विद्या इस बात पर जो़र देती हैं कि क्लासिक फ़िल्मों को अकेला छोड़ देना चाहिए. उन्होंने, 'मुझे सदमा फ़िल्म के रीमेक में श्रीदेवी का रोल ऑफ़र किया गया था. लेकिन मैंने इसे करने से मना कर दिया. मुझे लगता है कि सदमा जैसी फ़िल्म को छेड़ा जाना नहीं चाहिए. ये एक क्लासिक फ़िल्म है. हो सकता है कि कोई इस रोल को अच्छे से निभा भी ले, लेकिन ये रोल मैं नहीं कर सकती.हो सकता है विद्या ये न चाह रही हों कि उन्हें श्रीदेवी से कंपेयर किया जाए. क्योंकि श्रीदेवी ने 'सदमा' में जो एक्टिंग की थी, उसे आज भी याद किया जाता है. बात ये भी है कि क्लासिक फ़िल्मों के जितने भी रीमेक बनते हैं वो अप टू द मार्क नहीं होते.

सदमा फ़िल्म में श्रीदेवी ने ऐसी लड़की का रोल किया था, जिसका दिमाग ब्रेन इंजरी के कारण, छह साल की बच्ची जितना हो गया था.
कुछ ऐसे रीमेक भी बने हैं, जिन्हें रीमेक से ज़्यादा मीम्स की दुकान कहेंगे तो सटीक बैठेगा. राम गोपाल वर्मा को रमेश सिप्पी की 'शोले' के साथ छेड़-छाड़ करने में ज़रा भी हिचक महसूस नहीं हुई. राम गोपाल वर्मा की आग सबसे खराब रीमेक है. अमिताभ बच्चन ने गब्बर का रोल करके, अपने डायलॉग्स के साथ सबको सदमे में डाल दिया था. अब 'हिम्मतवाला' फ़िल्म की बात करें. ओरिजनल फ़िल्म में जीतेंद्र और श्रीदेवी थे. फ़िल्म में तड़कते-भड़कते गाने थे लेकिन स्टोरीलाइन क्लीयर नहीं थी. फिर भी फ़िल्म हिट थी. साजिद खान ने अजय देवगन और तमन्ना को लेकर इसका रीमेक बनाया, जिसमें वो फ़ेल हो गए.वैसे हर रीमेक इतनी बुरी तरह नहीं पिटी. संजय लीला भंसाली की 'देवदास' को काफ़ी पसंद किया गया था. ये फ़िल्म दिलीप कुमार की 'देवदास' की रीमेक थी. लेकिन ये हर किसी के बस की बात नहीं. रोहित शेट्टी की फ़िल्म 'बोल बच्चन', अमोल पालेकर की फ़िल्म 'गोलमाल' को ट्रिब्यूट की गई थी. 'बोल बच्चन' का इस क्लासिक फ़िल्म से कोई लेना देना नहीं लगा. अजय देवगन ने बुरी एक्टिंग की थी. अभिषेक बच्चन का किरदार तो लगा कि जल्दबाज़ी में लिखा गया है. वैसे इस फ़िल्म ने बहुत कमाई की थी. भगवान जाने ये चमत्कार कैसे हुआ.

फ़िल्म 'शोले' के एक सीन में जय और वीरू.
उमराव जान में रेखा ने जिस तरह की एक्टिंग की थी, आज कोई वो रोल करने बैठे तो शायद ही उस लेवल को छू पाए. ऐश्वर्या राय ने कोशिश की, लेकिन वो रेखा को मैच नहीं कर पाईं. चंद्र बरोट की 'डॉन' में अमिताभ बच्चन थे. शाहरुख खान को लेकर इसका रीमेक बनाया फ़रहान अख्तर ने. अग्निपथ और ये दोनों डॉन फ़िल्में, सबूत हैं इस बात का कि मॉर्डन टाइम का ध्यान रखते हुए रीमेक बनाया जाए, तो वो त्रासदी नहीं बनेगी. ऋषि कपूर और टीना मुनीम की फ़िल्म कर्ज़ का रीमेक बना- कर्ज़ (Karzzzz...) जिसमें हिमेश रेशमिया जैसे एक्टर थे. नई 'ज़ंजीर', जिसमें राम चरण थे. ये दोनों फ़िल्में हमारी सबसे बुरी यादों में से एक हैं.
आने वाले टाइम में राजेश खन्ना और तनुजा स्टारर 'हाथी मेरे साथी' का भी मॉर्डन तड़के के साथ रीमेक बन रहा है. साथ ही राजेश खन्ना की एक और क्लासिक फ़िल्म 'इत्तेफ़ाक' के रीमेक का ट्रेलर आ चुका है, जिसमें सिद्धार्थ मल्होत्रा और सोनाक्षी सिन्हा हैं.
ये स्टोरी 'DailyO' के लिए विश्वदीप घोष ने लिखी है.










