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अमित शाह ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर पर खुल्लम-खुल्ला झूठ बोला है

जाने में या अनजाने में, लेकिन है ऐसा ही...

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साध्वी प्रज्ञा पर आरएसएस प्रचारक सुनील जोशी की हत्या का भी आरोप था. फाइल फोटो.
'जहां तक साध्वी प्रज्ञा का सवाल है तो कहना चाहूंगा कि हिंदू टेरर के नाम से एक फर्जी केस बनाया गया था. दुनिया में देश की संस्कृति को बदनाम किया गया. कोर्ट में केस चला तो इसे फर्जी पाया गयाः श्री अमित शाह.' ये एक ट्वीट किया गया बीजेपी फॉर इंडिया के ट्विटर हैंडल से और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के नाम से.
ये ट्वीट हुआ 21 अप्रैल, 2019 के दिन. इसके बाद से सोशल मीडिया पर अमित शाह की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. कोई उनसे पूछ रहा है कि 'कोर्ट का फैसला कब आया?' कोई कह रहा है कि 'अब ये मत कह देना कि लोग धमाके से नहीं, सूर्यवंशम वाली खीर खाकर मरे थे.'
असल में अमित शाह साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को क्लीन चिट देकर बुरी तरह घिर गए हैं. उन्होंने जाने-अनजाने झूठ बोला है. या यूं कहें कि उन्होंने आधा सच बोला है. सच क्या है? साध्वी प्रज्ञा मालेगांव ब्लास्ट केस में अभी जमानत पर बाहर हैं. उनको एनआईए ने अपनी जांच में क्लीन चिट दी है. अदालत ने बरी नहीं किया है. बॉम्बे हाईकोर्ट में उन्होंने लिखकर दिया था कि उनको ब्रेस्ट कैंसर है. मेडिकल रिपोर्ट और इलाज की जरूरत को देखते हुए हाईकोर्ट ने उनको जमानत दे दी थी. 25 अप्रैल, 2017 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा को सशर्त जमानत दी थी. महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए एक विस्फोट में 6 लोग मारे गए थे. ये ब्लास्ट मोटरसाइकल के जरिए किया गया. महाराष्ट्र एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड यानी ATS ने अपनी जांच में उन्हें मालेगांव बम धमाके की 'मुख्य साजिशकर्ता' माना है. साध्वी पर क्या आरोप हैं? साध्वी पर तीन आरोप हैं- 1. जो मोटरसाइकल इस विस्फोट के लिए इस्तेमाल की गई, वो साध्वी प्रज्ञा ने अपने एक करीबी रामचंद्र उर्फ रामजी कालसांगरा को मुहैया कराई थी. कालसांगरा अब तक फरार है. 2. बम धमाके के आरोपियों के साथ साध्वी प्रज्ञा की फोन पर बातचीत रिकॉर्ड की गई है. 3. धमाके से पहले सभी आरोपियों की भोपाल में एक बैठक हुई थी, इसमें साध्वी प्रज्ञा मौजूद थीं.
सबसे पहली गिरफ्तारी साध्वी प्रज्ञा की हुई थी, क्योंकि धमाके में इस्तेमाल की गई बाइक की मालिक साध्वी प्रज्ञा ही थीं.
सबसे पहली गिरफ्तारी साध्वी प्रज्ञा की हुई थी, क्योंकि धमाके में इस्तेमाल की गई बाइक की मालिक साध्वी प्रज्ञा ही थीं.

केस किस स्थिति में है? महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए विस्फोट में 6 लोग मारे गए थे. और 100 के करीब घायल हुए थे. इस केस की शुरुआती जांच महाराष्ट्र की एटीएस यानी आतंक निरोधी दस्ते ने की. बाद में ये केस नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी यानी एनआईए यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दिया गया. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक दोनों ही एजेंसियों ने ये माना कि मोटरसाइकल के जरिए बम रखने के आरोपी रामचंद्र कालसांगरा और संदीप डांगे हैं. और ये मोटरसाइकिल साध्वी प्रज्ञा के नाम थी. एनआईए अदालत ने प्रज्ञा ठाकुर को बरी करने की याचिका खारिज करते हुए कहा कि इन सब सबूतों की फिलहाल अनदेखी नहीं की जा सकती है.
इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक इस केस में अब तक 106 गवाहों के बयान हो चुके हैं. बयान दर्ज कराने वाले ज्यादातर विस्फोट के घायल हैं. प्रज्ञा ठाकुर पिछली बार 30 अक्टूबर, 2018 को अदालत में पेश हुई थीं. उस वक्त उनके खिलाफ आरोप तय किए गए थे. तब उन्होंने अदालत से कहा था कि वे दोषी नहीं हैं. अदालत में सुनवाई के दौरान प्रज्ञा ठाकुर व्हील चेयर के जरिए पहुंची थीं. उन्होंने कहा कि उन पर कांग्रेस ने साजिश के तहत आरोप लगाए थे. हाईकोर्ट में दी जमानत अर्जी में भी प्रज्ञा ठाकुर ने अदालत को बताया था कि वे ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हैं. मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया कि वे बेहद कमजोर हो गई हैं. और बिना सहारे के चल फिर नहीं सकती हैं. इसी आधार पर उनको जमानत मिली थी.
आरएसएस प्रचारक की हत्या के केस में बरी हो चुकी हैं साध्वी प्रज्ञा पर आरएसएस प्रचारक सुनील जोशी की हत्या का भी आरोप था. जोशी, 29 दिसंबर, 2007 को देवास में मारे गए थे. उनका नाम मक्का मस्जिद, समझौता और मालेगांव विस्फोट मामलों में लिया गया था. इस केस में देवास पुलिस ने प्रज्ञा ठाकुर और दूसरे लोगों को 23 अक्टूबर, 2008 को गिरफ्तार किया था. इस केस में साध्वी के साथ 8 दूसरे आरोपी थे. इस केस में 1 फरवरी, 2017 को देवास जिला अदालत ने साध्वी प्रज्ञा समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया था.
अमित शाह की बात किस तरह गलत है प्रज्ञा ठाकुर RSS प्रचारक की हत्या के केस में बरी हो चुकी हैं. लेकिन बीजेपी ने अपने ट्वीट में अमित शाह के हवाले से जो 'हिंदू आतंक' का संदर्भ दिया है, वह RSS प्रचारक की हत्या के केस से नहीं जुड़ता. और मालेगांव ब्लास्ट में प्रज्ञा ठाकुर बरी नहीं हुई हैं, वह जमानत पर बाहर हैं. कोर्ट ने अभी कोई फैसला नहीं सुनाया है.


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