The Lallantop

अमेरिका नाम का बदनाम है? भारतीयों को डिपोर्ट करने में 'मित्र देश' ही सबसे आगे

विदेश मंत्रालय के 2021 से 2025 तक के आधिकारिक डेटा में भारतीय नागरिकों के डिपोर्टेशन की चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है. अमेरिका से ज्यादा खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने भारतीय नागरिकों को अपने मुल्क से बेदखल किया है.

Advertisement
post-main-image
किस देश ने कितने भारतीय निकाले (फोटो- AP)

‘बड़े बे-आबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले…’ पिछले साल हम भारतवासियों ने कुछ-कुछ ऐसा ही महसूस किया होगा. जब दुनियाभर के अखबारों में अमेरिका से डिपोर्ट किये जाने वाले हिंदुस्तानियों की तस्वीरें छपीं. बंधे हाथ, पैरों में बेड़ियां और चेहरे पर डिटेंशन सेंटर में मिले अपमान की झलक.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

प्रेसीडेंट ट्रंप ने अमेरिका से ‘एलियन्स’ (अवैध अप्रवासियों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला अमेरिकी शब्द) को निकालने का ऐलान किया. देखते ही देखते इंडियावालों को यकीन हो गया कि अमेरिका ही डिपोर्टेशन में नंबर वन है. मगर आपको ये जानकर हैरानी होगी कि असल में ऐसा नहीं है. 

भारत सरकार की मानें तो भारतवालों को डिपोर्ट करने वाले देशों में अमेरिका से ऊपर दो ऐसे मुल्कों का नाम है. जिन्हें भारत का अच्छा दोस्त माना जाता है. दोस्त तो अमेरिका भी खुद को कहता है. मगर हम जिन मुल्कों की बात कर रहे हैं, उनके हुक्मरान से पीएम मोदी के रिश्ते बड़े मजबूत हैं. यहां तक कि उनमें से एक ने तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा है.

Advertisement

टीवी डिबेट में अक्सर उंगली सीधे अमेरिका पर उठती है. सोशल मीडिया पर भी वही सबसे बड़ा खलनायक बना दिया जाता है. लेकिन जब Ministry of External Affairs ने संसद में आधिकारिक जवाब दिया और 2025 के आंकड़े सामने रखे, तो कहानी का रुख बदल गया.

विदेश मंत्रालय ने साफ बताया कि यह संख्या उन भारतीय नागरिकों की है. जिन्हें संबंधित देशों ने अपने कानूनों के तहत वापस भेजा. यानी यह कोई अंदाजा नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़े हैं.

info
विदेशों से डिपोर्ट होने वाले भारतीय नागरिक पर आंकड़ा जारी (फोटो- इंडिया टुडे)

अब एक-एक करके समझते हैं कि भारत के नागरिकों को अपने यहां से डिपोर्ट करने वाले टॉप 10 मुल्क कौन से हैं.  

Advertisement
नंबर 10: लाओस

छोटा सा दक्षिण पूर्व एशियाई देश जहां हाल के सालों में साइबर ठगी के कई अंतरराष्ट्रीय गिरोह पकड़े गए. 2025 में लाओस से 1501 भारतीय नागरिक वापस भेजे गए.

अगर पीछे देखें तो 2021 और 2022 में संख्या सिर्फ तीन-तीन थी. जबकि 2023 में 74 और 2024 में 244 भारतीय नागरिक लाओस से डिपोर्ट किए गए. यानी चार साल तक नाममात्र की संख्या और फिर एकदम उछाल.

कई मामलों में सामने आया कि भारतीय युवाओं को नौकरी के नाम पर वहां ले जाया गया. बाद में वे संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों में फंस गए. स्थानीय कार्रवाई हुई तो पासपोर्ट जब्त हुए और वापसी की नौबत आई.

नंबर 9: म्यांमार

भारत का वो पड़ोसी देश जो लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता और सीमाई चुनौतियों से जूझ रहा है.

2025 में 1594 भारतीयों को म्यांमार से निकाला गया. पहले के सालों में ये संख्या कम थी. 2021 में शून्य, 2022 में 338 और 2023 में 89. साल 2024 में म्यांमार ने 147 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया. मतलब 2024 से 2025 को बीच दस गुना से भी ज्यादा का उछाल.

इस बढोत्तरी की वजह भी है. भारत-म्यांमार सीमा खुली और संवेदनशील दोनों मानी जाती है. कुछ लोग बिना वैध दस्तावेज सीमा पार कर जाते हैं. कुछ साइबर ठगी नेटवर्क में फंसते हैं. जब वहां सुरक्षा अभियान चलता है तो बड़ी संख्या में लोग पकड़े जाते हैं.

नंबर 8: बेल्जियम

वह देश जिसे एशिया और अफ्रीका से आने वालों के लिए यूरोप का अहम प्रवेश द्वार कहा जाता है और जो शेंगेन क्षेत्र का हिस्सा है.

भारतवालों को डिपोर्ट करने में ये मुल्क भी पीछे नहीं है. 2025 में 1954 भारतीय नागरिक बेल्जियम से वापस भेजे गए. हैरानी की बात ये है कि ये उछाल सिर्फ एक साल में आया. इससे पहले 2021 से लेकर 2024 तक बेल्जियम ने कुल 42 भारतीयों को ही डिपोर्ट किया था.

जानकारों की मानें तो बड़ी संख्या में बेल्जियम जाने वाले लोग शेंगेन वीजा लेकर पहुंचते हैं. कुछ लोग वीजा अवधि से ज्यादा रुक जाते हैं. कुछ शरण की अर्जी लगाते हैं, जो बाद में खारिज हो जाती है.

यूरोप के कानून बेहद स्पष्ट हैं. आवेदन खारिज तो वापसी तय.

आगे बढ़ने से पहले ये जान लेते हैं कि आखिर ये शेंगेन वीजा क्या है. शेंगेन वीजा (Schengen Visa) एक ऐसा दस्तावेज़ है जो धारक को यूरोप के 29 शेंगेन देशों में बिना किसी अतिरिक्त आंतरिक सीमा नियंत्रण के घूमने की अनुमति देता है. यह मुख्य रूप से पर्यटन, व्यवसाय या छोटी अवधि के प्रवास (180 दिनों की अवधि में अधिकतम 90 दिन) के लिए है.

नंबर 7: थाईलैंड

इंडियावालों के लिए थाईलैंड जाना को बड़ी बात नहीं है. इस मुल्क में हर साल भारतीय पर्यटकों की लंबी कतारें देखने को मिलती है. यहां का टूरिस्ट वीजा हासिल करना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है.

मगर वहां जाना जितना आसान है. वहां से डिपोर्ट होने के चांस भी उतने ही स्ट्रॉन्ग हैं. 2025 में 2044 भारतीय नागरिक थाईलैंड से वापस भेजे गए.

2021 में ये संख्या 256 थी. जबकि 2022 में 586, 2023 में 967 और 2024 में 647 भारतीयों को थाईलैंड से डिपोर्ट किया गया. विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2025 में थाईलैंड से भी डिपोर्ट किये जाने वाले भारतीयों की संख्या में तेज उछाल आया है.

अब इसके संभावित वजह की चर्चा भी कर लेते हैं. कई लोग पर्यटन वीजा पर थाईलैंड जाते हैं. और फिर काम तलाशने लगते हैं. लेकिन वीजा की शर्तें साफ होती हैं. नियम तोड़ने पर वापसी लगभग तय है.

नंबर 6: ओमान

एक ऐसा खाड़ी देश जहां बड़ी संख्या में भारतीय कामगार निर्माण और सेवा सेक्टर में काम करते हैं. मगर इतनी ही बड़ी संख्या ओमान से डिपोर्ट किये जाने वाले भारतीयों की भी है.

2025 में 2241 भारतीय ओमान से वापस भेजे गए. जबकि 2021 में ये संख्या 1391 और 2022 में 1927 थी. 2023 में ओमान ने 4111 भारतीयों को डिपोर्ट किया था. जबकि 2024 में ये तादाद 3035 थी. यानी आंकड़ों के मुताबिक 2025 में डिपोर्ट किये जाने वाले भारतीयों की तादाद पिछले तीन सालों में कम हो रही है.

ओमान में स्पॉन्सर सिस्टम लागू है. वर्क परमिट और रेजिडेंसी का नवीनीकरण समय पर न हो तो व्यक्ति अवैध श्रेणी में आ सकता है. नतीजा डिपोर्टेशन.

नंबर 5: कुवैत

वह देश जो भारतीय कामगारों के लिए दशकों से रोजगार का बड़ा केंद्र रहा है और जहां समय-समय पर अवैध प्रवासियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाए जाते हैं.

2025 में 2608 भारतीय कुवैत से वापस भेजे गए. 2021 में ये संख्या 2910 थी. जबकि 2022 में 3820, 2023 में 4517 और 2024 में 2055 भारतीयों को कुवैत से बाहर का रास्ता दिखाया गया. यहां 2024 के मुकाबले 2025 में डिपोर्ट होने वाले भारतीयों की तादाद में हल्की बढ़त दर्ज की गई.

अब बात संभावित वजहों की कर लेते हैं. दरअसल जब कुवैत में जांच अभियान तेज होता है तो संख्या एकदम ऊपर चली जाती है. फिर कुछ सालों में कम भी हो जाती है.

नंबर 4: मलेशिया

दक्षिण पूर्व एशियाई देश जहां निर्माण, प्लांटेशन और सेवा क्षेत्र में बड़ी संख्या में विदेशी कामगार काम करते हैं. ये वो देश है जहां दस्तावेजों की जांच समय-समय पर सख्त की जाती है.

2025 में 4207 भारतीय मलेशिया से निकाले गए. जबकि 2021 में ये संख्या 2386 और 2022 में 1600 थी. 2023 में 2830 भारतीयों को मलेशिया से डिपोर्ट किया गया. जबकि 2024 में से तादाद बढ़कर 4053 हो गई. यानी 2022 से 2025 तक साल दर साल इजाफा दर्ज किया गया.

वजह डिपोर्टेशन के वजहों की बात करें तो यहां भी आम वजह वीजा अवधि से ज्यादा रुकना या वर्क परमिट की समस्या रही.

नंबर 3: अमेरिका

वह देश जिसे लेकर भारत में सबसे ज्यादा बहस होती है और जहां जाना आज भी लाखों युवाओं का सपना है. वो क्या कहते हैं- अमेरिकन ड्रीम… मगर सपने टूटते भी हैं और अमेरिका के मामले में इन दिनों कुछ ज्यादा ही टूट रहे हैं.

अब बात आंकड़ों की कर लेते हैं. 2025 में 3414 भारतीय अमेरिका से डिपोर्ट किए गए. जबकि 2021 में ये संख्या महज 805 थी. साल 2022 में 862, 2023 में 617 और 2024 में 1368 भारतीय अमेरिका से डिपोर्ट किए गए. 

विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2024 से 2025 के बीच तेज बढ़ोतरी दिखती है.

अमेरिका में डिपोर्टेशन एक कानूनी प्रक्रिया के तहत होता है. इमिग्रेशन अदालत सुनवाई करती है, आदेश जारी होता है, फिर व्यक्ति को वापस भेजा जाता है. बाकी अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों के बारे में तो आप जानते ही हैं.

नाम बड़ा है, इसलिए चर्चा भी बड़ी होती है. लेकिन कुल संख्या में अमेरिका तीसरे स्थान पर है.

नंबर 2: सऊदी अरब

वह खाड़ी देश जहां लाखों भारतीय वर्षों से काम कर रहे हैं और जहां श्रम कानूनों का पालन सख्ती से कराया जाता है.

2025 में 9570 भारतीय सऊदी अरब से वापस आए. जबकि 2021 में 22368 और 2022 में 34802 भारतीय सऊदी से डिपोर्ट किए गए. 2023 में ये संख्या 37134 थी. जबकि साल 2024 में 14066 को डिपोर्ट किया गया.

अगर 5 सालों की तुलना करें तो पहले तीन साल में बेहद ऊंची संख्या रही. फिर गिरावट आई.

अब फिर वही सवाल, आखिर वजह क्या है? जवाब है- इकामा यानी रेजिडेंसी परमिट का नवीनीकरण समय पर न हो तो व्यक्ति अवैध माना जाता है. बड़े अभियान के दौरान हजारों लोग एक साथ पकड़े जाते हैं.

नंबर 1: संयुक्त अरब अमीरात

वह देश जो भारतीयों के लिए खाड़ी का सबसे बड़ा रोजगार केंद्र है और जिसके साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी की अक्सर मिसाल दी जाती है.

2025 में 13887 भारतीयों को संयुक्त अरब अमीरात से वापस भेजा गया. ये संख्या साल 2021 में 2765 थी. जो कि 2022 में बढ़कर 6075 हो गई. जबकि 2023 में 7346 और 2024 में 12118 भारतीय यूएई से डिपोर्ट किए गए. 

मतलब लगातार हर साल डिपोर्ट किये जाने वालों की संख्या में इजाफा. इसकी वजह भी बड़ी सॉलिड है.

यूएई में डिजिटल सिस्टम बेहद मजबूत है. वीजा स्टेटस की निगरानी सख्ती से होती है. ओवरस्टे या दस्तावेज की गड़बड़ी सामने आते ही कार्रवाई हो जाती है.

ये भी पढ़ें: संसद में विपक्ष से अलग तेवर दिखाती TMC, क्या दिल्ली में लिख रही है बंगाल चुनावों की स्क्रिप्ट?

पांच साल का पूरा हिसाब

अब पांच साल की पूरी तस्वीर एक साथ देखिए. तभी समझ आएगा कि कहां गिरावट है और कहां लगातार बढ़त.

देश20212022202320242025
संयुक्त अरब अमीरात 2765607573461211813887
सऊदी अरब223683480237134140669570
अमेरिका80586261713683414
मलेशिया23861600283040534207
कुवैत29103820451720552608
ओमान13911927411130352241
थाईलैंड2565869676472044
बेल्जियम8101951954
म्यांमार0338891471594
लाओस33742441501

यानी पांच साल की पूरी तस्वीर देखें तो खाड़ी देश कुल मिलाकर सबसे ऊपर हैं. अमेरिका चर्चा में भले ज्यादा रहता हो, लेकिन कुल आंकड़ों में वह तीसरे स्थान से भी नीचे चला जाता है. पांच सालों के कुल आंकड़ों को इस ग्राफिक्स के जरिए एक बार फिर समझने की कोशिश करते हैं.

Info
सोर्स- विदेश मंत्रालय का संसद में दिया गया जवाब

ये वही आधिकारिक आंकड़े हैं, जिन्हें विदेश मंत्रालय ने संसद में रखा है.

संदेश साफ है, विदेश जाना मतलब सिर्फ टिकट और वीजा नहीं होता. वह गांव की उम्मीद होती है. घर की किस्मत बदलने की चाह होती है. लेकिन कानून भावनाओं से नहीं चलता.

अमेरिका पर उंगली उठाना आसान है. पूरी सूची पढ़ना थोड़ा मुश्किल. लेकिन जब पढ़ते हैं तो समझ आता है कि तस्वीर कहीं ज्यादा जटिल है.

खाड़ी के वही देश जिनके साथ भारत के रिश्ते सबसे मजबूत बताए जाते हैं, वही सूची में ऊपर हैं. इसका मतलब ये नहीं है कि रिश्ते खराब हैं. इसका मतलब यह है कि नियम सब पर बराबर लागू होते हैं.

हर डिपोर्टेशन के पीछे एक चेहरा है. एक परिवार है. एक कहानी है जो एयरपोर्ट के आगमन गेट (Arrival Gate) पर खत्म नहीं होती, बल्कि वहीं से फिर शुरू होती है.

विदेश का सपना देखिए. लेकिन कागज मजबूत रखिए. क्योंकि दुनिया भावनाओं से नहीं, दस्तावेजों से चलती है. 

वीडियो: अमेरिका से डिपोर्ट हुए गुजरात के लोग घरों से गायब क्यों हैं?

Advertisement