फवाद मिर्ज़ा. घुड़सवार हैं. घुड़सवारी नाम के खेल में भारत को रिप्रेजेंट करते हैं. फवाद इस साल होने वाले टोक्यो 2020 ओलंपिक खेलों में उतरेंगे. दो बार के एशियन गेम्स मेडलिस्ट मिर्ज़ा का ओलंपिक क्वॉलिफिकेशन पक्का हो गया है. घुड़सवारी को चलाने वाली इंटरनेशनल फेडरेशन (FEI) की ताजा रैंकिंग के मुताबिक मिर्ज़ा अब ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले तीसरे घुड़सवार बन जाएंगे. एक जनवरी से 31 दिसंबर तक की रैंकिंग आ गई है. इस रैंकिंग के आधार पर मिर्ज़ा को क्वॉलिफिकेशन मिला है. दो बार के एशियन गेम्स मेडलिस्ट मिर्ज़ा ने अपने पहले घोड़े पर 34 और दूसरे घोड़े पर 30 पॉइंट्स बनाए. मिर्ज़ा के रूप में पूरे 20 साल बाद कोई भारतीय घुड़सवार ओलंपिक में उतरेगा. उनसे पहले सिडनी 2000 ओलंपिक में इम्तियाज़ अनीस उतरे थे. वाइल्ड कार्ड के जरिए ओलंपिक खेलने वाले अनीस से पहले 1996 अटलांटा ओलंपिक में विंग कमांडर आईजे लांबा घुड़सवारी में भारत के लिए खेले थे.
# क्या है प्रोसेस?
ओलंपिक क्वॉलिफिकेशन के लिए घुड़सवारों को चार स्टार लेवल के टूर्नामेंट्स में उतरना होता है. रैंकिंग सिस्टम के मुताबिक राइडर और घोड़े की जोड़ी पूरे साल टूर्नामेंट्स में खेलकर पॉइंट्स बटोरती है. पॉइंट्स कमाने के लिए राइडर को टूर्नामेंट में भाग लेने वाले प्रतियोगियों की संख्या के टॉप 25 प्रतिशत में फिनिश करना होना है. राइडर कंपटिशन में जितना ऊपर फिनिश करता है, उसे उतने ही ज्यादा पॉइंट्स मिलते हैं. पिछले साल मिर्ज़ा का पहला घोड़ा चोटिल हो गया था. इससे उनकी उम्मीदों को बड़ा झटका लगा था लेकिन बाद में उनके दोनों नए घोड़ों ने बेहतरीन काम किया और वह क्वॉलिफाई करने में सफल रहे. मिर्ज़ा ने साउथ-ईस्ट एशिया और ओसेनिया की रैंकिंग टॉप की. मिर्ज़ा ने 6 इवेंट्स में से 64 पॉइंट्स स्कोर किए.
मिर्ज़ा सबसे पहले साल 2018 में चर्चा में आए थे. इसी साल वह 1982 के बाद एशियन गेम्स में इंडिविजुअल मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बने थे. जकार्ता में हुए एशियन गेम्स में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता था. व्यक्तिगत मेडल के साथ ही उन्होंने यहां टीम मेडल भी अपने नाम किया था.
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