आपको ध्यान होगा कि पिछले साल सितंबर के महीने में भारत में G20 समिट का आयोजन था. दुनिया भर के देश आने थे. दिल्ली में ज़ोरशोर से तैयारियां चल रही थीं. और भारत पहुंचने वाली सबसे पहली राष्ट्राध्यक्ष थीं शेख़ हसीना (Sheikh Hasina). भारत ने उन्हें मेहमान की हैसियत से बुलाया था.
इस सेल्फी में बांग्लादेश में मचे बवाल की कहानी छिपी है?
Bangladesh Protest: अमरीका को बांग्लादेश चुनाव की इतनी चिंता थी क्यों? इसके पीछे एक तीन वर्ग किलोमीटर का समुद्री टापू है. ये छोटा-सा टापू बंगाल की खाड़ी में मौजूद है, और आधिकारिक रूप से बांग्लादेश की प्रॉपर्टी है. इस टापू का नाम है - सेंट मार्टिन आइलैंड.


G20 समिट शुरू हुई, तो शेख़ हसीना की अमरीका के राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ मीटिंग हुई. इस मीटिंग के बाद हसीना और बाइडन ने साथ में सेल्फ़ी ली. इस सेल्फ़ी में पीछे शेख़ हसीना की बेटी भी दिखाई दे रही थी.
ये सेल्फ़ी शेख़ हसीना के लिए संजीवनी बूटी थी. दरअसल शेख़ हसीना लंबे समय से चुनाव को लेकर देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) का विरोध झेल रही थीं. BNP एक ऐसी पार्टी है, जो मूलतः दक्षिणपंथी है.
इस सेल्फ़ी के पहले तक बांग्लादेश में ये बहस चल रही थी कि अमरीका के ज़्यादा पास कौन है? शेख़ हसीना की आवामी लीग (AL) या BNP.
और ये बहस बढ़ी कैसे? दरअसल साल 2024 में बांग्लादेश में आम चुनाव होने थे. उसके पहले अमरीका की ज़ुबान पर इस बात की फफूंद लग गई कि उसे बांग्लादेश में ‘फ्री और फ़ेयर चुनाव’ होने की चिंता है.
इसको देखते हुए अमरीका ने पहला काम किया कि बांग्लादेश के RAB - यानी रैपिड एक्शन बटालियन पर सैंक्शन लगा दिये. ये साल 2021 की बात है. RAB बांग्लादेश की सबसे इलीट फ़ोर्स है, जो आतंकरोधी कार्रवाइयां करती रही है.
इसी RAB ने ही कई मौक़ों पर ऐसे उग्रवादी संगठनों को ख़त्म किया, जो भारत विरोधी एजेंडे पर काम करते थे. लेकिन इसी RAB पर ये भी इल्ज़ाम लगे कि इसने भरी दुपहरी लोगों को ग़ायब करवा दिया. लोगों को बिना किसी पूछताछ के मार गिराया. ये भी कहा गया कि ये सारी कार्रवाई शेख़ हसीना के कहने पर हो रही है.
बहरहाल, अमरीका द्वारा सैंक्शन लगने के बाद RAB की गतिविधि में थोड़ी कमी देखी गई.
फिर साल 2023 में शेख़ हसीना के साथ सेल्फ़ी खींचने के बाद अमरीका ने एक और पत्ता फेंक दिया. उसने बांग्लादेश के कुछ वर्ग के लोगों पर वीज़ा बैन लगाना शुरू कर दिया. कारण वही - चुनाव फ्री और फ़ेयर होने चाहिए. जिन पर बैन लगाया गया, उसमें सत्ताधारी पार्टी, सरकार और विपक्ष के नेता शामिल थे.
गौर करिएगा कि जिस समय अमरीका बैन लगा रहा था, उस समय संयुक्त राष्ट्र की बैठक में हिस्सा लेने के लिए शेख हसीना खुद अमरीका में थीं.
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लेकिन अमरीका को बांग्लादेश चुनाव की इतनी चिंता थी क्यों? इसके पीछे एक तीन वर्ग किलोमीटर का समुद्री टापू है. ये छोटा-सा टापू बंगाल की खाड़ी में मौजूद है, और आधिकारिक रूप से बांग्लादेश की प्रॉपर्टी है. इस टापू का नाम है - सेंट मार्टिन आइलैंड.
अब आपको पता ही है कि बांग्लादेश के बगल में बसे हुए म्यांमार में लंबे समय से सैन्य संघर्ष चल रहा है. सेना और उग्रवादियों के बीच खूनी युद्ध चल रहा है. और ऐसे म्यांमार की इस सेंट मार्टिन आइलैंड से दूरी आठ किलोमीटर की है.
और इस आइलैंड को लेकर म्यांमार भी वही बदमाशी करता आया है, जैसी चीन लद्दाख या अरुणाचल को लेकर करता है. म्यांमार अक्सर इस टापू को अपने आधिकारिक नक्शे में ऐसे दिखाता है, जैसे टापू म्यांमार की प्रॉपर्टी हो.
बांग्लादेश लंबे समय से अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट और आपसी बातचीत से इस समस्या को सुलझाता रहा. लेकिन साल 2023 से स्थिति असामान्य हो गई. म्यांमार ने इस आइलैंड पर फायरिंग शुरू कर दी. आइलैंड पर आने-जाने वाली नावों पर गोले दागे जाने लगे. लिहाजा बांग्लादेश ने इस आइलैंड पर नाव और हवाई जहाज भेजने काफी कम कर दिया. इस आइलैंड पर खाने पीने के सामान की दिक्कत हो गई थी.
इस आइलैंड को लेकर बांग्लादेश म्यांमार से जूझ ही रहा था, तभी अमरीका ने भी इस आइलैंड पर एक बार फिर अपनी नजरें इनायत कीं. अमरीका ने बांग्लादेश पर दबाव डालना शुरू किया कि वो ये आइलैंड अमरीका को दे दे, जिस पर वह एक सैन्य बेस का निर्माण करेगा.
ये अमरीका की कोई नई मांग नहीं थी. जब बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान था, तब भी जनरल अयूब खान के खिलाफ प्रोटेस्ट हुए थे कि उन्होंने सेंट मार्टिन आइलैंड को अमरीका के पास रेहन पर रख दिया है. साल 1971 में बांग्लादेश की आजादी के बाद से तीन-चार मौकों पर ये खबरें उड़ीं कि अमरीका इस आइलैंड पर बेस बनाना चाहता है.
साल 2001 में पत्रकारों को संबोधित करते हुए तो शेख हसीना ने खुल्लमखुल्ला बोल भी दिया था
मैं जानती हूं कि BNP सत्ता में कैसे आई. उन्होंने तेल बेचा भारत को, और जमीन बेच रहे हैं अमरीका को. सरकार बनाएंगे तो सेंट मार्टिन आइलैंड को अमरीका को बेच देंगे.
जब जो बाइडन राष्ट्रपति बने तो, फिर से अमरीका ने बांग्लादेश में रुचि दिखाई. आइलैंड पर सैनिक बेस की खबरें चलने लगीं.
ये खबरें बाहर भी न आती, अगर शेख हसीना ने ही मई 2024 में इशारों में न बोला होता कि
गोरी चमड़ी वाले एयरबेस, हवाई पट्टी मांग रहे हैं. दरअसल वो लोग बांग्लादेश और म्यांमार के कुछ हिस्सों को काटकर एक ईसाई स्टेट बनाना चाह रहे हैं. वो इसमें कभी सफल नहीं होंगे.
ईसाई स्टेट की बात जहर बुझे तीर की तरह चुभी.
लेकिन अमरीका ने ऐसी मांग रखी क्यों?दरअसल शेख हसीना की सरकार एक चालाकी कर रही थी. वो अमरीका से सहयोग की बात करती, लेकिन चायनीज़ निवेश को देश में एंट्री देतीं. वो भारत की सहिष्णु होने का राग अलापती, लेकिन चीन की मदद से देश में बंदरगाह का निर्माण करवाती.
भारत के पास तो बांग्लादेश दक्षिण एशिया में अकेला ऐसा देश बचा था, जिसके साथ उसके अच्छे संबंध थे. लेकिन अमरीका को चीन का दक्षिण एशिया में बढ़ता प्रेशर पच नहीं रहा था. लिहाजा उसने उधर वीजा पर बैन लगाया, और इधर आइलैंड की मांग रख दी.
कहा जाता है कि अमरीका ने कहा था कि अगर हसीना सरकार आर्मी बेस बनाने दे, तो वो उन्हें सत्ता में बने रहने में मदद करेंगे. हसीना सरकार बची भी रहती, और अमरीका साउथ एशिया में बड़ा कद बना पाता.
लेकिन हसीना ने पत्रकारों से बात करते हुए साफ कर दिया था,
आवामी लीग ऐसा कभी नहीं करेगी, लेकिन BNP का बस चले तो वो ये काम कर दे.
इशारों में हसीना ने साफ कह दिया था कि BNP के पीछे अमरीका का हाथ है. अगर वो साथ नहीं देंगी तो BNP और साथ में जमात की मदद से अमरीका सरकार गिराने का काम करेगी, ऐसे भी इशारे किये गए थे.
और इस सारे घटनाक्रम के बीच कुछ कहानियां सामने आईं -
1 - अमरीका सरकार के सचिव डॉनल्ड लू ने बांग्लादेश के एक के बाद एक तीन दौरे किये
2 - आखिरी दौरा मई के महीने में हुआ, जिसमें लू बांग्लादेश के अलावा भारत और श्रीलंका भी आए
3 - CIA ने बांग्लादेश सरकार पर प्रेशर बनाने के लिए दो उग्रवादी संगठनों से सांठगांठ की. एक - कुकी-चिन नेशनल फ्रन्ट (KNF) और दो - यूनाइटेड लिबरेशन फ्रन्ट ऑफ असोम (ULFA)
और एक दिन खबर आई कि अमरीका की बात न मानने वाली, लेकिन चुनावी धांधली करवाने वाली शेख हसीना ने इस्तीफा दे दिया. और बांग्लादेश की सड़कों पर पागल भीड़ दौड़ रही है.
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