल सरकार ये विंडो 4 बार खोल रही है. इस लिंक पर क्लिक करके आप RBI का नोटिफिकेशन देख सकते हैं
. पहली विंडो अक्टूबर 25 से 29, 2021 को खुली थी, इसे ‘2021-22 सीरीज़ सेवेन’ कहा जाएगा. उम्मीद है आपने इस विंडो से खरीदारी की ही होगी. नहीं की तो दूसरी विंडो 29 नवम्बर से 3 दिसंबर तक खुलेगी. ये विंडो हमेशा 5 दिन की होती है.
गोल्ड बांड्स में इन्वेस्ट करने से पहले कुछ ज़रूरी बातें जान लीजिए, इन्वेस्टमेंट का मूड बना तो आपके काम आएंगीं-
पहली बात तो ये कि आप एक साल में मिनिमम एक ग्राम सोना और मैक्सिमम 4 किलो सोना ख़रीद सकते हैं. अगर आप NGO चलाते हैं तो ये अपर लिमिट 20 किलो प्रतिवर्ष की हो जाती है. दूसरा ये कि सोना एक ग्राम के गुणांक यानी मल्टीपल में ही ख़रीद सकते हैं. ये वर्चुअल सोना 24 कैरेट का होता है. सरकार आपको इस पर 2.5% का ब्याज भी देती है. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम की मैच्योरिटी 8 साल की होती है, लेकिन आप 5 साल बाद इसे कभी भी कैश करवा सकते हैं. और लास्ट बट नॉट द लीस्ट कि ऑफ़लाइन आप ये किसी बैंक से या पोस्ट ऑफ़िस से ख़रीद सकते हैं. पर वो बड़ा लफड़े वाला काम है. फ़ॉर्म भरो, जमा करो. बेहतर है कि अगर आपका डीमेट अकाउंट है तो आप इसे ऑनलाइन ख़रीदें.
#एक रुपया लगाकर भी कर सकते हैं गोल्ड में इन्वेस्टमेंट
इस बार एक किफ़ायती स्कीम आई है. माने अगर गोल्ड में इन्वेस्ट करना चाहते हैं और आपके पास रोकड़ कम है तो भी चिंता की बात नहीं. भारत सरकार ने स्विट्ज़रलैंड के साथ मिलके एक प्राइवेट लिमिटेड उपक्रम शुरू किया है. MMTC Private Limited नाम से. MMTC-PAMP भारत का अकेला वर्ल्ड लेवल पर मान्यता प्राप्त गोल्ड रिफाइनर और फैब्रिकेटर है. इस लिंक से गूगल पे सर्च करिएगा.
यहां आप एक रुपया इन्वेस्ट करके भी 24 कैरेट का 999.9 प्योर गोल्ड ख़रीद सकते हैं. यहां भी 3 फ़ीसदी GST या बाकी किसी तरह का कोई टैक्स आपको नहीं देना है.
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से डिजिटल गोल्ड की खरीदारी को लेकर जब हमने अक्षय से ये पूछा कि एक सर्राफ़ा व्यापारी इसे किस तरह देखता है, तो उनका जवाब हमें पॉजिटिव लगा.
आप चाहें छोटे शहर से हैं या बड़े, गोल्ड इन्वेस्टमेंट को लेकर ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म से लेकर सरकारी गोल्ड बॉन्ड तक बहुत सारे टैक्स बेनिफिट और डिस्काउंट मिल जाते हैं, इसलिए ये न सोचकर कि रिटर्न्स कितने वक़्त में मिलेंगे, सभी को गोल्ड में इन्वेस्ट करना चाहिए, ये बहुत सेफ़ है. 

इसके अलावा कई पेमेंट गेटवे प्लेटफॉर्म जैसे यूपीआई वॉलेट, पेटीएम, गूगल पे और फ़ोनपे वगैरह पे भी आप ऑनलाइन सोने की खरीदारी कर सकते हैं. इन्वेस्ट करना है तो यहां भी आप एक रुपए से लेकर जितना चाहें गोल्ड में इन्वेस्ट कर सकते हैं.  इन प्लेटफ़ॉर्म पर आपको गोल्ड डिलीवरी का भी ऑप्शन मिल जाता है. अगर घर मंगवाएंगे या किसी के एड्रेस पर गिफ्ट भेजेंगे
तो ये गोल्ड 1 ग्राम से लेकर 20 ग्राम तक के सिक्कों की शक्ल में डिलीवर होगा.

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डिजिटल गोल्ड कॉइन (प्रतीकात्मक तस्वीर) डिजिटल गोल्ड कॉइन (प्रतीकात्मक तस्वीर)
#सोने का दाम और सोने में निवेश का फ़्यूचर खरीदारी कैसे करनी है ये बात हो गई. अब ज़रा समझने की कोशिश करते हैं कि गोल्ड में इन्वेस्टमेंट का फ्यूचर क्या है. दरअसल फ्यूचर का सवाल इसलिए उठाना लाज़िमी है क्यूंकि ये वक़्त कोरोना के बाद के पहले त्योहारी सीज़न का है. जब मार्केट में थोड़ी रिकवरी हुई है, लेकिन महामारियों और युद्धों का असर तो जाते-जाते जाता है न.
चूंकि बात इन्वेस्टमेंट और रिटर्न्स की है तो सोने की कीमतों का उतार चढ़ाव शेयर मार्केट की भाषा में समझने की कोशिश करेंगे. आज 1 नवम्बर को 24 कैरेट सोने का भाव प्रति 10 ग्राम 51,100 रुपये था,  जबकि 22 कैरेट सोने का रेट प्रति दस ग्राम 46,850 था. बीते दो दिनों में ये रेट इतना ही रहा, लेकिन उसके पहले यानी शुक्रवार को 24 कैरेट गोल्ड 51,270 और 22 कैरेट गोल्ड 47,000 प्रति दस ग्राम पर ट्रेंड कर रहा था. हालांकि हर दिन का रेट मार्जिन इतना स्पेसिफिकली बताने की ज़रूरत तबतक नहीं होती जबतक आप गोल्ड को कंज़ंपशन के लिए खरीदते हैं.
फिजिकल गोल्ड (रैंडम फ़ोटो) फिजिकल गोल्ड (रैंडम फ़ोटो)

ग्लोबली बात करें तो जहां डॉलर की कीमत में तेज़ी आई है वहीं सोने के दाम माने लेटेस्ट दाम कुछ घटे हैं. वजह? क्योंकि निवेशकों की नजर इस हफ्ते सेंट्रल बैंक की आगामी बैठकों पर है. डॉलर में बात करें तो गोल्ड 0.1% के गिरावट के साथ 1,805.96 डॉलर प्रति औंस के स्पॉट पर है. सोना 1800 डॉलर से ऊपर है. वजह ये भी है कि मार्केट में हाइपरइन्फ्लेशन का दबाव है. US Fed Reserve इस इन्फ्लेशन को टेम्पररी बता रहा है, लेकिन ग्लोबल मार्केट इन्वेस्टर ये मान रहे हैं कि US Federal Reserve इन्फ्लेशन के ग्राफ को कंट्रोल ही नहीं कर सकता. मई में जब इन्फ्लेशन बढ़ रहा था, USFR का कहना था कि ये इन्फ्लेशन टेम्पररी है और इस साल के अंत तक यानी दिसम्बर तक ख़त्म हो जाएगा. लेकिन अब फ़ेडरल रिज़र्व का कहना है कि महंगाई अगले साल के मिड तक जारी रह सकती है.
अब इससे गोल्ड प्राइस को फायदा होने वाला है. सोने की सप्लाई चेन ठीक करने के लिए फ़ेडरल रिज़र्व कुछ नहीं कर सकता, वजह ये है कि सोने की कीमतों में ये महंगाई कंज्यूमर डिमांड बढ़ने की वजह से नहीं, बल्कि सप्लाई में दिक्कतों की वजह से है. हालांकि हेज फंड्स यानी वो पैसा जो इन्वेस्टर्स लगाते हैं, उसका फ्लो गोल्ड की तरफ़ नहीं है. ये स्थिति पिछले कुछ वक़्त से बनी हुई है, और ये इन्वेस्टर्स वेटिंग में तब तक रहेंगे जब तक कुछ और कन्फर्मेशन नहीं आते. #सोने के रेट्स का दिवाली लिंक पिछली दिवाली और इस दिवाली सर्राफ़ा मार्केट कितना बदला है और गोल्ड रेट में क्या फ़र्क आया है, इस बारे में अक्षय कहते हैं,
ख़राब दिन बहुत लम्बे वक़्त तक नहीं चलते हैं. पिछले साल कोविड के दौरान हम सभी मेडिकली, पर्सनली और फाइनेंशियली इफ़ेक्ट ज़रूर हुए लेकिन बिज़नेस पॉइंट ऑफ़ व्यू से देखें तो इकॉनमी बूम-अप कर रही है. स्मॉल और मीडियम स्केल इंडस्ट्रीज़ फिर से शुरू हो गई हैं. त्योहार से पहले हमारे व्यापार में भी तेज़ी आई है. उम्मीद है कि त्योहार पर मार्केट और सुधरेगा. गोल्ड के रेट्स ठीक हो रहे हैं. आने वाले वक़्त में ये रेट्स 50,000 से ऊपर रह सकते हैं.  
हमने अक्षय से सवाल किया कि गोल्ड रेट्स जब दिवाली पर बढ़ते हैं तो क्यूं न दिवाली से पहले ही गोल्ड ले लिया जाए.  इसपर अक्षय कहते हैं,
ऐसा नहीं है कि गोल्ड रेट्स त्योहारों पर ही बढ़ते हैं. बजाय इसके गोल्ड की कीमत इंटरनेशनल मार्केट के एकॉर्डिंग बढ़ती-घटती है. त्योहार का सीज़न न भी हो तो भी साल में कई बार सोना महंगा हो जाता है.
इस दिवाली क्या गोल्ड रेट्स रहेंगे? इस सवाल पर प्रकाश कहते हैं,
इस दिवाली सोना 50,000 प्रति दस ग्राम के आस-पास ही रहेगा. अगर रेट्स में बढ़ोत्तरी होती भी है तो भले इसके बाद हो, लेकिन फ़िलहाल सोने का रेट जैसा आज है उसी के आस-पास रहेगा.
आपने मूवीज में देखा होगा, कोर्ट में जज अपना फैसला सुनते वक़्त कहता है कि तमाम सबूतों और गवाहों के मद्देनज़र कोर्ट ये फैसला करता है. और फिर फैसला सुना देता है. हमने भी सोने के बाज़ार और उसके दिवाली लिंक पर एक एनालिसिस करने के कोशिश की. एक्सपर्ट्स के ओपिनियन भी बताए, लेकिन हम कोई डिसीज़न मेकिंग नहीं कर रहे. माने कोई फैसला नहीं सुना रहे. सोने की पीली चमक आपको कितना लुभाती है ये आपके ऊपर है. शुरुआत में हमने आपको राजा हिम की कहानी सुनाई, उसपर भरोसा करें या किसी और कथा पर ये आपकी चॉइस है.

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